Dastak Jo Pahunchey Har Ghar Tak

Share on facebook
Share on twitter
Share on whatsapp
Share on email

*”आज का दिन !..”* *(“प्रकाश–पथ, स्वर–सरिता और मानवीय मशालें”)*

Share on facebook
Share on twitter
Share on whatsapp
Share on email
ASANSOL DASTAK ONLINE DESK

ASANSOL DASTAK ONLINE DESK

*“आज का दिन !..”*
*(“प्रकाश–पथ, स्वर–सरिता और मानवीय मशालें”)*

“आज का दिवस, ओ प्रभात!
धन्य हुआ तेरे आँचल से,
धरती पर उतरे प्रकाश के पुंज,
अंधेरों के तख़्त हुए ध्वस्त इस क्षण से।

कलयुग को पथ दिखाने वाले
*नानकदेव का पावन दिन —*
जहाँ *‘एक ओंकार’* की ध्वनि से
मन–सरिता होती निर्मल, टिमटिम।
सच, दया, सेवा, समता —
वही है धर्म की असली भावना,
गुरु ने सिखाया —
*“इंसान बनना ही सबसे पहली साधना।”*

मानवता के अनश्वर गायक,
*भूपेन दा* की यादें भी संग आईं,

*“ओ गंगा बहती हो क्यों?”* की करुण पुकार,
*“बिस्तीर्नो पारोरे”* की अमर हृदय-धारा,
*रूदाली की रूलाई* में भी,
उनके सुरों ने उम्मीद बोई,

महिला की पीड़ा, समाज की गूँगी चीखें—
उनके गीतों में स्वर पा रोईं।
पीड़ा को परंपरा, संघर्ष को संगीत,
उनका स्वर था जनता का आस्था-तारा।

वो बोल उठे —
*“मजहब से ऊपर इंसान है, यही मेरी आवाज़।”*

*फकीर कवि नागार्जुन —*
बनकर जनमन का तीर,
उन्होंने पूछा इतिहास से —
*“कविता रोती है, या कवि रीत?”*
सादगी में विद्रोह,
शब्दों में तपती आँच,
उन्होंने सिखाया —
*“कलम जब सच कहती है, सत्ता हो जाती काँच।”*

*शारदा सिन्हा* की पावन धुनें —
आज गंगा–आरती की तरह बजती हैं,
छठ की करुण छाया में
हर माँ की आँखें सजती हैं।
वो सुर नहीं — संस्कार थे,
वो लय नहीं — भाव थे,
उन्होंने सिखाया —
*“लोकगीतों में जिंदगी छिपी है, वही सबसे बड़े अध्याय हैं।”*

और आज ही,
खेल जगत में शौर्य की ज्वाला —
*विराट कोहली का उज्ज्वल नाम,*
जहाँ हर चौका एक शपथ,
हर छक्का जैसे जयघोष का धाम।
दबाव में खिलता फूल,
इच्छाशक्ति का विराट प्रतीक,
उन्होंने बताया —
*“साहस वो सूरज है, जो बादलों को भी जला देता सीध।”*

फिर *इतिहास फुसफुसा उठता है* —
आज ही *‘Guy Fawkes’* की कथा भी याद आती है,
जहाँ अत्याचार के विरुद्ध
एक मशाल ने रात जगाई थी।
संदेश आज भी वही —
“अन्याय की दीवार हो कितनी ऊँची,
*एक सच की चिंगारी उसे ढहा जाएगी।””*

*“आज का दिन” —*

*“प्रकाश, सुर, सत्य, भक्ति, पराक्रम और प्रतिरोध का संगम।”*

“चलो,
नानक की रोशनी लें,
भूपेन दा की मानवता,
नागार्जुन का सच,
शारदा जी की भक्ति,
विराट का जज़्बा,
*और इतिहास की चेतावनी” —*

और
*“मानवता की मशाल को आगे बढ़ाएँ।”*

क्योंकि यह दिन नहीं —
*“आदर्शों का पर्व है।”*

🙏🌼
*जय मानवता।*
*जय प्रकाश।*

✍️ “सुशील कुमार सुमन”
अध्यक्ष, आईओ
सेल आईएसपी, बर्नपुर
*#सुशीलकुमारसुमन*
*#युवा*