*प्रो. अभिजीत मुखर्जी ‘द ग्राउंडवॉटर प्रोजेक्ट’ के निदेशक मंडल में शामिल
खड़गपुर | 9 फरवरी 2026 – भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान खड़गपुर को यह घोषणा करते हुए हर्ष हो रहा है कि प्रो. अभिजीत मुखर्जी को “द ग्राउंडवॉटर प्रोजेक्ट (GW-Project)” के निदेशक मंडल में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया गया है। यह नियुक्ति जनवरी 2026 से प्रभावी होगी।
“द ग्राउंडवॉटर प्रोजेक्ट” विश्व के सबसे बड़े परोपकारी, गैर-लाभकारी संगठनों में से एक है, जो वैश्विक स्तर पर भूजल जागरूकता और ज्ञान के प्रसार के लिए कार्य करता है। यह संगठन स्टॉकहोम वॉटर प्राइज से सम्मानित प्रो. जॉन चेरी के नेतृत्व में संचालित है और 70 से अधिक देशों के 1,000 से अधिक स्वयंसेवकों द्वारा समर्थित है। संगठन की वैज्ञानिक प्रकाशन सामग्री 59 भाषाओं में उपलब्ध है।
प्रो. मुखर्जी को इस दस-सदस्यीय अंतरराष्ट्रीय निदेशक मंडल में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया गया है, जिसमें विश्वभर के प्रतिष्ठित हाइड्रोजियोलॉजिस्ट एवं अन्य विषयों के विशेषज्ञ शामिल हैं, जिनका भूजल विज्ञान में दीर्घकालिक योगदान रहा है। आमंत्रण पत्र में यह अपेक्षा व्यक्त की गई है कि प्रो. मुखर्जी, निदेशक मंडल के सदस्य के रूप में, संगठन के वैश्विक दृष्टिकोण को दिशा देने के साथ-साथ भारत में भूजल समुदाय के लिए इसकी प्रासंगिकता और उपयोगिता को और सुदृढ़ करेंगे।
प्रो. अभिजीत मुखर्जी, आईआईटी खड़गपुर में भूविज्ञान एवं भूभौतिकी विभाग तथा पर्यावरण विज्ञान एवं अभियांत्रिकी स्कूल में प्रोफेसर हैं और वर्तमान में एसोसिएट डीन (अनुसंधान एवं विकास) के रूप में कार्यरत हैं। वे भूजल प्रदूषण पर अपने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त शोध कार्यों के लिए जाने जाते हैं।
उन्हें अनेक राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सम्मानों से नवाजा गया है, जिनमें राष्ट्रीय भूविज्ञान पुरस्कार (2014), जिसे भारत के माननीय राष्ट्रपति द्वारा प्रदान किया गया, तथा शांति स्वरूप भटनागर पुरस्कार (2020) — भारत का सर्वोच्च विज्ञान सम्मान — प्रमुख हैं। प्रो. मुखर्जी भूवैज्ञानिक सोसायटी ऑफ अमेरिका (GSA) और अमेरिकन जियोफिजिकल यूनियन (AGU) — दोनों के फेलो बनने वाले पहले भारतीय हैं। इसके अतिरिक्त, उन्हें AGU, GSA और अंतरराष्ट्रीय हाइड्रोजियोलॉजिस्ट संघ से भी अनेक उच्चतम वैश्विक सम्मान प्राप्त हुए हैं।
आईआईटी खड़गपुर इस विशिष्ट वैश्विक दायित्व के लिए प्रो. अभिजीत मुखर्जी को हार्दिक बधाई देता है और भूजल विज्ञान एवं सतत विकास के क्षेत्र में उनके निरंतर योगदान की कामना करता है।
प्रतीक दामा










