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*”बज़्मे- एवाने- ग़ज़ल” के तहत भव्य मासिक तरही मुशायरा आयोजित*

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ASANSOL DASTAK ONLINE DESK

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*“बज़्मे- एवाने- ग़ज़ल” के तहत भव्य मासिक तरही मुशायरा आयोजित*

बाराबंकी(अबू शहमा अंसारी)  सआदतगंज की बहुत ही सक्रिय साहित्यिक संस्था “बज़्मे- एवाने- ग़ज़ल” के तत्वावधान में आइडियल इंटर कॉलेज मोहम्मदपुर बाहूँ के विशाल हॉल में एक भव्य मासिक तरही मुशायरा संपन्न हुआ, इसकी अध्यक्षता पैंतेपुर से पधारे अतिथि शायर मौलाना अतहर बाराबंकवी ने की, जबकि मुख्य अतिथि के रूप में मेराज बाराबंकवी, सम्मानित अतिथि के तौर पर अंजुम अहमद पूरी और विशेष सम्मानित अतिथि के रूप में नादिम पिंटेपुरी ने शिरकत की, व्यंग्य और हास्य के चुलबुले शायर बेढब बाराबंकवी के संचालन में आयोजित इस बेहद ख़ूबसूरत मुशायरे की शुरुआत मुश्ताक़ बज़्मी ने नअते- रसूल से की, जिसने पूरी महफ़िल को रूहानी बना दिया। इसके बाद दिए गए मिसरा
“कोई साथी न मिला कूच- ए- रुसवाई तक”
पर औपचारिक रूप से मुशायरे की शुरुआत हुई। मुशायरा बहुत सफल रहा। बहुत अधिक तालियां और सराहना पाने वाले अशआर का चयन पाठकों के लिए पेश है, देखिए
एक उम्मीद ही तन्हा मेरी हमदम ठहरी
साथ छोड़ा नहीं जिस ने शबे- तन्हाई तक
मौलाना सलमान अतहर बाराबंकवी
जो गवय्ये हैं वो करते हैं जहाज़ों का सफ़र
जो हैं फ़नकार वो हैं हौसला अफ़ज़ाई तक
बेढब बाराबंकवी
किस कदर तेज है औरत के तख़य्युल का सफ़र
इक मुलाक़ात में होता है शनासाई तक
ज़की तारिक़ बाराबंकवी
तेरी यादें लिए फिरता हूं मैं सहरा सहरा
लोग कहते हैं तभी तो मुझे सहराई तक
नादिम पैंतेपुरी
लोग जब उस की ख़ुदाई प बहस करते हैं
छीन लेता है वो दानाओं से दानाई तक
मेराज बाराबंकवी
उस की रहमत को पुकारूं तो पुकारूं कैसे
ऐसा मुजरिम हूं गुनहगार है परछाई तक
आसी चौखण्डवी
मैं तख़य्युल में जहां चाहूं चला जाता हूं
क़ैद रहता नहीं अफ़लाक की ऊंचाई तक
डॉ. बशर मसौलवी
तुझ को मालूम भी है छोड़ के जाने वाले
तुझ से आबाद है मेरी शबे- तन्हाई तक
शौक सिहालवी
कारे- नमरूद न कर वक़्त का फ़िरऔन न बन
ख़ाक में मिल गई क़ारूं की ख़ुदआराई तक
सलीम अख़्तर पैंतेपुरी
इस से कह दो कि वो अब मेरा तआक़ुब न करे
वो कभी छू नहीं सकता मेरी परछाई तक
अंजुम अहमद पूरी
घर में बैठी है मेरी लाडली ग़ुरबत के सबब
अब तलक बज न सकी दोस्तों शहनाई तक
अस्लम सैदनपूरी
सिर्फ़ मायूसी ही मायूसी नज़र आती है
तंगी- ए- दस्त से बाज़ार की महंगाई तक
कलीम तारिक़ सैदनपूरी
साथ अपनों ने जो छोड़ा है तो हैरत कैसी
सर पे सूरज हो तो घट जाती है परछाई तक
दानिश रामपुरी
ज़ह्न में भूल कर आए न ख़ुदआराई तक
वरना खा जाएगा ये ज़ोअम सब अच्छाई तक
राशिद ज़हूर सैदनपूरी
गौताख़ोरी का ज़रा शौक मुझे लगने दे
फिर मैं आऊंगा समंदर तेरी गहराई तक
असर सैदनपूरी
ऐ मेरी फ़िक्रे- ग़ज़ल में तेरे सदक़े जाऊं
साथ छोड़ा नहीं तूने मेरा तन्हाई तक
नफ़ीस अहमदपूरी
सिर्फ़ उसके ही लिए मैं भी न जी पाऊंगा
कोई पहुंचा दे ख़बर ये मेरे हरजाई तक
मुश्ताक़ बज़मी
आओ नज़दीक से मैं तुम को दिखा देता हूं
ये मेरा घर है कि जिस में नहीं अंगनाई तक
शफ़ीक़ रामपुरी
बेटियां बैठी हैं बन ब्याही घरों में जिन के
दर्द देती है उन्हें शादी की शहनाई तक
नज़र मसौलवी
सब ने चाहा कि तमाशा हो मेरी हस्ती का
शोर ही शोर रहा दर्द की शहनाई तक
इक़बाल ख़ुशतर बांसवी
मेरे अमाल ने पीछा नहीं छोड़ा मेरा
ये गए साथ मेरे क़ब्र की तन्हाई तक
नाज़िश बाराबंकवी
तह ब तह एक समंदर है समझिए सलमान
कोई पहुंचा ही नहीं इल्म की गहराई तक
डॉ. सलमान यूनुस
रोक लेती हैं समंदर की ये लहरें हम को
सोचते हम भी हैं जाएं कभी गहराई तक
नईम सिकंदर आबादी
झूठ तक कोई रहा और कोई सचाई तक
कोई साथी न मिला कूच- ए- रुसवाई तक
क़मर सिकंदरपूरी
मैं अकेला ही चला और अकेला ही रहा
कोई साथी न मिला कूच- ए- रुसवाई तक
ज़हीर सैदनपूरी
हमसफ़र सब मेरे शोहरत की बुलंदी तक थे
कोई साथी न मिला कूच- ए- रुसवाई तक
सहर अय्यूबी
हासिदो जश्न मनाओ मेरे दर पर आकर
इश्क़ ले आया मुझे कूच- ए- रुसवाई तक
आसिम अक़दस रामपुरी
शम्स से आंख मिलाने की तो कोशिश मत कर
छीन लेगा वो तेरी आंख की बीनाई तक
जान वारिस सहबा

मुफ़लिसी में नहीं होता है सगा भाई तक
रो दिए देख के मंज़र ये तमाशाई तक
अबूज़र अंसारी
इन शायरों के अलावा क़य्यूम बेहटवी और असरार हयात ने भी अपना अपना तरही कलाम पेश किया और शायरों व सामईन से ख़ूब तालियां और सराहना हासिल की। सामईन में मास्टर मोहम्मद वसीम अंसारी, मास्टर मोहम्मद क़सीम अंसारी, मास्टर मोहम्मद हलीम अंसारी, मास्टर मोहम्मद राशिद अंसारी के नाम भी काबिले- ज़िक्र हैं।
“बज़्मे- एवाने- ग़ज़ल” का आगामी मासिक तरही मुशायरा 25 मार्च, रविवार को निम्नलिखित मिसरे पर आइडियल इंटर कॉलेज में ही होगा,
“सफ़र को बांट लेते हम थकन तक़सीम कर लेते”
क़ाफ़िया: तक़सीम
रदीफ़: कर लेते
इस ऐलान के साथ ही बज़्म के सदर ज़की तारिक़ बाराबंकवी ने मुशायरे में दूर दराज़ और आसपास से आकर शिरकत करने वाले सभी शायरों और सम्मानित सामईन का शुक्रिया अदा करते हुए मुशायरे का अगले महीने तक के लिए समापन घोषित किया।