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युवा कवयित्री निधि कुमारी सिंह की प्रथम कृति ‘क़ैद एहसास’ का भव्य लोकार्पण

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ASANSOL DASTAK ONLINE DESK

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युवा कवयित्री निधि कुमारी सिंह की प्रथम कृति ‘क़ैद एहसास’ का भव्य लोकार्पण

कोलकाता, 12 जुलाई। महानगर की प्रतिष्ठित साहित्यिक संस्था बंगीय हिंदी परिषद के सभागार में युवा कवयित्री निधि सिंह की प्रथम काव्य-कृति ‘क़ैद एहसास’ का गरिमामय लोकार्पण समारोह आयोजित किया गया। इस पुस्तक का प्रकाशन ‘शिवोहम पब्लिकेशन हाउस’ (कोलकाता) द्वारा किया गया |

कार्यक्रम की अध्यक्षता दयाशंकर मिश्र ने की। मुख्य अतिथि के रूप में चंद्रिका प्रसाद पाण्डेय ‘अनुरागी’ एवं अजय पोद्दार उपस्थित रहे। मुख्य वक्ता उर्वशी श्रीवास्तव ने कृति की विस्तृत एवं समीक्षात्मक प्रस्तुति देते हुए इसे युवा संवेदनाओं की सशक्त अभिव्यक्ति बताया। अध्यक्षीय उद्बोधन में दयाशंकर मिश्र ने भी कृति की सराहना करते हुए कवयित्री के उज्ज्वल साहित्यिक भविष्य की शुभकामनाएँ दीं।

मुख्य अतिथि चंद्रिका प्रसाद पाण्डेय ‘अनुरागी’ ने कवयित्री को आशीर्वाद देते हुए उनकी रचनात्मक प्रतिभा की प्रशंसा की और निरंतर साहित्य-सृजन के लिए प्रेरित किया।

कार्यक्रम में राम पुकार (गाजीपुर) ने अपनी विशिष्ट शैली में कहा—
“ये अब्रे-करम तू इतना न बरस कि हम आ न सके… विमोचन का काम शुरू हो जाए तो इतना बरस कि हम जा न सके।”
उनकी इन पंक्तियों ने उपस्थित श्रोताओं को भाव-विभोर कर दिया।

ब्रजेश कुमार त्रिपाठी ने कृति के साथ-साथ कवयित्री के व्यक्तित्व की भी सराहना की। उन्होंने विशेष रूप से निधि सिंह के पिता के योगदान को प्रथम श्रेय देते हुए कहा कि बेटियों की शिक्षा और उनके सपनों को साकार करने में परिवार की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होती है। उन्होंने अपनी शुभकामनाएँ इन पंक्तियों के साथ व्यक्त कीं—

“बहुत दूर के सपने देख,
बहुत दूर तक ले जाएंगे।
पंख, हौसला थामे रखना,
यही हैं जो मंज़िल तक पहुँचाएंगे।”

कार्यक्रम का सफल संचालन परिषद् की उपमंत्री पुष्पा मिश्रा ने किया। संयोजन मनोज मिश्र, जबकि समूचे कार्यक्रम का प्रबंधन कमल पुरोहित ने किया। अंत में साहित्य मंत्री सुषमा राय पटेल ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया।

समारोह के अंत में कवयित्री निधि कुमारी सिंह ने उपस्थित सभी अतिथियों, गुरुजनों, मित्रों, परिषद् परिवार एवं सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह कृति केवल उनकी नहीं, बल्कि उन सभी लोगों के विश्वास, स्नेह और सहयोग का परिणाम है, जिन्होंने हर कदम पर उनका साथ दिया।

यह लोकार्पण समारोह साहित्य, संवेदना और आत्मीयता का एक अविस्मरणीय उत्सव बन गया।

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