*स्वामी विवेकानंद जी की 164वीं जयंती*
के पावन अवसर पर हम उस महान संन्यासी, विचारक और राष्ट्रप्रेरक को नमन करते हैं, जिन्होंने भारत की आत्मा को जगाया और विश्व को वेदांत, साहस तथा आत्मविश्वास का संदेश दिया।
स्वामी विवेकानंद ने हमें निर्भय बनने, दुर्बलता को त्यागने और अपने भीतर निहित असीम शक्ति पर विश्वास करना सिखाया। उनका अमर उद्घोष— *“उठो, जागो और तब तक न रुको जब तक लक्ष्य की प्राप्ति न हो जाए”* —आज भी युवाओं को चरित्र, सेवा और राष्ट्रनिर्माण के पथ पर अग्रसर करता है।
ऐसे समय में जब भारत आध्यात्मिक चेतना और वैज्ञानिक प्रगति—दोनों की ओर बढ़ रहा है, विवेकानंद जी का स्वप्न और भी अधिक प्रासंगिक हो जाता है। उन्होंने सिखाया कि मानव-सेवा ही सच्चा धर्म है और निर्बलों के उत्थान में ही सच्चा राष्ट्रधर्म निहित है।
आइए, इस पावन दिवस पर हम उनके आदर्शों को अपने जीवन में उतारने का संकल्प लें—
शक्ति के साथ विनम्रता, ज्ञान के साथ करुणा और विश्वास के साथ कर्म।
स्वामी विवेकानंद जी को कोटि-कोटि नमन।
उनके विचार सदैव हमारे पथ को आलोकित करते रहें और राष्ट्र को नई ऊर्जा प्रदान करें।
*✍️ सुशील कुमार सुमन*
अध्यक्ष, IOA
सेल, आईएसपी, बर्नपुर
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