70 साल पुराना वादा बनाम ₹1200 करोड़ का प्रोजेक्ट: मैथन बांध पर टकरावs
मुफ्त बिजली और नौकरी की मांग पर अड़े 12 गांवों के विस्थापित, त्रिपक्षीय बैठक बेनतीजा; 234 MW सौर परियोजना का भविष्य अधर में
कुल्टी:मैथन बांध पर दामोदर वैली कॉर्पोरेशन (DVC) के ₹1200 करोड़ के फ्लोटिंग सौर प्रोजेक्ट को लेकर विस्थापितों और प्रशासन के बीच गतिरोध गहरा गया है। डोमदहा, कालीपाथर और सिधाबाड़ी सहित 12 गांवों के विस्थापित परिवारों ने साफ कर दिया है कि जब तक 70 साल पुराना वादा पूरा नहीं होता, तब तक नया प्रोजेक्ट शुरू नहीं होने दिया जाएगा।शुक्रवार को रामचंद्रपुर कम्युनिटी हॉल में एक त्रिपक्षीय बैठक बुलाई गई थी। इस बैठक में DVC के DGM सुखमय नायक, DGM शैलेंद्र कुमार, CSR हेड के साथ-साथ सलानपुर थाना प्रभारी विश्वजीत मंडल, कल्याणेश्वरी फांड़ी प्रभारी पार्थ सरकार और BDO प्रतिनिधि शामिल हुए। दूसरी तरफ दामोदर वैली विस्थापित संघर्ष समिति के सदस्य ग्रामीणों की मांगें रख रहे थे।”हमारी जमीन पर बिजली, फिर भी ₹7 यूनिट बिल क्यों?”ग्रामीणों का आरोप है कि दशक पहले बांध बनने के दौरान जमीन डूबने के बदले नौकरी, स्कूल, पीने का पानी और मुफ्त बिजली का वादा किया गया था, जो आज तक अधूरा है। बैठक में आक्रोश जताते हुए एक ग्रामीण ने कहा, “हमारी जमीन पर बिजली बन रही है और हम ₹7 प्रति यूनिट बिल दे रहे हैं। आने वाले समय में यह ₹10-15 हो जाएगा। बांध के आसपास के गांवों को मुफ्त बिजली और स्थानीय युवाओं को नौकरी मिलनी ही चाहिए।” संघर्ष समिति के सदस्य वासुदेव महतो ने दोटूक कहा, “फ्री बिजली नहीं मिली तो मैथन बांध में सोलर पैनल नहीं लगने देंगे।”DVC की सफाई: स्थायी नौकरी नामुमकिन, CSR से होगा विकासमामले पर DVC के DGM सुखमय नायक ने कहा कि ग्रामीणों की मांगें नोट कर ली गई हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि मुफ्त बिजली का फैसला सरकारी नीति के अधीन है। हालांकि, उन्होंने भरोसा दिलाया कि CSR फंड से गांवों में सड़क, लाइट, पानी, हेल्थ वैन और स्कूलों की मरम्मत का काम कराया जाएगा।नौकरी के मुद्दे पर DGM ने कहा कि स्थायी नौकरी देना संभव नहीं है, लेकिन प्रोजेक्ट का काम कर रही कंपनी L&T के जरिए अकुशल मजदूर स्थानीय स्तर से ही लिए जाएंगे। इसके अलावा ITI और डिप्लोमा धारक स्थानीय युवाओं को काम में प्राथमिकता दी जाएगी।प्रोजेक्ट का भविष्य अनिश्चिततमाम कोशिशों के बावजूद यह महत्वपूर्ण बैठक पूरी तरह बेनतीजा रही। DVC अधिकारियों का कहना है कि गतिरोध सुलझाने के लिए जरूरत पड़ने पर दोबारा बातचीत की जाएगी। फिलहाल, 234 मेगावाट क्षमता वाले राज्य के सबसे बड़े फ्लोटिंग सौर प्रोजेक्ट का भविष्य पूरी तरह अनिश्चितता के भंवर में फंस गया है।










