आई ०आई ०टी ० खड़गपुर का प्रांगण आज फिर स्पिक मैके के ग्यारहवें अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के एक से बढ़कर एक मनभावन प्रस्तुतियों से जगमगा उठा। सप्ताह भर चलने वाले इस सम्मेलन के दूसरे दिन कई कलाकारों ने खूबसूरत प्रस्तुतियां दी। वहीं देश, विदेश से आए प्रतिभागियों ने कई बड़े और जादुई क्षणों को महसूस किया, जो भारतीय कला संस्कृति का जीवंत और अभिन्न हिस्सा हैं।

दूसरे दिन की शुरूआत हठ योग, नाद योग, कुड़ियट्टम, सत्त्रीया, गुरबानी, राज योग और हार्टफुलनेस मेडिटेशन से हुई। जहां भारतीय संस्कृति की प्रमुख योग विधाओं का ज्ञान प्रतिभागियों को प्राप्त हुआ। स्वामी त्यागराजनंद, वसीफुद्दीन डागर, श्री मारगी मधु, हरिचरण भुइयां, प्रोफेसर प्रसाद कृष्णा, संन्यासी योगेश्वर, भाई मनप्रीत सिंह, उस्ताद वसीम अहमद, ब्रह्मकुमारी सिस्टर मनीषा और सिस्टर कृष्णा सरीखे योग गुरुओं ने उन्हें मानसिक चेतना का विकाश और योग की विशेषताएं बताई। सुबह के सत्र की शुरुवात वहां मौजूद तमाम प्रतिभागियों ने स्पीक मैके द्वारा आयोजित इंटेंसिव में भाग लिया और अपने गुरुओं से मार्गदर्शन प्राप्त किया। गौरतलब हैं कि प्रांगण में अगले सात दिनों तक सभी प्रतिभागी अपने गुरुओं से जुड़कर उनसे तमाम विधाओं को सीखने का प्रयास करेंगे।
वहीं दोपहर के सत्र में संगीत नाटक अकादमी अवार्ड से पुरस्कृत जनाब महमूद फारूकी द्वारा दास्तानगोई का आनंद लिया।

दास्तानगोई उर्दू में कहानी सुनाने या बयां करने की एक प्राचीन मौखिक कला है। जिस कला को महसूस कर प्रतिभागियों का रोम रोम जाग उठा। तदोपरांत होजगीरी की प्रस्तुति हुई। होजगीरी भारत के पूर्वोत्तर राज्य त्रिपुरा का एक प्रसिद्ध और पारंपरिक लोकनृत्य है। यह मुख्य रूप से रियांग (ब्रू) समुदाय की महिलाओं और युवा लड़कियों द्वारा किया जाता है। तमाम मौजूद प्रतिभागी तब आनंद से भर उठे जब उन्होंने पद्मश्री अवार्डी श्री शाहदर आचार्य की सरायकेला छउ को अपने आँखों में कैद किया। सरायकेला छऊ, पूर्वी भारत का एक प्रसिद्ध अर्ध– शास्त्रीय मुखौटा नृत्य हैं। जो अपनी शानदार कलाबाजियों के लिए प्रसिद्ध हैं।
आई०आई ०टी ० खड़गपुर का प्रांगण अभी आने वाले दिनों में कई और एक से बढ़कर एक कलाकारों की प्रस्तुतियों की अनुभूति करेगा।
संध्या सत्र की प्रस्तुतियों में संगीत नाटक अकादमी अवार्ड से सम्मानित विदुषी सुजाता मोहपात्रा प्रदर्शित ओड़िशी और पद्मा श्री अवॉर्ड से सम्मानित मशहूर बांसुरी वादक पंडित रोनू मजूमदार की प्रस्तुति मुख्य हैं।।











