स्कूल प्रबंधन की क्रूर जिद ने ली तीन मासूमों की जान: कक्षा से निकाले गए छात्र दामोदर नदी में डूबे, नियामतपुर में भारी कोहराम!
कुल्टी:एक तरफ शिक्षा के मंदिर में अनुशासन का पाठ पढ़ाया जा रहा है, तो दूसरी तरफ उसी कथित अनुशासन की वेदी पर तीन मासूम जिंदगियों की बलि चढ़ गई। नियामतपुर के ‘पीस पब्लिक स्कूल’ के प्रबंधन की एक संवेदनहीन जिद ने तीन हंसते-खेलते परिवारों के चिराग हमेशा के लिए बुझा दिए। शनिवार को स्कूल न आने की इतनी खौफनाक सजा मिलेगी, यह किसी ने सपने में भी नहीं सोचा था। सोमवार को स्कूल पहुंचे कक्षा 10 के 8 छात्रों को क्लास टीचर ने सिर्फ इसलिए स्कूल परिसर से बाहर धकेल दिया क्योंकि वे शनिवार को गैरहाजिर थे। शिक्षक का फरमान था—”पहले अपने मां-बाप को लेकर आओ, तभी स्कूल में कदम रखना।”मजार दर्शन के बाद नदी में उतरे, गहरे पानी ने ली जानस्कूल के दरवाजे बंद हुए तो मायूस और डरे हुए छात्र घर लौटने के बजाय डिसरगढ़ मजार की तरफ निकल गए। वहां से सभी दोस्त पास ही बहने वाली दामोदर नदी में नहाने के लिए उतरे। इसी दौरान नदी की खौफनाक गहराइयों ने तीन छात्रों को अपनी आगोश में ले लिया। पानी में डूबते दोस्तों को देख बाकी छात्रों ने चीख-पुकार मचाई। स्थानीय नाविक और पुलिस तुरंत मौके पर पहुंचे। भारी मशक्कत के बाद तीनों को गहरे पानी से बाहर निकाला गया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। जिला अस्पताल के डॉक्टरों ने तीनों किशोरों को मृत घोषित कर दिया। मृतकों की पहचान तबरेज आलम, मैफिल आलम और सैफ अख्तर के रूप में हुई है, जो कुलतोड़ा, नूरनगर और सौदागर मोहल्ला के रहने वाले थे।आक्रोशित जनता का स्कूल पर धावा, अधिकारियों ने संभाला मोर्चाइस दिल दहला देने वाले हादसे की खबर जैसे ही नियामतपुर पहुंची, पूरे इलाके में मातम और आक्रोश फैल गया। परिजनों की चीख-पुकार से आसमान कांप उठा। गुस्से से उबलते स्थानीय लोगों और परिजनों ने ‘पीस पब्लिक स्कूल’ के मुख्य द्वार को घेरकर जोरदार प्रदर्शन और हंगामा शुरू कर दिया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए कुल्टी के एसीपी जावेद हुसैन, कुल्टी थाना प्रभारी अशोक सिंह महापत्र और नियामतपुर फाड़ी प्रभारी भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने गुस्साए लोगों को समझा-बुझाकर बमुश्किल शांत कराया।मोबाइल बंद कर भागा स्कूल प्रबंधनइस पूरे मामले में सबसे शर्मनाक रवैया पीस पब्लिक स्कूल के प्रबंधन का रहा। इतनी बड़ी त्रासदी के बाद भी स्कूल प्रशासन की तरफ से कोई सामने नहीं आया। घटना के बाद से ही स्कूल प्रबंधक का मोबाइल फोन बंद है और वे जिम्मेदारी से पल्ला झाड़कर फरार बताए जा रहे हैं। कुल्टी थाने की संकतोड़िया फाड़ी पुलिस ने शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजकर मामले की जांच शुरू कर दी है। जनता अब सिर्फ एक ही सवाल पूछ रही है—इन तीन मौतों का जिम्मेदार कौन? उस लापरवाह सिस्टम और स्कूल प्रबंधन पर सख्त कार्रवाई कब होगी जिसने बच्चों को नदी के मौत के जाल में धकेल दिया?










