“कहाँ गया वो उजाला, कहाँ गया सवेरा,
न्याय की चौखट पे क्यों है अँधेरा?
आँखों पे पट्टी, हाथों में तराजू,
पर देख न पाई, इंसाँ का दर्द ग़ज़ब का।
न्याय ओ न्याय! तेरी राह है कठिन,
आम जन रोये, कौन सुनेगा यह हवन?
चीखों से गूंजा है ये आसमान,
फिर भी खामोश हैं तेरे दरबार।
वो माँ की सिसकी, वो बहन की पुकार,
कानों तक पहुँची, पर दिल न हुआ बेकरार।
कभी कोई वकील विरोध में खड़ा,
तो कोई पक्ष में, पर सत्य कहाँ पड़ा?
संविधान के पन्ने बोझिल से हो गए,
बाबा साहेब के सपने कहीं खो गए।
निर्भया की यादें, दिलों में सवाल,
क्या इंसाफ़ मिलेगा, या फिर सिर्फ़ मलाल?
सत्ता हो या विपक्ष, सबने खेल रचा,
न्याय की चौखट पे इंसान ठगा।
अत्याचार बढ़ता, अंधकार घना,
आम जन का जीवन क्यों इतना सज़ा?
न्याय ओ न्याय! तेरी राह है कठिन,
आम जन रोये, कौन सुनेगा यह हवन?
चीखों से गूंजा है ये आसमान,
फिर भी खामोश हैं तेरे दरबार।”
🌸🌿🙏
*✍️ “सुशील कुमार सुमन”*
अध्यक्ष, आईओए
सेल आईएसपी, बर्नपुर










