चुनावी मौसम बीता पर नहीं बदले सांकतोड़िया-डिसरगढ़ मार्ग के दिन, धूल और कीचड़ से राहगीर बेहाल
सांकतोड़िया: पुरुलिया से आसनसोल को जोड़ने वाली मुख्य सड़क पर स्थित डिसरगढ़ से नियामतपुर मार्ग की बदहाली ज्यों की त्यों बनी हुई है। लगभग एक वर्ष से अधिक समय बीत जाने के बाद भी इस मार्ग की सुध लेने वाला कोई नहीं है। स्थानीय लोगों को उम्मीद थी कि चुनाव के दौरान इस सड़क का कायाकल्प होगा, लेकिन चुनाव बीत जाने के बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है।

हिचकोले खाती गाड़ियां, उड़ती धूल
प्रशासन ने इस सड़क के अधिकांश भाग की ऊपरी परत (अलकतरा) को हटाकर उस पर गिट्टी और बालू मिलाकर छोड़ दिया है। इसी उखड़ी हुई बदहाल सड़क पर दिन-रात छोटी-बड़ी गाड़ियां रेंगने को मजबूर हैं। इसके कारण न सिर्फ वाहनों को नुकसान पहुँच रहा है, बल्कि यात्रियों को भी भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। सफारी अब एक दर्दनाक अनुभव बन चुकी है।
मौसम कोई भी हो, मुसीबत पक्की
इस पुरानी सड़क की सुध लेने वाला वर्तमान में कोई माई-बाप नजर नहीं आ रहा है। हालात यह हैं कि:
सूखे मौसम में धूल का गुबार: दो दिन धूप होते ही पूरी सड़क धूल से भर जाती है। वाहनों के गुजरने पर उड़ती धूल से राहगीरों का दम घुटने लगता है।
बारिश में कीचड़ का साम्राज्य: थोड़ी सी भी वर्षा होने पर यह मार्ग पूरी तरह कीचड़ में तब्दील हो जाता है।
पानी के छिड़काव से बढ़ी मुसीबत: धूल को दबाने के लिए जब सड़क पर पानी का छिड़काव किया जाता है, तो वह पानी बालू-मिट्टी के साथ मिलकर रास्ते को बेहद फिसलन भरा और कीचड़युक्त बना देता है।
जलभराव की समस्या: सड़क के किनारे टूटी पेयजल पाइपलाइनों से लगातार बहता पानी इस समस्या को और गंभीर बना रहा है।
चुनाव बीते, अब किसका इंतजार?
स्थानीय निवासियों का कहना है कि वे लंबे समय से इस मार्ग के बनने का आकलन लगा रहे थे। चुनावी मौसम में कयास थे कि वोट के लिए ही सही, सड़क दुरुस्त होगी। अब चुनाव भी बीत चुके हैं। लोगों का सवाल है कि क्या अब नई सरकार के गठन और उसकी लंबी प्रतीक्षा के बाद ही इस नरकीय स्थिति से मुक्ति मिलेगी? फिलहाल इस मार्ग पर सफर करने वाले यात्रियों को हर समय झटके, धूल और कीचड़ का सामना करना पड़ रहा है।








