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*”अन्याय के विरुद्ध अमर गाथा: बाबासाहब को समर्पित”*

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ASANSOL DASTAK ONLINE DESK

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*”अन्याय के विरुद्ध अमर गाथा: बाबासाहब को समर्पित”*

“यदि अन्याय से लड़ते हुए आपकी मृत्यु हो जाती है, तो आपकी आने वाली पीढ़ियाँ अवश्य उसका बदला लेंगी।
परंतु यदि आप अन्याय सहते-सहते ही मर जाएँगे, तो आपकी आने वाली पीढ़ियाँ भी सदैव गुलाम बनी रहेंगी। यह विचार न केवल चेतना को झकझोरता है, बल्कि *डॉ. भीमराव आंबेडकर के जीवन और संघर्ष को भी सारगर्भित रूप में प्रस्तुत करता है।*

*आज भारत रत्न बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर की 135वीं जयंती पर, पूरा राष्ट्र उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित कर रहा है।*
उन्होंने न केवल संविधान निर्माण किया, बल्कि उसे सामाजिक और आर्थिक न्याय का आधार बनाया। उनके योगदान ने भारत को एक सशक्त, समतामूलक और न्यायपूर्ण गणराज्य के रूप में स्थापित किया।

*राज्य की भूमिका तय की – एक ऐतिहासिक पहल*

बाबा साहेब ने संविधान में यह स्पष्ट किया कि राज्य की जिम्मेदारी केवल शासन करना नहीं, बल्कि समाज के कमजोर तबकों को ऊपर उठाना भी है। उन्होंने सुनिश्चित किया कि भारत सरकार उद्योग, शिक्षा, स्वास्थ्य और संसाधनों के समान वितरण की दिशा में कार्य करे।

*नीति निदेशक सिद्धांतों में समाजवाद का सपना*

संविधान के भाग IV में डॉ. आंबेडकर द्वारा प्रतिपादित नीति निदेशक सिद्धांतों ने यह दिशा तय की कि राज्य समाजवाद आधारित आर्थिक व्यवस्था लागू करेगा। इसी मार्गदर्शन के कारण देश में *SAIL, BHEL, NTPC, IOC जैसे सार्वजनिक उपक्रम (PSUs) अस्तित्व में आए* – जो आज भी भारत की आर्थिक आत्मनिर्भरता के स्तंभ हैं।

*श्रमिकों के अधिकारों के संरक्षक*

डॉ. आंबेडकर ने श्रमिकों के कार्य घंटों, स्वास्थ्य, सुरक्षा और जीवन स्तर में सुधार हेतु कई कानून बनाए। उन्होंने औद्योगिक क्षेत्र में काम कर रहे लाखों लोगों को सम्मानजनक जीवन जीने की आशा दी, जो आज *PSU कर्मचारियों* को बेहतर सुविधाओं के रूप में दिखाई देती है।

*वित्तीय संस्थानों की नींव रखी*

बाबा साहेब की आर्थिक दूरदर्शिता के कारण ही भारत को RBI जैसी संस्था मिली, जो आज नीतिगत और वित्तीय स्थिरता प्रदान कर रही है। उन्होंने योजनाबद्ध अर्थव्यवस्था का सपना देखा और उसका खाका तैयार किया।

*भारत के ‘संविधान पुरुष’ को नमन*

आज जब हम संविधान की शक्तियों को अनुभव करते हैं – विचार, अभिव्यक्ति, धर्म, अवसर और न्याय की स्वतंत्रता – तब हमें याद आता है कि यह सब बाबा साहेब की संघर्षपूर्ण यात्रा का परिणाम है। वो न राजा बने, न दरबार सजे उनके लिए, पर करोड़ों दिलों के सम्राट बनकर वो अमर हो गए।

“पर्वतों से अडिग थे,
हौसले जिनके चट्टानों से दृढ़ थे,
संकल्प जिनके भारत की आत्मा से जुड़े थे –
उन्हें मेरा कोटि-कोटि नमन, शत-शत प्रणाम।”

*आओ, इस आंबेडकर जयंती पर हम प्रतिज्ञा लें –*

*कि हम अन्याय के विरुद्ध आवाज उठाएँगे, कि हम अपने संविधान की गरिमा को बनाए रखेंगे, कि हम सामाजिक समरसता और आर्थिक न्याय के लिए कार्य करेंगे, और भाग्य पर नहीं, अपनी शक्ति पर विश्वास करेंगे।*

*भारत रत्न बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर को आंबेडकर जयंती पर श्रद्धांजलि!*

*✍️ सुशील कुमार सुमन*
अध्यक्ष, आईओए
सेल आईएसपी, बर्नपुर
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