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*वर्ष 2025 मेरे लिए केवल एक कैलेंडर वर्ष*

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ASANSOL DASTAK ONLINE DESK

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*वर्ष 2025 मेरे लिए केवल एक कैलेंडर वर्ष*
नहीं रहा, बल्कि यह आत्म-साक्षात्कार, सृजनात्मक उन्मेष और वैचारिक साहस का एक ऐतिहासिक अध्याय बन गया। इसी वर्ष मेरी प्रथम पुस्तक “युवा (YUVA)” का प्रकाशन हुआ—और उस क्षण की गरिमा तब और बढ़ गई, जब पुस्तक का विधिवत् उद्घाटन *“श्री संजिव सर”* के कर-कमलों से संपन्न हुआ; वही “श्री संजिव सर”, जिनके उपन्यास *“मुझे पहचानो”* को 2023 का साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला। यह केवल शुभारंभ नहीं था—यह साहित्य के प्रति मेरी प्रतिबद्धता का सार्वजनिक संकल्प था।

*“युवा”* का प्रचार-प्रसार किसी एक मंच तक सीमित नहीं रहा। *अमेज़न, फ्लिपकार्ट और किंडल (ई-बुक) जैसे मंचों पर उपलब्धता ने इसे देश-विदेश के पाठकों तक पहुँचाया।* इससे भी बढ़कर, *लोटस टेम्पल (दिल्ली लाइब्रेरी), आईआईटी दिल्ली लाइब्रेरी, जेएनयू लाइब्रेरी* में इसका दान—
और *SAIL के CMD Sir और DP Sir* को भेंट—इस बात का संकेत है कि “युवा” संस्थानों और विचार-केन्द्रों के बीच संवाद रच रही है।

*SAIL-SEFI टीम* द्वारा विशेष उद्घाटन और हर सामाजिक मंच पर सशक्त प्रचार ने इसे एक साहित्यिक आंदोलन का रूप दिया।

*“युवा और सुमन… की दुनिया”* महज़ कविता-संग्रह नहीं है। यह अतीत और भविष्य के बीच संवाद है—भारत की गौरवशाली परंपरा और आज के युवा स्वप्नों के बीच बना दार्शनिक सेतु। 79 रचनाएँ—पौराणिक संदर्भ, इतिहास, समकालीन चुनौतियाँ, राष्ट्रबोध, नैतिकता और भावनात्मक दृढ़ता—इन सभी थीम्स पर सुव्यवस्थित हैं।

*-ये रचनाएँ युवामन को प्रेरित करती हैं—*
*-अपनी पहचान जानने के लिए,*
*-समाज में अपनी भूमिका परिभाषित करने के लिए,*
*-परंपरा और आधुनिकता के बीच संतुलन साधने के लिए,*
और यह समझने के लिए कि वास्तविक सफलता मानवता में योगदान से आती है।

“यह संकलन दो वर्षों के चिंतन, भावनात्मक ताप और साहित्यिक श्रम का सघन फल है। यह किताब नहीं—दृष्टि, मिशन और राष्ट्र-निर्माण की साहित्यिक यात्रा है।”

संकलन का समापन इन पंक्तियों से होता है—
*“युवा है रामायण सा, आदर्शों का प्रकाश,*
*उर्मिला-की निष्ठा में, रखे संयम की आशा।*
*महाभारत की गूँज में, वह अर्जुन का धनुष थामे,*
*गीता के हर श्लोक में, जीवन सच्चा जाने।”*

2025 ने केवल “युवा” नहीं दी—इसने रचनाओं की एक पूरी आकाशगंगा दी।
*200 से अधिक कहानियाँ तैयार हैं* —कई के नाम आप सुन चुके होंगे; प्रकाशन शीघ्र।
करीब *300 कविताएँ रचनाधीन/तैयार।*
*50+ लेख/संपादकीय देश के विभिन्न समाचार-पत्रों में प्रकाशित।*

*दो समाचार-पत्रों का सहायक संपादक बनने का दायित्व*

विषयों की परिधि?
*बांग्लादेश की चीख से सैयारा के मनमीत तक,*
*नेपाल की Z-Gen के विद्रोह से अरावली के जीत तक—*
*गीत, कहानी, सस्पेंस थ्रिलर, हॉरर, थीम-आधारित कविताएँ, जासूसी कथाएँ—सब कुछ लिखा गया।*
*मैंने इस वर्ष दिल खोलकर लिखा—बिना भय, बिना समझौते।*
जैसे की..

1) *बर्नपुर फाइल्स*
2) *अरावली !.. एक अमर-प्रेम कथा”*
3) *“कहानी !..*
4) *पुनर्जन्म और महाकुंभ का रहस्य”*
5) *“ख़ामोश निगाहें!…”*
6) *“मेरी क्रिसमस: A Thursday”*
7) *“और एक दिन इंसान मर गया !”*
8) *“जो जीता वही सिकंदर..?”*
9) *“पूस की रात !..”.*
10)  *“जीने दो !..”*
11) *“1947 — लौहपुरुष!.. और मैं”*
12) *“धुरंधर #2”*
13) *“अपकी बरस सावन में !..”*
14) *“एक अधूरी उम्मीद !..”*
15) *“पवित्र पापी !…”*
17)  *“शायद !.. अब भी ज़िंदा हूँ”*
18)  *“Aur एक दिन !..”*
19) *“धरती और धड़कन !..”*
20) *“चीकू–बाबू”*
21) *“सैयारा#2”*
22) *“ये जीवन है !!…”*
23) *“भुवनेश्वर!..*
24) *“डॉ. भास्कर”*
25) *“1919: A Love Story”*
26) *“ज़िंदगी, बस ज़िंदगी है !..”*
27) *“आत्म-समर्पण”*
28) *“समय, मैं और एक अधूरा उत्तर!..राजतरंगिणी”*
29) *“कठपुतली !..”*
30) *“प्रेम की यात्रा”*
31) *“काल के उस पार!..”*
32) *“टूटा हुआ पंख”*
33) *“नीरजा!..”*
34) *✍️”कलाम की कलम”✍️*
35) *🌙 “मैं ईदगाह पढ़ रहा हूँ”*
36)  *“और बस 15 दिन !..”*
37) *“पितरों को नमन !..”*
38) *कोलकाता…(The City of Joy) का शाश्वत दर्द !..”*
39) *स्त्री!#3.. एक पुण्य आत्मा!..*
40) *“एक अधूरी ख़्वाहिश!… “*
41) *“स्लीपर सेल राजनीति – समाज की छुपी हुई त्रासदी”*

42) *“जो जीता वही सिकंदर !..”*
43) *“1857:आत्माओं की पुकार”*
44) *“स्त्री #4: अतीत के साए !..”*
45) *“1857:आत्माओं की पुकार”*

किसी लेखक के जीवन में कुछ वर्ष मील का पत्थर बन जाते हैं। *मेरे लिए 2025 वैसा ही वर्ष रहा—जहाँ “युवा” के साथ मेरे विचारों ने उड़ान भरी, और शब्दों ने समाज से संवाद किया।*
इस यात्रा में साथ देने वाले सम्मानित *वरिष्ठों, बैचमेट्स, सहकर्मियों, जूनियर्स, देवियों-सज्जनों और हमारे प्यारे बच्चों—आप सभी का हृदय से आभार।*

*आप सभी को नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएँ।*
*नया वर्ष—नए विचार, नई संवेदनाएँ, और साहित्य के नए क्षितिज लेकर आए।*

✍️ “सुशील कुमार सुमन”
अध्यक्ष, आईओ
सेल आईएसपी, बर्नपुर
*#सुशीलकुमारसुमन*
*#युवा*


अध्यक्ष, आईओ
सेल आईएसपी, बर्नपुर
*#सुशीलकुमारसुमन*
*#युवा*