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मजदूरों का दोटूक- अपनी लड़ाई खुद लड़ेंगे, नहीं चाहिए राजनीतिक रंग; आसनसोल के एलोक्विंट कारखाने में भाजपा नेताओं को खदेड़ा

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ASANSOL DASTAK ONLINE DESK

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मजदूरों का दोटूक- अपनी लड़ाई खुद लड़ेंगे, नहीं चाहिए राजनीतिक रंग; आसनसोल के एलोक्विंट कारखाने में भाजपा नेताओं को खदेड़ा

सालानपुर: देन्दुआ इलाके के सकंबरी ग्रुप के ‘एलोक्विंट’ कारखाने में जारी मजदूर आंदोलन ने आज उस समय नया मोड़ ले लिया, जब प्रदर्शनकारी मजदूरों ने परिसर में पहुंचे भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं को दोटूक सुनाकर वापस लौटा दिया। मजदूरों के भारी विरोध को देखते हुए मौके पर पहुंची कल्याणेश्वरी फांड़ी की पुलिस ने स्थिति को संभाला।हक की मांग पर अड़े श्रमिकनिर्धारित न्यूनतम मजदूरी, नौकरी की सुरक्षा, PF, ESI और 8 घंटे की शिफ्ट जैसी बुनियादी मांगों को लेकर इस कारखाने के मजदूर पिछले कई दिनों से आंदोलन की राह पर हैं। मजदूर नेता अमर माहातो शुरुआत से इस प्रदर्शन की अगुवाई कर रहे हैं। इससे पहले 22 तारीख को भी श्रमिकों ने जोरदार प्रदर्शन किया था, जिसके बाद प्रबंधन ने सुरक्षा और PF-ESI से जुड़ी कुछ खामियों को तो दूर कर दिया, लेकिन सरकार द्वारा तय न्यूनतम मजदूरी का मुद्दा अब भी अटका हुआ है। इसी मांग को लेकर आज सुबह श्रमिक फिर से कारखाने के मुख्य गेट पर लामबंद हो गए।राजनीतिक दखल पर भड़के मजदूरजब कारखाने के गेट पर प्रबंधन के अधिकारियों और मजदूरों के बीच शांतिपूर्ण ढंग से बातचीत चल रही थी, ठीक उसी समय सलानपुर इलाके के कुछ भाजपा नेता वहां पहुंच गए। नेताओं को देखते ही आंदोलनकारी मजदूर भड़क उठे। श्रमिकों ने साफ शब्दों में कहा कि यह उनकी रोजी-रोटी और वजूद की लड़ाई है, जिसमें वे किसी भी राजनीतिक दल का दखल या फायदा बर्दाश्त नहीं करेंगे। तीखी बहस के बाद गुस्साए मजदूरों ने भाजपा नेताओं को वहां से जाने पर मजबूर कर दिया।प्रबंधन को 17 तारीख तक का अल्टीमेटमनेताओं के जाने के बाद प्रबंधन और मजदूरों के बीच दोबारा वार्ता शुरू हुई। बैठक में कारखाना प्रबंधन ने मांगों पर विचार करने के लिए 17 तारीख तक का समय मांगा है। वहीं मजदूरों ने भी स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि तय समय सीमा के भीतर न्यूनतम मजदूरी लागू नहीं की गई, तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा।मजदूर नेता अमर माहातो ने मामले पर कहा, “यह हमारे हक और पेट की लड़ाई है। इसमें कोई राजनीतिक रंग नहीं है और न ही हम इसे किसी राजनीतिक एजेंडे की भेंट चढ़ने देंगे। मजदूर अपनी ताकत पर अपना हक हासिल करेंगे।” फिलहाल प्रबंधन के भरोसे के बाद धरना स्थगित कर दिया गया है, लेकिन 17 तारीख की समय सीमा को लेकर इलाके में सुगबुगाहट तेज है।