बंगाल में ‘भय आउट, भरोसा इन’: आसनसोल में हटा डर का साया, गूंजे सनातन के जयकारे
उषा ग्राम के कल्याण नगर में श्यामा काली मंदिर से भव्य कलश यात्रा का आयोजन, बड़ी संख्या में उमड़े श्रद्धालु
आसनसोल:पश्चिम बंगाल में हुए ऐतिहासिक ऐतिहासिक राजनीतिक सत्ता परिवर्तन के बाद अब जमीन पर भी बदलाव की बयार दिखने लगी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और नवनियुक्त मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी द्वारा दिए गए संदेश “भय आउट और भरोसा इन” का असर अब आम जनमानस में साफ महसूस किया जा रहा है। इसी बदलते और भयमुक्त माहौल का उत्सव मनाते हुए आज आसनसोल के उषा ग्राम स्थित कल्याण नगर में एक भव्य कलश यात्रा निकाली गई।यह कलश यात्रा कल्याण नगर के प्रसिद्ध श्यामा काली मंदिर से शुरू हुई, जो ग्वाला पाड़ा और भगत पाड़ा होते हुए स्थानीय शिव मंदिर तक पहुंची। यात्रा में सनातन धर्म के प्रति गहरी आस्था और डर के माहौल से मुक्ति की खुशी साफ झलक रही थी।बड़ी संख्या में शामिल हुईं महिलाएं और पुरुषइस धार्मिक आयोजन में भारी संख्या में स्थानीय श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया। विशेषकर महिलाओं और पुरुषों ने पारंपरिक वेशभूषा में सिर पर मंगल कलश धारण कर इस यात्रा की शोभा बढ़ाई। पूरे रास्ते में शंखध्वनि, ‘जय श्री राम’ और ‘हर हर महादेव’ के जयकारों से पूरा इलाका गुंजायमान रहा।आयोजकों का बयान: “अब देश संविधान और सनातन परंपराओं से चलेगा”कलश यात्रा के आयोजकों ने बातचीत के दौरान बताया कि अब तक पूरे पश्चिम बंगाल के साथ-साथ औद्योगिक नगरी आसनसोल में भी एक अजीब सा डर का माहौल बना हुआ था। लोग अपनी धार्मिक पहचान और आचरण को खुलकर व्यक्त करने में कतराते थे। लेकिन अब परिस्थितियां पूरी तरह बदल चुकी हैं।आयोजकों ने पूरे आत्मविश्वास के साथ कहा:”अब सनातन धर्म को मानने वाले लोग बिना किसी डर या संकोच के घूम-फिर सकते हैं और अपने रीति-रिवाजों का पालन कर सकते हैं। हमारा देश और राज्य अब पूरी तरह संविधान और सनातन धर्म की महान परंपराओं को मानते हुए आगे बढ़ेगा। अब कोई भी आसुरिक या अनैतिक शक्ति हमारे देश का कुछ नहीं बिगाड़ सकती।”अशुभ शक्तियों को कड़ा संदेशस्थानीय नागरिकों के अनुसार, आज की यह कलश यात्रा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि समाज में व्याप्त रही उन अशुभ और नकारात्मक शक्तियों को एक सीधा संदेश देने का प्रयास है जो अब तक अशांति फैला रही थीं। श्रद्धा और उल्लास के साथ संपन्न हुई इस यात्रा ने यह साबित कर दिया है कि बंगाल अब विकास, शांति और अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के रास्ते पर बिना किसी खौफ के चलने के लिए पूरी तरह तैयार है।










