*“इस्पात पुरुष: सर बिरेन मुखर्जी”*
*— विनम्र श्रद्धांजलि!.*
“देश का इस्पात, जिसका सपना गढ़ा,
उद्योग के नभ पर जो सूरज चढ़ा,
सर बिरेन मुखर्जी—वो नाम अमर,
भारत के निर्माण में थे प्रथम पथप्रहर।
रूपकार इस्पात क्रांति के,
दूरदृष्टि, तेज, हिमालय से,
सर राजेन के जाने पर,
जो जिम्मा आया कंधों पर—
उन्होंने उठाया, निभाया गरिमा से।
कुल्टी की भट्ठी, बर्नपुर की चमक,
जहाँ लोहा पिघलकर देश बना दमक,
SCOB की नींव, IISCO का उत्थान,
भारत के उद्योगों में किया अभिमान स्थापित महान।
विश्व बैंक ने पहली बार
निजी उद्योग में भरोसा डाला,
31.5 मिलियन डॉलर का ऋण—
भारत ने सिर ऊँचा कर डाला।
1956 में फिर हस्ताक्षर किए,
आंतरिक पूँजी से सपने सहे,
75 प्रतिशत साधन जुटाए स्वयं—
कौन कहे दृढ़ इच्छा में कमी रहे?
नेतृत्व था प्रखर, व्यक्तित्व तेज,
दौड़ता था बर्नपुर उनके वेग से,
McCracken, Lahmeyer, Moffat, Puri, Dutt—
एक विविध दल को जोड़े रखा उत्साह पर।
पर समय कभी-कभी क्रूर भी हुआ,
1968 की लड़ाई में संघर्ष छुआ,
Goenka का प्रयास असफल रहा,
सरकार का सहारा उनके संग रहा।
लेकिन श्रम विवादों के घाव गहरे,
मन के स्तंभ भी कभी टूटते ठहरे,
उन्होंने कहा—
“जिस धरोहर को चालीस वर्षों दिया,
उसे राख बनते देखना—कितना कठिन हुआ।”
1972 में IISCO सरकार के दल में आया,
पर इतिहास ने सत्य सदा दोहराया—
यह अंत नहीं, बदलाव का चरण था,
कर्मवीर का सम्मान अमर संदर्भ था।
आज ISP में फिर उमंग का दौर,
Modernization से नए सपनों का शोर,
2030 तक उत्पादन होगा महान—
7.5 मिलियन टन की गूँज से रोशन होगा जहान,
और ISP बनेगा SAIL का मुकुट-शिखर,
जिस विरासत को सर बिरेन ने बोया निरंतर।
वो नहीं झुके सत्ता के द्वार पर,
सच के पथ पर खड़े रहे अडिग कर,
वो इस्पात थे—दिल में, कर्म में, सोच में,
अमर दीप हैं भारत के औद्योगिक ओज में।
आज उनकी पुण्यतिथि पर
हम सब झुकाते हैं शीश,
शत-शत नमन उस महापुरुष को,
जिसने भारत को दी इस्पात की नींव और सहज शक्ति अद्वितीय।
*सर बिरेन मुखर्जी को*
*SAIL–ISP परिवार की ओर से*
*विनम्र श्रद्धांजलि।*
*“प्रयाण: 4 नवंबर 1982”*
✍️ “सुशील कुमार सुमन”
अध्यक्ष, आईओ
सेल आईएसपी, बर्नपुर
*#सुशीलकुमारसुमन*
*#युवा*










