*रामायण : भारतीय संस्कृति, आस्था और गौरव का एक भव्य सिनेमाई महाकाव्य!*
एक ऐसी *अद्भुत फिल्म, जो केवल आँखों को नहीं, बल्कि हृदय और आत्मा* को भी स्पर्श करती है!
*✍️ सुशील कुमार सुमन*
राष्ट्रीय अध्यक्ष,
*सनातन जनता पार्टी (SJP)*
*#OneWordReview: शानदार! (SPECTACULAR!)*
*रेटिंग: ⭐⭐⭐⭐⭐ (5/5)*
*जय श्रीराम! 🚩*
भारतीय सिनेमा के इतिहास में कुछ फिल्में ऐसी होती हैं, जो केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं बनतीं, बल्कि एक सभ्यता, संस्कृति, आस्था और करोड़ों लोगों की भावनाओं को पर्दे पर जीवंत कर देती हैं। निर्देशक नितेश तिवारी की ‘*रामायण*’ इसी श्रेणी की एक भव्य सिनेमाई प्रस्तुति है। यह फिल्म भारतीय संस्कृति की गौरवशाली विरासत, सनातन परंपरा की आध्यात्मिक चेतना और धर्म की अधर्म पर शाश्वत विजय के संदेश को एक विराट सिनेमाई स्वरूप प्रदान करती है।
क्या यह फिल्म उस महान और कालजयी महाकाव्य के साथ न्याय करती है, जो सदियों से करोड़ों भारतीयों के हृदय में श्रद्धा, विश्वास और आदर्श का प्रतीक बना हुआ है? इसका उत्तर है—हाँ, बिल्कुल!
*भव्यता, भावनाएँ और आध्यात्मिक अनुभूति का अद्भुत संगम*
फिल्म का सबसे बड़ा आकर्षण इसका विशाल कैनवास, अद्भुत दृश्यांकन, प्रभावशाली पटकथा और भावनात्मक गहराई है। निर्देशक नितेश तिवारी ने *रामायण* की कथा को केवल एक पौराणिक कहानी के रूप में प्रस्तुत नहीं किया, बल्कि उसके भीतर निहित मर्यादा, त्याग, प्रेम, कर्तव्य, धर्म और मानवीय मूल्यों को भी प्रभावशाली ढंग से उकेरा है।
फिल्म देखते समय दर्शक केवल दृश्यों की भव्यता में खोता नहीं है, बल्कि कथा के भावनात्मक और आध्यात्मिक संसार से भी जुड़ जाता है। यही इसका वास्तविक सौंदर्य है।
इसके कई दृश्य विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं—
⭐ प्रारंभ में ब्रह्मा और रावण के बीच का प्रसंग तथा उसके बाद रावण द्वारा लंका पर अपना अधिकार जताना।
⭐ वन में भगवान श्रीराम और राक्षसों के बीच रोमांचक युद्ध।
⭐ माता सीता का स्वयंवर और भगवान श्रीराम द्वारा शिवधनुष का भंजन।
⭐ राजा दशरथ, कैकेयी और भगवान श्रीराम से जुड़ा अत्यंत भावुक प्रसंग।
⭐ रावण और उसके बहनोई विद्युत्जीव के बीच का युद्ध।
⭐ शूर्पणखा का प्रसंग।
⭐ पुष्पक विमान पर रावण और पक्षीराज जटायु के बीच का रोमांचक युद्ध।
इन दृश्यों में भव्यता के साथ-साथ नाटकीयता, भावनात्मक संवेदना और आध्यात्मिक चेतना का सुंदर समन्वय दिखाई देता है।
*संगीत और तकनीक : भारतीय सिनेमा के लिए एक नया मानक*
ए. आर. रहमान का संगीत फिल्म की आत्मा को और अधिक प्रभावशाली बनाता है। उनके गीत कथा के प्रवाह में स्वाभाविक रूप से समाहित होते हैं और विभिन्न प्रसंगों की भावनात्मक गहराई को बढ़ाते हैं।
वहीं ए. आर. रहमान और हंस जिमर का बैकग्राउंड स्कोर फिल्म को एक विराट और अंतरराष्ट्रीय सिनेमाई स्वरूप प्रदान करता है। युद्ध के दृश्यों में इसकी तीव्रता और भावुक प्रसंगों में इसकी संवेदनशीलता दर्शकों को विशेष रूप से प्रभावित करती है।
ऑस्कर विजेता विजुअल इफेक्ट्स कंपनी DNEG का कार्य असाधारण है। दृश्य प्रभाव, भव्य सेट, युद्ध के दृश्य और काल्पनिक संसार का निर्माण भारतीय सिनेमा की तकनीकी संभावनाओं को एक नए स्तर पर ले जाता है।
फिल्म का प्रोडक्शन डिजाइन, एक्शन कोरियोग्राफी और सिनेमैटोग्राफी भी प्रशंसा के पात्र हैं। कई दृश्य ऐसे हैं, जिन्हें बड़े पर्दे पर देखना अपने आप में एक अविस्मरणीय अनुभव है।
*अभिनय : किरदारों में जीवंत होती *रामायण**
रणबीर कपूर भगवान श्रीराम के चरित्र में गरिमा, शालीनता, धैर्य और सहज दिव्यता का भाव प्रस्तुत करते हैं। उनकी शांत अभिव्यक्ति, प्रभावशाली आँखें और व्यक्तित्व चरित्र की मर्यादा को सशक्त बनाते हैं।
साई पल्लवी माता सीता के रूप में गरिमा, संवेदनशीलता और आत्मबल का सुंदर परिचय देती हैं। उनके अभिनय में सहजता और भावनात्मक आत्मीयता दिखाई देती है।
यश रावण के चरित्र में अपनी प्रभावशाली उपस्थिति और तीव्रता से अलग छाप छोड़ते हैं। उनका व्यक्तित्व इस प्रतिपक्षी चरित्र को एक विराट स्वरूप प्रदान करता है।
रवि दुबे अपने किरदार में पूरी ईमानदारी और प्रभावशाली अभिनय का परिचय देते हैं। उनकी प्रस्तुति सहज और आकर्षक है।
रकुल प्रीत सिंह अपने अभिनय से दर्शकों पर प्रभाव छोड़ती हैं।
सनी देओल की उपस्थिति को लेकर काफी चर्चा रही है। उनके किरदार के बारे में अधिक कुछ कहना उचित नहीं होगा। इसे देखने के लिए फिल्म का आनंद स्वयं लीजिए!
अरुण गोविल को बड़े पर्दे पर देखना अपने आप में विशेष अनुभव है। उनका चयन भी उल्लेखनीय है।
इसके अतिरिक्त शोभना, लारा दत्ता, विवेक ओबेरॉय, शीबा चड्ढा और अजिंक्य देव सहित अन्य कलाकारों ने भी अपनी भूमिकाओं के साथ न्याय किया है।
*नमित मल्होत्रा की दूरदृष्टि को सलाम!*
इस महत्त्वाकांक्षी परियोजना के निर्माण में नमित मल्होत्रा की दूरदृष्टि और प्रयासों की विशेष सराहना की जानी चाहिए। भारतीय संस्कृति और हमारी महान पौराणिक विरासत को विश्वस्तरीय तकनीकी गुणवत्ता, विशाल बजट और अंतरराष्ट्रीय सिनेमाई मानकों के साथ प्रस्तुत करने का यह प्रयास प्रशंसनीय है।
*रामायण* केवल भारत की धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहर नहीं है, बल्कि यह संपूर्ण मानवता को जीवन के शाश्वत मूल्यों का संदेश देने वाला महाकाव्य है। भगवान श्रीराम का जीवन हमें मर्यादा, सत्य, त्याग, कर्तव्य, करुणा और आदर्श नेतृत्व की प्रेरणा देता है। माता सीता धैर्य, आत्मसम्मान और नारी गरिमा की प्रतीक हैं, जबकि रावण का चरित्र हमें यह स्मरण कराता है कि ज्ञान, शक्ति और सामर्थ्य भी अहंकार के सामने विनाश का कारण बन सकते हैं।
यही *रामायण* की सार्वकालिक प्रासंगिकता है।
*अंतिम शब्द : यह सिर्फ फिल्म नहीं, एक अनुभूति है!*
‘*रामायण*’ केवल एक सिनेमाई प्रस्तुति नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक विरासत और हमारी सभ्यतागत पहचान का उत्सव है। इसकी भव्यता, तकनीकी उत्कृष्टता, भावनात्मक गहराई और आध्यात्मिक जुड़ाव इसे एक विशिष्ट सिनेमाई अनुभव बनाते हैं।
यह फिल्म हमें याद दिलाती है कि हमारी सांस्कृतिक विरासत कितनी समृद्ध, व्यापक और प्रेरणादायक है। *रामायण* की कथा समय और सीमाओं से परे है। यह हर युग में मानवता को सत्य के मार्ग पर चलने और धर्म की रक्षा करने की प्रेरणा देती रहेगी।
अब उत्सुकता है इसके दूसरे भाग की, जिसके दीपावली 2028 में आने की प्रतीक्षा रहेगी।
मेरी ओर से इस भव्य सिनेमाई प्रयास को पाँच सितारे!
*⭐ One Word Review: SPECTACULAR!*
*⭐ Rating: 5/5*
*जय श्रीराम! जय सनातन संस्कृति! जय हिंद! 🇮🇳🚩*
आइए, अपनी संस्कृति, अपनी विरासत और अपने गौरवशाली इतिहास को बड़े पर्दे पर देखने और अगली पीढ़ी तक पहुँचाने का उत्सव मनाएँ।
*रामायण केवल एक कथा नहीं, भारत की आत्मा है!*










