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*बंगाल के बहूचर्चित एजीचर्च मे लगा ताला हजारों अनुयाईयों ने चर्च मे प्रार्थना करने के लिए लगाई पुलिस से गुहार… चर्च के सामने धरने पर बैठे*

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ASANSOL DASTAK ONLINE DESK

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*बंगाल के बहूचर्चित एजीचर्च मे लगा ताला हजारों अनुयाईयों ने चर्च मे प्रार्थना करने के लिए लगाई पुलिस से गुहार… चर्च के सामने धरने पर बैठे*

*पिछले कई महीनों से चल रहा एजीएनआई और एजीचर्च के बिच प्रॉपर्टी को लेकर विवाद….*

*स्कुल मे एडमिशन के नाम पर घोटाले का मामला भी आचुका है सामने दो एजेंट हो चुके हैं गिरफ्तार… बड़ी राशि की हुई थी लेनदेन*

आसनसोल, पश्चिम बंगाल आसनसोल साऊथ पुलिस फाड़ी इलाके मे स्थित 15 जनवरी 1963 मे एजीएनआई के द्वारा स्थापित किए गए आसनसोल एजीचर्च मे एजीचर्च के वर्तमान कमिटी के पदाधिकारियों ने चर्च मे ताला लगा दिया है, जिसको लेकर चर्च के करीब एक सौ से ऊपर पास्टर सड़क पर तो आ ही गए हैं, साथ मे चर्च मे प्रार्थना करने वाले करीब एक हजार से ऊपर अनुयाई भी अब दर बदर की ठोकरें खाने को मजबूर हो गए हैं, मामले मे एजीचर्च के प्रबंध समिति के सदस्य श्री के प्रभाकर राव की अगर माने तो उनके चर्च मे करीब एक सौ से ऊपर पास्टर हैं, चर्च बंद होने से उनकी सैलरी बंद हो गई है, उनके खाने के लाले पड़ गए हैं, वह अपने घर के किराए भी नही दे पा रहे हैं, इसके अलावा चर्च मे प्रार्थना करने आने वाले एक हजार से ऊपर अनुयाई भी चर्च मे ताला लगा देखकर वापस घूमकर चले जा रहे हैं, वह परमेश्वर की अराधना नही कर पा रहे हैं, चर्च का दरवाजा खुलवाने के लिये ही वह और चर्च के तमाम पास्टरों सहित चर्च के अनुयाई चर्च के बाहर धरने पर बैठ गए हैं, उन्होंने यह भी कहा की चर्च खुलवाने के लिये चर्च के तमाम पास्टरों व चर्च के अनुयाईयों ने एक लिखित शिकायत आसनसोल साऊथ पुलिस फाड़ी सहित आसनसोल दुर्गापुर पुलिस कमिश्नर को दी है, उनको यहाँ की क़ानून वेवस्था और पुलिस पर पूरा भरोषा है, उनको एक ना एक दिन जरूर न्याय मिलेगा, तबतक उनका यह आंदोलन जारी रहेगा, इसके अलावा उन्होंने एजीचर्च स्कुल मे चल रहे एडमिशन घोटाले को लेकर कहा की मामला पुलिस और न्यालय के पास है, जो होगा अच्छा होगा और दोषियों को उनकी किये की जरूर सजा मिलेगी, हम बताते चलें की पिछले कुछ महीनों से एजीएनआई और एजीचर्च के बिच प्रॉपर्टी को लेकर कुछ विवाद शुरू हुआ है, जिस विवाद मे एजीचर्च के प्रबंध समिति मे शामिल सदस्य दो फांड़ मे बंट गए हैं, एक फांड़ एजीएनआई के साथ है तो वहीं दूसरा फांड़ एजीएनआई के खिलाफ खड़ा है और एजीचर्च को एजीएनआई से अलग बताते हुए अपना प्रॉपर्टी बता रहा है, यह कहकर की एजीचर्च उनकी संस्था है, जिस संस्था को उन्होंने खुद रजिस्ट्रेशन करवाया है, जिसके लेखा जोखा का पूरा दाइत्व सिर्फ और सिर्फ उनके पास है, उनकी संस्था मे कोई हस्तक्षेप नही कर सकता, जबकि एजीएनआई  एजीचर्च को अपनी संस्था के अधीन बता रहा है, यह कहते हुए की उन्होंने एजीचर्च संस्था की कागजी कार्य मे लेट लतीफ होने के कारण आनन -फानन मे संस्था को रजिस्ट्रेशन करवाया, आज उसी संस्था से जुड़े सदस्य उनके खिलाफ खड़े हो गए हैं और वह उनकी एजीचर्च संस्था की प्रॉपर्टी को अपना प्रॉपर्टी बता रहे हैं,
एजीचर्च प्रबंध समिति के सदस्य श्री के प्रभाकर राव ने कहा की वह एजीचर्च संस्था के प्रबंध समिति के सदस्य हैं, बावजूद उसके उनको भी चर्च जाने की अनुमति नही दी जा रही, चर्च मे स्थित चर्च का कार्यालय मे भी ताला लगा दिया गया है, जो गलत है, मंदिर कभी बंद नही करना चाहिए, उनको देखना चाहिए की मंदिर के बाहर मंदिर के पुजारी खड़े हैं, मदिर के भक्त खड़े हैं, उनको परमेश्वर की भक्ति से क्यों और किस किये दूर किया जा रहा, हम बताते चलें की एजीएनआई और एजीचर्च के बिच चल रहे विवाद मे अभी तो चर्च का दरवाजा ही बंद हुआ है, ऐसा ना हो की आने वाले समय मे कहीं एजीचर्च स्कुल पर ताला ना लटक जाए, अगर ऐसा हुआ तो एजीचर्च स्कुल का कुल चार ब्रांच चल रहा है, चारों ब्रांचो मे आठ हजार से ऊपर छात्र और छात्राएं सिक्षा ग्राहन कर रहे हैं, इसके अलावा सैकड़ों की तैदाद मे सिक्षक भी हैं, जिनकी भविष्य भी अंधकार मे चली जाएगी, जिसकी चिंता स्कुल मे पढ़ रहे छात्र और छात्राओं के अभिभावकों को होनी शुरू हो गई है,