*”एक रहस्यमयी रात !..”*
“हिमालय की गोद में बसा एक छोटा-सा गाँव था—हिमधारा।
उत्तराखंड की ऊँची पहाड़ियों के बीच स्थित यह गाँव सर्दियों में किसी स्वप्नलोक से कम नहीं लगता था। चारों ओर फैली सफ़ेद बर्फ़, देवदार के ऊँचे वृक्ष और दूर तक पसरी निस्तब्धता मानो प्रकृति की कोई अद्भुत चित्रकला प्रतीत होती थी।
परंतु इस शांत सौंदर्य के भीतर भी एक अनकहा रहस्य छिपा हुआ था।
गाँव के बुज़ुर्ग अक्सर कहा करते थे कि हिमधारा की घाटी में कुछ कहानियाँ ऐसी हैं जो कभी पूरी नहीं होतीं। कभी प्रेम अधूरा रह जाता है, तो कभी सच बर्फ़ की मोटी परतों के नीचे दबकर रह जाता है।
इसी गाँव में रहती थी नंदिनी।
नंदिनी एक साधारण पहाड़ी लड़की थी, पर उसके व्यक्तित्व में एक अद्भुत दृढ़ता थी। उसकी बड़ी-बड़ी आँखों में जैसे पहाड़ों की गहराई समाई हुई थी।
उसके पिता कभी गाँव के छोटे से सराय के मालिक थे। वे ईमानदार और मिलनसार व्यक्ति थे, इसलिए पूरे गाँव में उनका सम्मान था। लेकिन उनके अचानक निधन के बाद सारी जिम्मेदारी नंदिनी के कंधों पर आ गई।
अब वही उस सराय को चलाती थी—“हिमधारा विश्राम गृह।”
एक सर्द शाम बर्फ़ीली आँधी चल रही थी। हवा की तेज़ आवाज़ के साथ बर्फ़ के फाहे चारों ओर उड़ रहे थे। उसी समय छोटे से रेलवे स्टेशन पर एक ट्रेन आकर रुकी।
उस ट्रेन से उतरा एक युवक—अभय राठौर।
अभय दिल्ली का एक युवा पत्रकार था। उसकी आँखों में तेज़ था और चेहरे पर थकान की हल्की छाया।
वह किसी साधारण यात्रा पर नहीं आया था।
असल में वह एक रहस्य की तलाश में हिमधारा पहुँचा था।
कुछ महीनों पहले इस इलाके में कई अजीब घटनाएँ हुई थीं। रात के सन्नाटे में पहाड़ों से अजीब-सी आवाज़ें सुनाई देती थीं। कुछ लोग अचानक गायब हो गए थे।
सरकार ने इन घटनाओं को सामान्य कहकर टाल दिया था, लेकिन अभय को इस पर विश्वास नहीं था।
वह सच जानना चाहता था।
उस रात वह नंदिनी के सराय पहुँचा।
दरवाज़ा खुला और सामने खड़ी थी नंदिनी।
दोनों की नज़रें पहली बार मिलीं।
अभय को लगा जैसे इस शांत लड़की के भीतर भी कोई अनकही कहानी छिपी है।
कुछ दिनों तक अभय गाँव में रहा।
दिन में वह लोगों से बातचीत करता और रात में अपने नोट्स लिखता। धीरे-धीरे उसे पता चला कि गाँव के लोग डरे हुए हैं।
वे धीरे-धीरे बताते थे कि पहाड़ों में कुछ तस्कर सक्रिय हैं जो जंगल के रास्तों से अवैध सामान लाते-जाते हैं।
और जो लोग उनका विरोध करते हैं, वे अचानक गायब हो जाते हैं।
अभय को धीरे-धीरे समझ आने लगा कि हिमधारा की शांति के पीछे एक बड़ा अपराध छिपा हुआ है।
नंदिनी भी इन बातों को जानती थी।
एक रात उसने धीमी आवाज़ में कहा—
“आप यहाँ बहुत सावधानी से रहिए। कुछ लोग नहीं चाहते कि यह सच सामने आए।”
अभय ने आश्चर्य से पूछा—
“तुम्हें यह कैसे पता?”
नंदिनी कुछ देर तक चुप रही।
फिर धीमे स्वर में बोली—
“क्योंकि मेरे पिता की मृत्यु भी शायद कोई दुर्घटना नहीं थी।”
यह सुनकर अभय चौंक गया।
रहस्य की इस खोज के बीच अभय और नंदिनी के बीच एक अनकहा रिश्ता बनने लगा।
वे अक्सर शाम को पहाड़ी रास्तों पर टहलने निकल जाते। बर्फ़ गिरती रहती और घाटी में चाँदनी फैल जाती।
एक रात नंदिनी ने अचानक पूछा—
“शहर में लोग इतने व्यस्त क्यों रहते हैं?”
अभय मुस्कुराया और बोला—
“क्योंकि वहाँ लोगों को खुद से मिलने का समय नहीं मिलता।”
नंदिनी ने धीरे से कहा—
“पहाड़ों में लोग गरीब होते हैं, लेकिन दिल से बहुत अमीर होते हैं।”
अभय को महसूस हुआ कि यह लड़की केवल सुंदर ही नहीं, बल्कि बहुत गहरी सोच भी रखती है।
धीरे-धीरे दोनों के बीच प्रेम का एक कोमल अंकुर फूटने लगा।
एक रात अभय पहाड़ों में घूमते-घूमते एक पुरानी गुफा के पास पहुँच गया।
वहाँ उसने कुछ लोगों को देखा। वे हथियारों के बक्से और कुछ संदिग्ध सामान छिपा रहे थे।
अभय समझ गया कि यह तस्करों का अड्डा है।
तभी अचानक किसी ने पीछे से उसकी गर्दन पकड़ ली।
“तुम यहाँ क्या कर रहे हो?”
अभय मुश्किल में पड़ गया।
लेकिन उसी क्षण दूर से आवाज़ आई—
“पुलिस आ रही है!”
यह सुनते ही तस्कर घबरा गए और भाग खड़े हुए।
अभय ने पीछे मुड़कर देखा—
वह नंदिनी थी।
उसने उसकी जान बचा ली थी।
अब अभय और नंदिनी ने मिलकर इस पूरे रहस्य को उजागर करने का निश्चय किया।
जाँच करने पर उन्हें पता चला कि इस पूरे गिरोह का नेता गाँव का ही एक प्रभावशाली व्यक्ति था—धर्मवीर सिंह।
वह बाहर से दानवीर और समाजसेवी बनकर रहता था, लेकिन असल में वही इस अपराध का सरगना था।
नंदिनी के पिता ने उसकी सच्चाई जान ली थी।
इसी कारण उनकी हत्या कर दी गई थी।
यह सच सुनकर नंदिनी की आँखों में आँसू आ गए।
लेकिन अब वह डरने वाली नहीं थी।
एक रात अभय ने पुलिस को सूचना दे दी।
पुलिस गुप्त रूप से गाँव पहुँची।
उधर धर्मवीर को भी शक हो गया था।
उसने अपने आदमियों को आदेश दिया—
“उस पत्रकार को खत्म कर दो।”
बर्फ़ीली रात में अचानक गोलियों की आवाज़ गूँज उठी।
पहाड़ों में भगदड़ मच गई।
लेकिन अंत में पुलिस ने पूरे गिरोह को पकड़ लिया।
धर्मवीर भी गिरफ्तार हो गया।
सालों से छिपा हुआ सच आखिरकार सामने आ गया।
कुछ महीनों बाद हिमधारा फिर से शांत हो गया।
अब गाँव के लोग निडर होकर जीने लगे थे।
एक सुबह सूरज की पहली किरणें बर्फ़ पर चमक रही थीं।
अभय और नंदिनी पहाड़ी रास्ते पर खड़े थे।
अभय ने मुस्कुराते हुए कहा—
“अब मेरा काम खत्म हो गया है। लेकिन एक सवाल अभी बाकी है।”
नंदिनी ने पूछा—
“कौन-सा सवाल?”
अभय ने धीरे से कहा—
“क्या तुम मेरे साथ चलोगी?”
नंदिनी की आँखों में आँसू आ गए।
लेकिन इस बार वे दुःख के आँसू नहीं थे।
उसने धीरे से कहा—
“जहाँ सच्चाई और प्रेम हो, वहाँ जाना मुझे स्वीकार है।”
कुछ महीनों बाद हिमधारा में एक छोटी-सी शादी हुई।
पूरा गाँव खुश था।
अभय और नंदिनी ने मिलकर उस सराय को एक सुंदर अतिथि गृह बना दिया।
अब दूर-दूर से लोग वहाँ आते थे—
पहाड़ों की शांति और प्रेम की उस कहानी को सुनने, जिसने हिमधारा की घाटी को हमेशा के लिए बदल दिया।
गाँव के बुज़ुर्ग आज भी मुस्कुराकर कहते हैं—
“कभी-कभी बर्फ़ की घाटियों में भी
कहानियाँ अधूरी नहीं रहतीं।”
और सचमुच,
हिमधारा की घाटी में
इस बार एक प्रेम कहानी
अधूरी नहीं रही।”
✍️ सुशील कुमार सुमन
अध्यक्ष, आईओ
सेल आईएसपी, बर्नपुर
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