🇮🇳 *“वंदे मातरम्”* 🇮🇳
*(के 150 वर्षों को शत-शत नमन )*
“आवाज़ जो गूँजी थी माँ भारती की गोद में,
वो स्वर जिसने जगा दिया दीप हर जन के बोध में।
“वंदे मातरम्” — न था बस कोई गीत,
वो था स्वतंत्रता का प्रथम संगीत।
“बंकिम चंद्र” के कलम से निकला वो अमर पुकार,
जिसने तोड़ दिए गुलामी के हर दीवार।
उसकी ध्वनि में था आकाश का गान,
धरती ने भी कहा — “माँ, तुझे प्रणाम!”
हर क्रांतिकारी के होंठों पर था यही मंत्र,
यही था उनका विश्वास, यही था केंद्र।
जेलों में भी जब गूँजा “वंदे मातरम्” का नाम,
तो लोहे की दीवारें भी हुईं नम और बदनाम।
यह गीत नहीं, भावना का सागर है,
हर शब्द में भारत का उज्ज्वल आगर है।
“सुजलां सुफलां मलयजशीतलाम्” की ध्वनि,
आज भी हृदय में जगाती मातृभूमि की वाणी।
डेढ़ सौ वर्षों की यात्रा में यह गीत अमर रहा,
हर युग में भारत को एक सूत्र में बाँधता रहा।
जब भी झुके तिरंगा, जब भी बजे राष्ट्रगान,
मन में कहीं गूँज उठे — “वंदे मातरम्” का सम्मान।
आओ, इस पावन गीत को फिर गाएँ,
उसकी आत्मा को अपने जीवन में बसाएँ।
क्योंकि “वंदे मातरम्” केवल उच्चारण नहीं,
वो भारत के अस्तित्व का प्रथम स्पंदन है यहीं।
शत-शत नमन उस स्वर को, उस भावना को,
जो माँ भारती के हृदय से उठी थी —
*“वंदे मातरम्”! 💐”*
✍️ “सुशील कुमार सुमन”
अध्यक्ष, आईओ
सेल आईएसपी, बर्नपुर
*#सुशीलकुमारसुमन*
*#युवा*










