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*यमराज बनकर खड़ी है बराकर फ्री प्राइमरी आदर्श विद्यालय की दीवारें और छज्जा…*

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ASANSOL DASTAK ONLINE DESK

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*यमराज बनकर खड़ी है बराकर फ्री प्राइमरी आदर्श विद्यालय की दीवारें और छज्जा…*

*कभी भी और किसी भी समय इस स्कुल के छात्र और छात्राएं हो सकते हैं एक बड़ी दुर्घटना का शिकार…*

*स्कुल की बदहाल स्थिति को देख नही आ रहे कई स्कूली छात्र…*

*15 वर्ष पहले दुर्गापूजा महाबीर अखाड़े के दौरान इस स्कुल की गिरी थी छज्जा दबकर तीन लोगों ने गँवाई थी जान…*

*कुलटी,* पश्चिम बंगाल आसनसोल बराकर 68 नंबर वार्ड के हाटल्ला इलाके मे स्थित बराकर फ्री प्राइमरी आदर्श विद्यालय 15 वर्ष बाद एक बार फिर काफी सुर्खियों मे आया है, सुर्खियों मे इस लिये की यह स्कुल अपनी वही 15 वर्ष पुरानी दर्दनाक हादसे को दोहराने जा रहा है, जिस हादसे मे दुर्गापूजा महाबीर अखाड़े के दौरान इस स्कुल का छज्जा अचानक से गिर गया और उस छज्जे मे दबकर तीन लोग मर गए, घटना के बाद अखाड़े मे भगदड़ मच गई थी और अखाड़ा बंद हो गया था, यूँ कहें तो खुशियों का माहौल पल भर मे मातम मे बदल गया था, जिस मातम का दर्द आज भी बराकर के लोगों के दिलों मे कुछ इस कदर बैठ चूका है, जो दर्द शायद ता उम्र नही जा पाएगा, ऐसे मे स्कुल की वही पुरानी स्थिति इस बार भी दिख रही है, स्कुल की दीवार से लेकर छज्जा बुरी तरह जर्ज़र हो चूका है और टूट -टूट कर गिर रहा है, जिसपर ना तो स्कुल के प्रधानाध्यापक की नजर है और ना ही जिला प्रशासन की, इलाके के लोगों के साथ -साथ स्कुल मे पढ़ने वाले बच्चों के अभिभावक भी कई बर स्कुल की बदहाली को लेकर स्कुल प्रशासन से शिकायत किये, पर उनको किसी भी तरह की कोई स्पस्ट जवाब नही मिला, जिसको लेकर वह काफी परेशान है, उन्होंने वार्ड संख्या 68 के तृणमूल पार्षद राधा सिंह व उनके प्रतिनिधि अभिषेक सिंह को भी स्कुल की स्थिति के बारे मे जानकारी दी, जिसके बाद तृणमूल पार्षद और उनके प्रतिनिधि मौके पर पहुंचे, स्कुल के मौजूदा हालात का जायजा भी लिया और स्कुल के छज्जे से झूल टूट कर रहे एक लोहे के बीम को कटवाकर हटा दिया, पर स्कुल के जर्ज़र दीवार और टूटी -फूटी छज्जे की मरमत्ती का कार्य नही करवाया, जिस कारन स्कुल की स्थिति जस के तस बनी हुई है, स्थानीय लोगों व स्कुल के छात्र और छात्राओं के अभिभावकों को यह अब भय सताने लगा है की कहीं उनके बच्चे स्कुल मे किसी हादसे का शिकार ना हो जाएं, यहाँ तक के स्कुल के कई ऐसे भी बच्चे हैं जो स्कुल की बनी इस बदहाल स्थिति को देख डर और भय से स्कुल नही आ रहे हैं, ऐसे मे स्कुल के नवनिहाल कैसे और किस तरह होनहार बनेंगे यह एक बड़ा सवाल अब बनकर बराकर की हर एक जनता के मन मे चल रहा है, जिसका जवाब शायद किसी के पास नही है