*“‘ख़्वाबों के परिंदे’ थे नेहरू,*
नज़र में नया जमाना था,
हर बच्चे की मुस्कान में,
भारत का कल बसाना था।
बोलों में थी कोमल गूँज,
दिल में फूलों-सी कोमलता,
बच्चों को देख खिल उठते,
उनकी भोली-सी सरलता।
राह कठिन थी, चल पड़े वो,
हाथ में सपनों की रौशनी,
देश को देना था ऐसा कल,
जहाँ हो खुशियों की चाँदनी।
विज्ञान, शिक्षा, प्रगति का,
उन्होंने दीप जलाया था,
हर छोटे नन्हे मन में,
उम्मीद का उड़ान बसाया था।
चाचा नेहरू कहते थे—
“ये बच्चे हैं भारत की रीत,”
ख़्वाबों को पंख लगाओ,
उन्हें उड़ने दो ऊँची प्रीत।
उनके सपनों की छाया में,
हम आज नया भारत गढ़ते हैं,
उनके दिए आदर्शों पर,
*‘ख़्वाबों के परिंदे’ बन उड़ते हैं।”*
✍️ “सुशील कुमार सुमन”
अध्यक्ष, आईओ
सेल आईएसपी, बर्नपुर
*#सुशीलकुमारसुमन*
#युवा
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