*“नार्निया के 75 वर्ष”*
“सपनों की धरती, जादू के रंग,
सिंह की गर्जन, साहस के संग।
बर्फ़ीले जंगल, रहस्य की रात,
नार्निया पुकारे—चलो साथ-साथ।
अलमारी का द्वार खुला कहीं,
कल्पनाओं का संसार मिला यहीं।
बच्चों की आँखों में चेतन प्रकाश,
असंभव को संभव करता हर प्रयास।
अस्लान की शेर-सी पुकार,
न्याय, दया, सच्चाई का सार।
डर में भी उम्मीद की किरण जगाए,
अंधेरे के दानवों को दूर भगाए।
जादूगरनी का अभिमान पिघला,
सर्दियों का श्राप भी छूटा-विघला।
वसंत के फूलों संग आया वो क्षण,
जहाँ हर हृदय में खिल उठा मन।
पचहत्तर सालों की अद्भुत उड़ान,
कल्पना से इतिहास बने कथान।
हर पीढ़ी को मिली नई प्रेरणा,
साहस, प्रेम और निष्ठा की त्रिवेणा।
नमन उन सपनों को, उस लेखनी को,
जो बच्चों की दुनिया में जगा दी रोशनी को।
नार्निया अमर है, अमिट है कहानी,
संसार में गूँजे इसकी अमर रवानी।”
✍️ “सुशील कुमार सुमन”
अध्यक्ष, आईओ
सेल आईएसपी, बर्नपुर
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