जाम की भट्टी में झुलस रहा नियामतपुर बाजार: अवैध ऑटो-टोटो और बेकाबू अतिक्रमण ने छीनी जनता की सांसें!
स्टेशन रोड, न्यू रोड, आसनसोल और लिथुरिया रोड पर सुबह से रात तक रेंग रहे पहिए, राहगीर जान जोखिम में डालकर चलने को मजबूर
कुल्टी:जीटी रोड से सटे कोयलांचल के सबसे व्यस्ततम नियामतपुर बाजार में यातायात व्यवस्था पूरी तरह वेंटिलेटर पर आ चुकी है। अनियंत्रित ट्रैफिक, अवैध ऑटो-टोटो के अड्डों और फुटपाथों पर फैले अतिक्रमण के कारण स्थानीय निवासियों, व्यापारियों और राहगीरों का जीना मुहाल हो गया है। हालात इस कदर बदतर हैं कि सुबह की पहली किरण से लेकर देर रात तक स्टेशन रोड, न्यू रोड, आसनसोल रोड और लिथुरिया रोड जैसी प्रमुख धमनियों पर गाड़ियां रेंगने को मजबूर हैं।स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि फुटपाथों पर दुकानदारों के अवैध कब्जे के कारण पैदल चलने वालों के लिए कोई जगह नहीं बची है। लोग जान हथेली पर रखकर मुख्य सड़क पर चलने को मजबूर हैं, जिससे आए दिन दुर्घटनाएं हो रही हैं। आक्रोशित जनता ने अब आर-पार के मूड में प्रशासन से इन अवैध अड्डों को तुरंत जमींदोज करने, ऑटो-टोटो के लिए एक निश्चित स्टैंड बनाने और ट्रैफिक नियमों की धज्जियां उड़ाने वालों पर कानूनी हंटर चलाने की मांग की है।
सियासत गर्म: कांग्रेस की चेतावनी ।इस मुद्दे पर अब राजनीतिक पारा भी चढ़ गया है। कांग्रेस नेता सुकांत दास ने स्थानीय प्रशासन की कार्यशैली को कटघरे में खड़ा किया है। उन्होंने कहा, “क्षेत्र में बढ़ती बेरोजगारी के कारण ऑटो और टोटो की संख्या में बेतहाशा बढ़ोतरी हुई है। यह सीधे तौर पर प्रशासनिक विफलता है कि पिछले 15 सालों में एक भी स्थायी पार्किंग या स्टैंड की व्यवस्था नहीं की गई। इसका खामियाजा आज आम जनता भुगत रही है।” सुकांत दास ने दो टूक चेतावनी दी कि यदि राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन ने जल्द ही नियामतपुर में स्थायी पार्किंग का इंतजाम नहीं किया, तो कांग्रेस सड़कों पर उतरकर उग्र
आंदोलन करने के लिए बाध्य होगी। जनता के 3 तीखे सवाल (जो प्रशासन से पूछने हैं) 1. ‘नो-पार्किंग’ जोन में धड़ल्ले से खड़ी होने वाली बाइकों पर पुलिस का हंटर कब चलेगा? 2. जब रूट तय नहीं हैं, तो सड़कों पर अवैध टोटो की बाढ़ कैसे आ गई?
इसका जिम्मेदार कौन है? 3. फुटपाथों को अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए कोई ठोस और स्थायी अभियान
क्यों नहीं चलाया जाता?
जाम का चक्रव्यूह: चार प्रमुख मार्ग (स्टेशन, न्यू, आसनसोल और लिथुरिया रोड) पूरी तरह ब्लॉक।पैदल चलना दूभर: फुटपाथ गायब, मुख्य सड़क पर जान जोखिम में डालकर चल रहे हैं लोग।नो-मैन लैंड: जहां-तहां पार्क की जा रही बाइकें और बीच सड़क पर सवारी उतारते टोटो बने आफत।प्रशासनिक मौन: 15 सालों से किसी भी स्थायी पार्किंग या ऑटो स्टैंड का निर्माण न होना लापरवाही का सबूत।










