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*”गर्व से कहो !… बेटी है !.”*

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ASANSOL DASTAK ONLINE DESK

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“आज मेरी बेटी श्रेया सुमन का जन्मदिन है। वह 14 वर्ष की हो गई है। यह महज एक उम्र नहीं, यह मेरी ज़िंदगी की एक नई अनुभूति है – एक पिता के रूप में मेरी आत्मा का वो कोना, जो पहले अधूरा था, बेटी के जन्म से पूर्ण हुआ। गर्व से कहता हूं – बेटी है। क्योंकि बेटी है, तभी यह दुनिया है। यही भाव इस लेख का मूल है। एक पिता की कलम से निकली स्याही जब बेटी के लिए बहती है, तब वह सिर्फ एक लेख नहीं, बल्कि एक सामाजिक संदेश बन जाता है।

*“बेटी के जन्म का नया सूर्योदय”*

जब बेटी का जन्म हुआ, तो मेरे जीवन में सिर्फ एक बच्चा नहीं आया, बल्कि मेरी दृष्टि, मेरी सोच, मेरा जीवन दर्शन ही बदल गया। मैं पहले भी अपनी मां, दादी, नानी, बहन और पत्नी बिनीता सुमन का सम्मान करता था, लेकिन बेटी होने के बाद वह सम्मान श्रद्धा में बदल गया। अब मैं उनकी हर भूमिका को और भी गहराई से समझता हूं। उनकी बलिदान, उनकी संवेदना, उनकी सहनशीलता, सबकुछ अब मेरे लिए नए अर्थ में परिभाषित हुआ।

*“नारी: शक्ति, ममता और सृजन की प्रतीक”*

नारी केवल एक रिश्ते का नाम नहीं – वह जन्म देती है, सहेजती है, सिखाती है और एक सभ्यता की नींव रखती है। आज की बेटी कल की माँ है, शिक्षिका है, वैज्ञानिक है, प्रशासक है, नेता है। वह सृजन की शक्ति है और सृजन को दिशा देने वाली भी।

*“भारत का गौरवशाली अतीत – नारी का वैदिक युग”*

“गार्गी वाचक्नवी:”

वैदिक काल की दार्शनिक महिला, जिन्होंने याज्ञवल्क्य जैसे महर्षियों से शास्त्रार्थ किए। वे बौद्धिकता की प्रतीक हैं।

“मैत्रेयी:”
अमरत्व और सत्य की खोज में रत, याज्ञवल्क्य की पत्नी। उन्होंने बताया कि आत्मज्ञान ही स्त्री की सच्ची मुक्ति है।

“रानी दुर्गावती:”

गोंडवाना की वीरांगना जिन्होंने मुगलों से वीरता से युद्ध किया और प्राणों की आहुति दी।

“अनुसूया, सीता, सावित्री, द्रौपदी, कुंती:”

महाकाव्यों की स्त्रियाँ जो न केवल आदर्श हैं बल्कि साहस, बुद्धिमत्ता और समर्पण का पर्याय हैं।

“रानी डिड्डा:”

कश्मीर की 10वीं शताब्दी की शासिका, जो उत्कृष्ट राजनीतिज्ञ और प्रशासक थीं।

*“मध्यकालीन भारत – आंधियों में जलती लौ”*

“रानी लक्ष्मीबाई:”

1857 की क्रांति की प्रणेता। उनका नाम स्वतंत्रता के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है।

“रजिया सुल्तान:”

दिल्ली सल्तनत की पहली महिला शासक। अपने साहस और प्रशासनिक क्षमता से इतिहास रच दिया।

“मीराबाई:”

भक्ति आंदोलन की अग्रणी, जिन्होंने सामाजिक बंधनों को तोड़कर कृष्ण भक्ति को अपनाया।

“कित्तूर चेनम्मा:”

ब्रिटिश साम्राज्यवाद के विरुद्ध प्रारंभिक विद्रोहियों में अग्रणी।

“रानी वेलु नाचियार:”

ब्रिटिशों के खिलाफ पहली संगठित महिला विद्रोहिनी। उन्होंने महिलाओं की सेना बनाई।

*“आधुनिक भारत – नए भारत की निर्माता बेटियाँ”*

*“स्वतंत्रता सेनानी:”*

“सरोजिनी नायडू” – कवयित्री, कांग्रेस अध्यक्ष, राज्यपाल।

“एनी बेसेंट” – थियोसोफिस्ट, शिक्षाविद, भारतीय स्वतंत्रता समर्थक।

“कस्तूरबा गांधी” – गांधीजी की पत्नी, सत्याग्रह की सहायक।

“अरुणा आसफ अली” – भारत छोड़ो आंदोलन की नायिका।

“उषा मेहता” – अंडरग्राउंड रेडियो की संचालिका।

*“समकालीन भारत की नारी शक्ति”*

*“राजनीति:”*

“इंदिरा गांधी” – भारत की पहली महिला प्रधानमंत्री।

“सुषमा स्वराज” – करुणा और कूटनीति की मिसाल।

“द्रौपदी मुर्मू “– भारत की पहली आदिवासी महिला राष्ट्रपति।

*“विज्ञान और अंतरिक्ष:”*

“कल्पना चावला” – अंतरिक्ष में भारत की पहली बेटी।

“डॉ. टेसी थॉमस” – मिसाइल वुमन ऑफ इंडिया।

“रितु करिधाल” – मंगलयान की संचालक।

*“कला, साहित्य, सिनेमा:”**

“लता मंगेशकर” – सुरों की देवी।

“एम.एस. सुब्बुलक्ष्मी” – संगीत की साध्वी।

“अरुंधति रॉय” – बुकर्स पुरस्कार विजेता लेखिका।

“दीपिका पादुकोण, प्रियंका चोपड़ा” – वैश्विक सितारे।

*“खेल:”*

“पी.वी. सिंधु” – ओलंपिक पदक विजेता।

“मैरी कॉम” – बॉक्सिंग चैंपियन।

“सानिया मिर्ज़ा”– टेनिस सनसनी।

“हरमनप्रीत कौर”– क्रिकेट टीम की कप्तान।

“अवनी लेखरा” – पैरा-ओलंपिक की स्वर्ण विजेता।

*“व्यापार और नवाचार:”*

“किरण मजूमदार शॉ” – बायोकॉन की संस्थापक।

“इंद्रा नूयी” – पेप्सिको की पूर्व CEO।

“निर्मला सीतारमण” – भारत की वित्त मंत्री।

“फाल्गुनी नायर” – नायका की संस्थापक।

*“प्रवासी भारतीय बेटियाँ”*

“कमला हैरिस” – अमेरिका की उपराष्ट्रपति।

“सुंदरि नटराजन” – नासा में योगदानकर्ता।

“पद्मश्री वॉरियर” – टेक्नोलॉजी में अग्रणी।

*“भारतीय प्रशासनिक सेवा में बेटियों की सफलता”*

टीना डाबी – UPSC 2015 टॉपर।

श्रुति शर्मा – UPSC 2021 टॉपर।

इरा सिंघल – दिव्यांग होते हुए भी UPSC जनरल कैटेगरी टॉपर।

सृष्टि देशमुख – महिला टॉपर, पर्यावरण समर्थक।

अनु कुमारी – मां होते हुए भी UPSC सफलता।

सौम्या पांडे – COVID-19 योद्धा।

विशाखा यादव – MNC की नौकरी छोड़कर UPSC टॉपर।

शक्ति दुबे: 2024 आईएएस टॉपर

*“मेरी बेटी – मेरी दुनिया”*

श्रेया सुमन, तू सिर्फ मेरी बेटी नहीं, मेरी प्रेरणा है। जब तू हँसती है, तो लगता है दुनिया मुस्कुरा रही है। जब तू सीखती है, तो लगता है ज्ञान का एक दीप जल गया है।

तेरे कारण, मैं हर उस नारी को आज और अधिक सम्मान की दृष्टि से देखता हूं जिसने मुझे जन्म दिया, पाला, पढ़ाया, या मेरे साथ जीवन की राह चली। तू मेरे भीतर नारी शक्ति के प्रति समझ को और गहरा कर गई है।

आओ, इस लेख के माध्यम से हम सब मिलकर कहें –
गर्व से कहो ! ..बेटी है।
क्योंकि बेटी है, तभी मानवता है।
बेटी है, तभी करुणा है।
बेटी है, तभी कल है।

*“श्रेया सुमन को जन्मदिन की अनंत शुभकामनाएं।”*

*“लेखक: सुशील कुमार सुमन”*
अध्यक्ष, आईओए
सेल आईएसपी बर्नपुर