प्रेस विज्ञप्ति
*आईआईटी खड़गपुर ने एआई-सक्षम भूवैज्ञानिक एवं खनन प्रणालियों हेतु ‘विक्रम सोढ़ी सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ की स्थापना की*
*भारत के सबसे पुराने आईआईटी में एक बहुविषयक अनुसंधान केंद्र के रूप में परिकल्पित इस सेंटर की स्थापना विक्रम सोढ़ी (वाइस चेयरमैन, Mineros SA एवं मैनेजिंग पार्टनर, Sun Valley Investments) द्वारा पाँच वर्षों में 15 करोड़ रुपये के प्रारंभिक योगदान के साथ की गई है।*

खड़गपुर, 16 अप्रैल 2026: भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान खड़गपुर ने एआई-सक्षम भूवैज्ञानिक एवं खनन प्रणालियों हेतु ‘विक्रम सोढ़ी सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ की स्थापना की घोषणा की है। यह एक बहुविषयक अनुसंधान पहल है, जिसका उद्देश्य खनन क्षेत्र में डेटा-आधारित नवाचार को बढ़ावा देना है। इस सेंटर की स्थापना के लिए विक्रम सोढ़ी द्वारा पाँच वर्षों में 15 करोड़ रुपये की वित्तीय प्रतिबद्धता प्रदान की गई है।

एक राष्ट्रीय स्तर के एकीकृत अनुसंधान मंच के रूप में परिकल्पित यह केंद्र भारतीय भूवैज्ञानिक परिस्थितियों के अनुरूप कृत्रिम बुद्धिमत्ता प्रणालियों के विकास पर केंद्रित होगा। यद्यपि खनन उद्योग के विभिन्न क्षेत्रों में डिजिटल उपकरणों का उपयोग प्रारंभ हो चुका है, किंतु उनका विखंडित उपयोग व्यापक परिवर्तन में बाधा बना हुआ है। यह केंद्र इस अंतर को दूर करने हेतु एकीकृत, खनन-उन्मुख एआई प्रणालियाँ विकसित करेगा, जो अन्वेषण, योजना, संचालन, सुरक्षा एवं पर्यावरण प्रबंधन को एकीकृत ढांचे में समर्थन प्रदान करेंगी।

आईआईटी खड़गपुर की भूविज्ञान एवं भूभौतिकी, खनन अभियांत्रिकी तथा धातुकर्म अभियांत्रिकी में दीर्घकालिक शैक्षणिक विशेषज्ञता, तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता एवं डेटा विज्ञान में उसकी बढ़ती क्षमताएँ इस पहल के लिए सशक्त आधार प्रदान करती हैं। यह केंद्र Robert Bosch Centre for Data Science and AI, Indian Institute of Technology Madras के सफल मॉडल से प्रेरित है, जो उद्योग-समर्थित बहुविषयक अनुसंधान पारिस्थितिकी तंत्र की राष्ट्रीय प्राथमिकताओं को संबोधित करने में प्रभावशीलता को दर्शाता है।
इस केंद्र की अनुसंधान गतिविधियाँ खनन मूल्य श्रृंखला के सभी चरणों को समाहित करेंगी, जिनमें अन्वेषण, खदान योजना, प्रसंस्करण, पूर्वानुमानित अनुरक्षण (Predictive Maintenance) तथा ईएसजी (ESG) विश्लेषण शामिल हैं। इसकी एक प्रमुख विशेषता ‘इंडस्ट्री-लिंक्ड ग्रैंड चैलेंजेज़’ कार्यक्रम है, जिसमें उद्योग भागीदारों द्वारा प्रदान किए गए वास्तविक डेटा का उपयोग किया जाएगा। कृत्रिम डेटा के स्थान पर वास्तविक खदान डेटा के उपयोग को अनिवार्य बनाकर यह सुनिश्चित किया जाएगा कि अनुसंधान के परिणाम सीधे लागू करने योग्य एवं प्रासंगिक हों।
यह केंद्र आईआईटी खड़गपुर के भीतर एक स्वतंत्र बहुविषयक इकाई के रूप में स्थापित किया गया है तथा इसका संचालन अनुसंधान एवं विकास के डीन के शैक्षणिक मार्गदर्शन में होगा। इसकी प्रशासनिक संरचना में संकाय-नेतृत्व वाले अनुसंधान को प्राथमिकता दी गई है, जिसे एक बाह्य सलाहकार बोर्ड द्वारा रणनीतिक दिशा प्रदान की जाएगी, साथ ही शैक्षणिक स्वायत्तता को बनाए रखा जाएगा।
*आईआईटी खड़गपुर के निदेशक, प्रो. सुमन चक्रवर्ती, ने कहा,* “विक्रम सोढ़ी सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना आईआईटी खड़गपुर के बहुविषयक अनुसंधान तंत्र को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। संस्थान के प्लेटिनम जुबली वर्ष में यह पहल सहयोगात्मक एवं अनुप्रयोग-आधारित अनुसंधान को आगे बढ़ाने में हमारी निरंतर अग्रणी भूमिका को दर्शाती है। भूवैज्ञानिक विज्ञान, खनन अभियांत्रिकी एवं कृत्रिम बुद्धिमत्ता के समन्वय के माध्यम से यह केंद्र जटिल राष्ट्रीय चुनौतियों का समाधान करने में सक्षम होगा।”
*विक्रम सोढ़ी ने कहा,* “यह केंद्र एक स्थायी संस्थान के रूप में परिकल्पित है, जो अपने अनुसंधान एवं बौद्धिक योगदान की शक्ति पर आधारित होगा। इसका उद्देश्य खनन क्षेत्र को आगे बढ़ाने हेतु कठोर एवं अनुप्रयोग-उन्मुख कार्य के माध्यम से दीर्घकालिक मूल्य सृजित करना है, जो किसी एक व्यक्ति पर निर्भर नहीं होगा।”
*इस केंद्र का नामकरण सोढ़ी परिवार के आईआईटी खड़गपुर के साथ दीर्घकालिक संबंधों के सम्मान में किया गया है। मंजीत सोढ़ी, जो विक्रम सोढ़ी के पिता हैं, संस्थान के प्रतिष्ठित पूर्व छात्र हैं और उन्होंने 1977 में रडार सिस्टम्स इंजीनियरिंग में एम.टेक. पूर्ण किया था। यह नामकरण इस विरासत के साथ-साथ राष्ट्रीय महत्व के क्षेत्रों में अनुसंधान एवं नवाचार को बढ़ावा देने की सतत प्रतिबद्धता को भी दर्शाता है।*
समझौता ज्ञापन (MoU) पर संस्थान के विशिष्ट सदस्यों, उद्योग प्रतिनिधियों एवं आमंत्रित अतिथियों की उपस्थिति में औपचारिक रूप से हस्ताक्षर किए गए।
धन्यवाद,
प्रतीक दामा
जनसंपर्क अधिकारी
आईआईटी खड़गपुर
ईमेल: pro@iitkgp.ac.in
मोबाइल: 9975654202










