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🟣 *”आज बिहार में फिर चुनाव है”*

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ASANSOL DASTAK ONLINE DESK

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“आज बिहार में फिर चुनाव है,
लोकतंत्र का नया अध्याय है।
फिर गलियों में चर्चा है तेज,
फिर हर नुक्कड़ पर सवाल है—
“कौन बदलेगा बिहार का हाल है?”

दिल्ली से आई एक दुखद खबर,
फिर बम धमाके ने हिलाया शहर।
देश दुआ में जुड़ा एक साथ,
शांति की आस, दहशत के बीच का मार्ग तलाश।

और वहीं खबर आई सिनेमा के घर से,
धर्मेन्द्र जी बीमार हैं, दुआएँ सबके स्वर से।
हम सब झुकाते हैं सिर प्रभु के दर पे,
कहते हैं — “वो जल्द स्वस्थ हों, मुस्कुराएं फिर परदे पे।”

नीतीश कुमार (NK) फिर गंभीर नज़र में हैं,
कहते—“अनुभव ही सबसे बड़ी डगर में है।”
कभी साथ, कभी अलग, अब फिर साथ,
बिहार की राजनीति में वो जैसे शतरंज का मात।

प्रशांत किशोर (PK) अब मिशन लेकर चल पड़े,
“जन सुराज” का सपना आंखों में पल पड़े।
गाँव-गाँव घूमते हैं, जनता की बात सुनाते,
कहते—“बदलाव किताबों से नहीं, जनता से आते।”

तेजस्वी यादव मंच पे जोश दिखाते हैं,
रोज़गार और युवा शक्ति का नारा लगाते हैं।
कहते—“मेरे बिहार में पलायन नहीं होगा,”
“हर घर में काम होगा, सपना साकार होगा।”

तेजू भैया (तेजप्रताप) अपने अंदाज़ के निराले हैं,
कभी कृष्ण, कभी शिव के हवाले हैं।
उनकी बातें भले हँसी में उड़ जाएं लोग,
पर जनता जानती है—दिल में दर्द के उजाले हैं।

चिराग पासवान रोशनी बनना चाहते हैं,
*‘युवा’* नेतृत्व की नई राह बनाना चाहते हैं।
कहते—“मैं अपने पिता का सपना पूरा करूंगा,”
“बिहार को फिर से जगमगाऊंगा।”

सम्राट चौधरी जोश में गरजते हैं,
कहते—“अब बिहार में भाजपा चमकते हैं।”
विकास, धर्म, राष्ट्र, और गर्व का गीत,
उनकी रैली में गूँजता है जीत का संगीत।

पप्पू यादव जनता के बीच खड़े हैं,
हर दर्द में, हर सड़क पे पड़े हैं।
कहते—“मेरी राजनीति सेवा का नाम है,”
“गरीब की आह ही मेरा काम है।”

राहुल गांधी आते हैं उम्मीद का पैगाम लेकर,
“नफरत नहीं, मोहब्बत” का सलाम लेकर।
भारत जोड़ो की भावना से कहते हैं साफ़,
“बिहार की मिट्टी से उठेगा जनविकास।”

मोदी जी का नाम गूंजता आसमान में,
हर भाषण में ‘विकास’ की तान में।
कहते—“बिहार हमारा गर्व है,”
“नई उड़ान, नया पर्व है।”

अमित शाह जी की रणनीति गूढ़ है,
हर सभा में सटीक, हर योजना में धूर्त है।
वे कहते—“संघटन ही शक्ति का मूल है,”
“बिहार की जनता समझदार और कूल है।”

भीड़ में जनता मुस्कुराती है,
कहीं आशा, कहीं उलझन पाती है।
कोई कहता—“अबकी बार बदलाव चाहिए,”
कोई कहता—“स्थिर सरकार चाहिए।”

गंगा किनारे खड़ा एक *“युवा”* सोचता है,
“हमने वादे बहुत सुने, अब नतीजा देखना है।”
बूढ़ी माँ कहती—“बेटा, बस रोज़गार दे दो,”
किसान कहता—“धान का भाव ठीक कर दो।”

आज बिहार में फिर चुनाव है,
फिर उम्मीदों का बहाव है।
जनता के दिल में सवाल वही—
“नेता बदले, या बस नाम वही?”

लोकतंत्र की इस पावन धरती पर,
सत्य ही सबसे बड़ा प्रवाह है।
राजनीति आती-जाती रहती है,
पर जनता — वही असली “राजा” है।

🙏
धर्मेन्द्र जी के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना,
देश में शांति, और बिहार में सद्भावना।
लोकतंत्र की गंगा फिर बहे,
सच्चाई और सेवा से बिहार सजे।

✍️ “सुशील कुमार सुमन”
अध्यक्ष, आईओ
सेल आईएसपी, बर्नपुर
*#सुशीलकुमारसुमन*
#युवा