केन्दुआ बाजार में गूंजा या हुसैन, अखाड़े में युवाओं ने दिखाए हैरतअंगेज करतब कुल्टी में मोहर्रम के 40वें अखाड़े पर उमड़ा जनसैलाब,
बरसों पुरानी परंपरा को जिंदा रख पेश की कौमी एकता की मिसाल
कुल्टी: पश्चिम बंगाल के कुल्टी विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत आने वाले केन्दुआ बाजार में मोहर्रम के 40 दिन पूरे होने पर पारंपरिक ’40वां अखाड़ा’ बेहद धूमधाम, हर्ष और उल्लास के साथ निकाला गया। इस भव्य आयोजन के दौरान समूचे इलाके में बरसों से चली आ रही धार्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक परंपरा का एक जीवंत नजारा देखने को मिला।लाठी खेल और बना के करतबों ने जीता दिलऐतिहासिक परंपरा के अनुसार यह अखाड़ा मोहर्रम के ठीक 40 दिन बाद निकाला जाता है, जिसे स्थानीय लोग पीढ़ियों से पूरी श्रद्धा के साथ मनाते आ रहे हैं। इस वर्ष भी अखाड़े में शामिल युवाओं और कलाकारों ने लाठी खेल, बना और अन्य पारंपरिक युद्ध कलाओं का हैरतअंगेज प्रदर्शन किया। जांबाज कलाकारों के इन हैरतअंगेज करतबों ने वहां मौजूद हजारों दर्शकों का दिल जीत लिया। इस भव्य और रोमांचक नजारे को देखने के लिए केन्दुआ बाजार और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से भारी जनसैलाब सड़कों पर उमड़ पड़ा था।प्रशासन मुस्तैद, शांति और सौहार्द के साथ संपन्न हुआ जुलूसयह अखाड़ा न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि कुल्टी क्षेत्र में आपसी भाईचारे और सांप्रदायिक सौहार्द की एक अनुपम मिसाल भी पेश करता है। पूरे जुलूस को सदर अखाड़ा के ‘सदर’ अरशद खान ‘रेणु’, कमेटी के सदस्यों और क्षेत्र के गणमान्य लोगों की देखरेख में बेहद शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराया गया। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए स्थानीय प्रशासन की ओर से सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे, जिससे पूरा आयोजन बिना किसी बाधा के संपन्न हुआ।अधिकारियों का सम्मान और मरहूम इकबाल खान को श्रद्धांजलिइस वर्ष अखाड़े के वरिष्ठ और सम्मानित सदस्य इकबाल खान के निधन के कारण माहौल थोड़ा गमगीन भी रहा। कमेटी और आम लोगों ने आयोजन के दौरान एक मिनट का मौन रखकर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। कार्यक्रम के सफल समापन पर मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद ACP (वेस्ट) शेख जावेद हुसैन और कुल्टी थाना प्रभारी अशोक महापात्रा को कमेटी द्वारा मोमेंटो (स्मृति चिह्न) देकर सम्मानित किया गया।विशेष संदेश: हर वर्ष की तरह इस बार भी कुल्टी की धरती पर हिंदू-मुस्लिम एकता और अटूट भाईचारे का अनूठा रंग देखने को मिला, जिसने यह साबित कर दिया कि त्योहार दिलों को जोड़ने का काम करते हैं।








