आसनसोल रेल मंडल के सीतारामपुर जंक्शन स्टेशन से महज 200 मीटर की दूरी पर रेलवे की जमीन पर हुए पांच छोटे-छोटे अतिक्रमणों को आज शांतिपूर्ण ढंग से हटा दिया गया। एक शिकायत के बाद रेलवे प्रशासन द्वारा की गई इस कार्रवाई में स्थानीय दुकानदारों और राजनीतिक प्रतिनिधियों ने पूर्ण सहयोग दिया, जिससे बिना किसी विरोध के यह अभियान संपन्न हो सका।
जानकारी के अनुसार, सीतारामपुर स्टेशन से थोड़ी दूर, जहां रेलवे की सीमा समाप्त होती है, वहाँ बांस और त्रिपाल की अस्थायी संरचनाओं में चाय, पान, चिकन, बिरयानी और साइकिल पंचर, नाई जैसी छोटी दुकानें संचालित हो रही थीं। ये दुकानें कुछ समय से यहाँ मौजूद थीं और इनसे लगभग 50 परिवारों की रोजी-रोटी चलती थी। इन छोटे व्यवसायों पर आश्रित परिवारों के लिए यह उनकी दैनिक आजीविका का एकमात्र साधन था।
हाल ही में इन अतिक्रमणों के खिलाफ रेलवे प्रशासन को एक शिकायत मिली थी। शिकायत पर संज्ञान लेते हुए, आसनसोल रेल मंडल की ओर से सीतारामपुर आरपीएफ प्रभारी, सीतारामपुर सीनियर सेक्सॉन इंजिनियर आई.ओ.डब्लू अधिकारियों की एक संयुक्त टीम का गठन किया गया। इस टीम ने आज सुबह मौके पर पहुंचकर अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया शुरू की। विशेष रूप आसनसोल रेल मंडल के सीतारामपुर सेक्सशन ए.ई.एन लाइन वरीय अधिकारी मौजूद थे।

स्थानीय नेताओं का सराहनीय हस्तक्षेप
अतिक्रमण हटाओ अभियान के दौरान भारतीय जनता पार्टी के स्थानीय काउंसिलर अमित तुलसियान और जाने-माने समाजसेवी सह राजनितिक नेता संतोष कुमार वर्मा ने अहम भूमिका निभाई। उन्होंने मौके पर मौजूद रहकर रेलवे अधिकारियों और प्रभावित दुकानदारों के बीच समन्वय स्थापित किया। उनके हस्तक्षेप से ही यह सुनिश्चित हो पाया कि पूरी प्रक्रिया शांतिपूर्ण और सौहार्दपूर्ण माहौल में संपन्न हो।
श्री संतोष कुमार वर्मा ने मीडिया से बात करते हुए कहा, “ये दुकानें अस्थायी प्रकृति की थीं और रेलवे के नोटिस के बाद इन्हें हटा दिया गया है। हमने रेलवे प्रशासन को पूरा सहयोग दिया है। लेकिन हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि ये सभी दुकानदार छोटे व्यवसायी हैं, जो रोज कमाकर खाते हैं। इस बेरोजगारी के दौर में उनका रोजगार छिन जाना एक गंभीर समस्या है।”
श्री वर्मा ने आगे बताया कि उन्होंने दुकानदारों को आश्वस्त किया है कि वे जल्द ही मंडल रेल प्रबंधक (डीआरएम) को एक पत्र लिखेंगे। इस पत्र में पूजा के दौरान इन दुकानदारों को अस्थायी रूप से दुकानें लगाने की व्यवस्था करने का अनुरोध किया जाएगा। उन्होंने मानवीय आधार पर डीआरएम से इस मामले पर विचार करने की अपील की है, ताकि इन परिवारों को अपनी आजीविका चलाने का अवसर मिल सके।
स्थानीय नेताओं और दुकानदारों की ओर से रेलवे प्रशासन से यह भी अनुरोध किया गया है कि वे भविष्य में इन छोटे दुकानदारों के लिए कोई स्थायी समाधान तलाशें, जिससे वे एक शांत और व्यवस्थित माहौल में अपनी रोजी-रोटी कमा सकें। यह देखना बाकी है कि रेलवे प्रशासन इस मानवीय अपील पर क्या रुख अपनाता है।




















