*ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती का 814वां उर्स अकीदत से मनाया गया*
*सुरसण्डा में विशाल लंगर का आयोजन, हजारों अकीदतमंद हुए शामिल*
बाराबंकी (अबू शहमा अंसारी)हज़रत ख़्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती रहमतुल्लाह अलैह का 814वां उर्स क्षेत्र में अकीदत और सादगी के साथ मनाया गया। इस अवसर पर मसौली थाना क्षेत्र के ग्राम सुरसण्डा स्थित हज़रत मख़दूम शाह फ़ज़ल करीम रहमतुल्लाह अलैह के आस्ताने पर एक विशाल लंगर का आयोजन किया गया। दरगाह मखदुमिया कमेटी के तत्वावधान में आयोजित इस लंगर में क्षेत्र के हजारों अकीदतमंदों ने शिरकत की और प्रसाद ग्रहण किया।
आस्ताना मख़दूमिया परिसर में शनिवार सुबह से देर शाम तक जायरीनों की भारी भीड़ उमड़ी रही। लंगर की व्यवस्था में कमेटी के सदस्यों और स्वयंसेवकों ने सक्रिय भूमिका निभाई, जिससे कार्यक्रम सुचारु रूप से संपन्न हो सका।
कस्बा सुरसण्डा निवासी मास्टर शमीमुद्दीन हशमती ने बताया कि उर्दू कैलेंडर के अनुसार, हज़रत ख़्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती रहमतुल्लाह अलैह का सालाना उर्स रजब माह में मनाया जाता है। रजब माह की छह तारीख को कुल शरीफ होता है। इसी अवसर पर हर साल गांव स्थित हज़रत मखदूम फ़ज़ल करीम शाह रहमतुल्लाह अलैह के आस्ताने पर मखदुमिया कमेटी द्वारा लंगर का आयोजन किया जाता है। इस दौरान क्षेत्र के विभिन्न गांवों से बड़ी संख्या में लोग पहुंचकर लंगर ग्रहण करते हैं और दुआ-फातिहा के बाद अपने घरों को लौटते हैं।
इस अवसर पर डॉ. तुफैल अहमद वारसी ने हज़रत ख़्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती रहमतुल्लाह अलैह के संदेशों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि ख्वाजा साहब ने हमेशा आपसी भाईचारा, प्रेम और सौहार्द का उपदेश दिया। उनका संदेश था कि जीवन में किसी से बैर न रखें और एक-दूसरे के सुख-दुख में सहभागी बनें।
कार्यक्रम में दरगाह कमेटी के पदाधिकारी, अली वारिस वसी अहमद, रिजवान एडवोकेट, जव्वाद अहमद, एतबार अली, कमल सलमानी, मजार खादिम अल्ताफ हाशमी, मुख्तार इकराम, असीर हाशमी, मन्नू इम्तियाज बाबा सहित क्षेत्र के गणमान्य लोग, उलेमा-ए-किराम और बड़ी संख्या में अकीदतमंद मौजूद रहे। कार्यक्रम का समापन देश में अमन-चैन, भाईचारे और खुशहाली की दुआ के साथ किया गया।








