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आस्था और उल्लास के साथ संपन्न हुआ विपत्तारिणी व्रत महिलाओं ने परिवार की खुशहाली के लिए रखा उपवास, मंदिरों में गूंजी कथा; सिंदूर खेलकर बांटी खुशियां

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ASANSOL DASTAK ONLINE DESK

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आस्था और उल्लास के साथ संपन्न हुआ विपत्तारिणी व्रत

महिलाओं ने परिवार की खुशहाली के लिए रखा उपवास,

मंदिरों में गूंजी कथा; सिंदूर खेलकर बांटी खुशियां

कुल्टी:पश्चिम बंगाल के प्रमुख त्योहारों में शामिल पावन ‘विपत्तारिणी व्रत’ शनिवार को कुल्टी विधानसभा क्षेत्र सहित आस-पास के इलाकों में पूरी श्रद्धा, भक्ति और पारंपरिक उल्लास के साथ संपन्न हुआ। बराकर, कुल्टी, नियामतपुर, नदीघाट, डिसरगढ़, सांकतोड़िया, झालबगान, चिनाकुड़ी और सहित विभिन्न क्षेत्रों के मंदिरों में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखी गई।लाल सूत्र और दूब घास का महत्व धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस विशेष पूजा के बाद सभी व्रती महिलाओं ने अपने हाथों में दूब घास के साथ पवित्र लाल सूत्र (रक्षा सूत्र) बांधा। महिलाओं का दृढ़ विश्वास है कि इस पावन सूते को धारण करने से जीवन के सभी संकट दूर होते हैं और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।13 घरों में महाप्रसाद का वितरणइस व्रत की एक खास परंपरा को निभाते हुए महिलाओं ने मंदिर कमेटी से प्राप्त विशेष महाप्रसाद को अपने घर लाने के बाद आस-पड़ोस के 13 अलग-अलग घरों में वितरित किया। इस वितरण के साथ ही महिलाओं का यह कठिन और पवित्र अनुष्ठान पूर्ण हुआ।मुख्य आकर्षण और परंपराएं:पारंपरिक वेशभूषा: महिलाएं नए और आकर्षक वस्त्र धारण कर सामूहिक रूप से पास के मंदिरों में एकत्रित हुईं।कथा श्रवण: आचार्य और विद्वान पंडितों द्वारा मां विपत्तारिणी की महिमा और व्रत कथा का श्रवण किया गया।सिंदूर खेला: पूजा संपन्न होने के बाद महिलाओं ने एक-दूसरे को सिंदूर लगाकर अखंड सौभाग्य की कामना की।सुख-समृद्धि की प्रार्थना: व्रतियों ने परिवार के उज्ज्वल भविष्य, संतान की दीर्घायु और गंभीर रोगों व व्याधियों के नाश के लिए मां से प्रार्थना की।

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