*“प्यारा झारखंड!”*
*“जोहार झारखंड!*
स्थापना दिवस पर शुभकामनाएँ अपार,
यह धरती वीरों की, संस्कृति की,
जिस पर हर जन को है गर्व अपार।
भगवान बिरसा मुंडा के चरणों में वंदन,
उनके आशीष से बढ़े झारखंड का पुण्य-गगन।
जंगल-झाड़ियों से भरी भूमि,
हरियाली का अनुपम श्रृंगार,
आदिवासी बाहुल्य यह प्रदेश—
अपनी पहचान में है दमदार।
पूर्व में बंगाल का स्नेह,
पश्चिम में छत्तीसगढ़-उ.प्रदेश,
उत्तर में बिहार का साथ,
दक्षिण में ओड़िशा का संदेश—
चारों दिशाओं की गोद में पला
झारखंड का अद्भुत परिवेश।
वनांचल आंदोलन के रक्त-संघर्ष से,
जब इतिहास नया करवट पाता,
तब तिरंगा गर्व से कह उठता—
“यह झारखंड है!”
और दिल इसे अपना राज्य कह बुलाता।
हमारा प्यारा झारखंड—
सचमुच सबको है भाता।
भाषाएँ अनेक, धर्म अनेक,
पर दिल सभी के हैं एक,
कोयल, दामोदर, खड़कई, सुवर्णरेखा—
इनकी लहरों में जीवन की चमक अनेक।
अलग राज्य का स्वप्न जगाने वाले
जयपाल सिंह मुंडा के चरणों में नमन,
और इस धरती पर जन्मे
भगवान बिरसा मुंडा को कोटि-कोटि अभिनंदन।
उनके त्याग से गूँज उठा यह प्रदेश—
“हमारा प्यारा झारखंड सबको है भाते!”
रांची, बोकारो, धनबाद, जमशेदपुर—
औद्योगिक आधार स्तंभ बन जाते,
कोयला, लोहा, यूरेनियम के भंडार
देश की ऊर्जा को नई राह दिखाते।
कला, साहित्य, संस्कृति यहाँ की
अपनी पहचान स्वयं बनाते।
टुसू, सरहुल, करमा की थिरकन,
छऊ, नटुआ की लय-ताल,
इस धरती के लोकगीतों में
घुला है जीवन का मधुर कमाल।
देवघर का बैधनाथ धाम पुकारे—
“बोल बम! बोल बम!”
इसकी प्रतिध्वनि से गूँज उठता है
श्रद्धा का हर इक पल-क्षण।
सिद्धो-कान्हू, तिलका मांझी, अलबर्ट एक्का—
स्वाभिमान के प्रतीक महान,
इन वीरों के बलिदान की गाथा
सजाती है झारखंड का सम्मान।
प्रकृति, खनिज और आदिवासी शौर्य
सब मिलकर बनते इसका स्वर्णिम मान।
खनिज-संपदा से भरपूर यह भूमि,
हरियाली इसकी पहचान,
भारत की आत्मा का ग्रामीण आधार—
यही झारखंड, यही इसकी शान।
*पलाश के लाल फूल*
स्वागत में बिछ जाते,
सौरा चित्रकारी रंगों से
धरती का हृदय सजाते।
महाभारत की पशुभूमि यह
इतिहास की स्मृतियाँ जगाते।
लोग यहाँ मिलजुलकर रहते,
कला और संस्कृति को
बाहरी प्रभावों से बचाते,
छऊ नृत्य को विदेशों में
भारतीय पहचान बनाते।
हमारा प्यारा झारखंड—
हर दिल को है भाते!
*जोहार झारखंड!*
*जय झारखंड!!”*
✍️ “सुशील कुमार सुमन”
अध्यक्ष, आईओ
सेल आईएसपी, बर्नपुर
*#सुशीलकुमारसुमन*
*#युवा*










