“प्यार बदनाम है ज़माने के लिए,
पर करने वाले के लिए तो वही तो ज़िंदगी है,
सावन की रुनझुन में हल्की-हल्की एहसास की बूंदें,
जैसे अधूरी ख्वाहिशों पर गिरती हुई शबनमी बरसात।
तुम जो मिल न सके…
उन यादों की गहराई ही अब मेरी ज़िंदगी है,
कभी ख़ामोशी में, कभी तन्हाई में,
वो लम्हे ही मेरे जीवन का संगीत बन गए हैं।
कुछ लोग ज़िंदगी होते हैं,
मगर ज़िंदगी में नहीं होते…
फिर भी उनकी मौजूदगी
दिल की धड़कनों में सदाबहार रहती है।
अगर दिल में रखो तो दिल से रखो,
वरना दिल रखने के लिए दिल मत रखो…
मुहब्बत आधी-अधूरी नहीं होती,
वो या तो सब कुछ होती है, या कुछ भी नहीं।
उम्रों के बूढ़े हुए जिस्मों को लांघकर,
अगर कभी हम मिले तो…
उस वक्त भी मेरी ठहरी हुई इन आँखों में
तुम्हारी मोहब्बत ही मुस्कुराएगी।
मैंने तुम्हें जीतने के लिए
कभी कोई बाज़ी नहीं खेली थी,
बस अपने आप ही रख दी थी
सारी की सारी नज़्में तुम्हारे नाम।
मोहब्बत तो हारने का नाम है—
जिसमें हारकर भी इंसान
जीवन की सबसे बड़ी जीत पा लेता है।
सदियों से कवि, लेखक, कलाकार
मोहब्बत को शब्दों में ढालते रहे,
पर अमृता की नज़्मों में
इश्क़ का वो सच छिपा है,
जो तन्हाई से होकर
रूह की गहराई तक उतरता है।
वो अधूरी कहानी,
जो कभी पूरी नहीं हुई—
पर जिसकी अधूरीपन में ही
एक अमरता छिपी हुई है।
क्योंकि कुछ किस्से पूरे होकर
ख़त्म हो जाते हैं,
और कुछ अधूरे रहकर
हमेशा जिंदा रहते हैं।
तुम्हारी यादें,
तुम्हारी आवाज़,
तुम्हारे अनकहे अल्फ़ाज़,
सब मेरी साँसों का हिस्सा हैं।
आज भी जब हवा गुनगुनाती है,
तो उसमें तुम्हारी परछाईं नज़र आती है।
तुम्हें पाने की चाहत कभी हार नहीं थी,
बल्कि तुम्हें महसूस करने की ताक़त थी।
तुम्हारे जाने के बाद भी
तुम मेरी कविताओं में जिंदा हो,
तुम मेरे अल्फ़ाज़ों के बीच धड़कते हो,
तुम मेरे ख़ामोश लम्हों में सांस लेते हो।
यह अधूरी कहानी ही तो मेरी पूरी दास्तान है,
जहाँ मोहब्बत का हर रंग
वक्त की दीवारों से टकराता है।
पर टूटता नहीं,
बस और गहरा होता जाता है।
*जन्मदिन विशेष पर*
*ह्रदय से नमन तुम्हें,*
हे अधूरी मोहब्बत की रानी—
तुम्हारी रूह की खुशबू आज भी
ज़माने की हवाओं में बसी है।”
🌸🌿🙏
*✍️ “सुशील कुमार सुमन”*
अध्यक्ष, आईओए
सेल आईएसपी, बर्नपुर










