Dastak Jo Pahunchey Har Ghar Tak

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“जहां गुरु का सम्मान मरता है, वहां समाज की जड़ें सूख जाती हैं।”

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ASANSOL DASTAK ONLINE DESK

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“जहां गुरु का सम्मान मरता है, वहां समाज की जड़ें सूख जाती हैं।”

कभी एक समय था जब 1990 से 2000 के बीच जन्मे बच्चे अगर अपने शिक्षक को घर के बाहर या सड़क पर देख लेते थे, तो संकोच और सम्मान के कारण छिप जाते थे। शिक्षक सामने पड़ जाएं तो सिर अपने-आप झुक जाता था।

आज का समय देखिए। सोशल मीडिया पर एक वीडियो सामने आया है जिसमें एक छात्र अपने ही बुजुर्ग शिक्षक को मुक्के से मारता हुआ दिखाई देता है। यह सिर्फ एक शिक्षक पर हमला नहीं है, यह उस संस्कार पर हमला है जिसने भारतीय समाज को सदियों तक मजबूत बनाए रखा।

सवाल सिर्फ इतना नहीं है कि छात्र इतना आक्रामक क्यों हो गया। असली सवाल यह है कि उसे ऐसा बनने किसने दिया?

बच्चा जब पैदा होता है तो वह खाली स्लेट की तरह होता है। उस पर पहला अक्षर लिखने वाले माता-पिता ही होते हैं। अगर घर में बच्चों को यह सिखाया जाए कि शिक्षक का सम्मान करना जरूरी है, गुरु को परिवार से भी ऊँचा स्थान दिया जाता है, तो शायद किसी छात्र की हिम्मत नहीं होगी कि वह अपने गुरु पर हाथ उठाए।
आज कई घरों में समस्या यह है कि बच्चे की हर गलती पर भी माता-पिता उसका बचाव करते हैं। स्कूल में शिक्षक डांट दे तो घर में शिक्षक को ही गलत बताया जाता है। बच्चे के मन में धीरे-धीरे यह बैठ जाता है कि शिक्षक की कोई इज्जत नहीं है।

याद रखिए, जिस समाज में गुरु का सम्मान खत्म हो जाता है, वहां ज्ञान भी धीरे-धीरे खत्म हो जाता है।

हम शायद वह आखिरी पीढ़ी हैं जिसने अपने शिक्षकों को देखकर सिर झुकाना सीखा है। आज भी अगर हमें कोई शिक्षक रास्ते में मिल जाए, तो मन अपने-आप आदर से भर जाता है।
समाज को बदलने की शुरुआत घर से होती है। अगर माता-पिता अपने बच्चों को संस्कार नहीं देंगे, तो स्कूल अकेले यह जिम्मेदारी नहीं उठा सकता।

बच्चों को पढ़ाई से पहले यह सिखाइए —
गुरु का सम्मान करना ही सच्ची शिक्षा की पहली पाठशाला है।