बर्नपुर में श्रमिकों का ऐतिहासिक शक्ति प्रदर्शन: 18 नवंबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल का ऐलान, 3,000 से अधिक कर्मचारियों ने भरी हुंकार
ठेका श्रमिकों के लंबित नए वेतनमान को तत्काल लागू करने की मांग; नियुक्ति पत्र, वेतन पर्ची और प्रत्येक माह की 7 तारीख तक भुगतान सुनिश्चित करने की उठी आवाज़। ISP अस्पताल एवं टाउनशिप की बदहाल व्यवस्था में सुधार की भी मांग।
बर्नपुर, 2 नवंबर 2026:
श्रमिकों के सम्मान, अधिकार और सामाजिक सुरक्षा की लड़ाई को एक निर्णायक मोड़ देते हुए आज SAIL-ISP, बर्नपुर के फ्लाईओवर गेट पर बर्नपुर इस्पात कर्मचारी संघ (BIKS-BMS) एवं बर्नपुर ठेकेदार मजदूर संघ (BTMS-BMS) के आह्वान पर एक विशाल गेट मीटिंग का आयोजन किया गया। शाम 4:30 बजे से 5:30 बजे तक आयोजित इस सभा में 3,000 से अधिक नियमित एवं ठेका कर्मचारियों की उत्साहपूर्ण भागीदारी ने श्रमिक एकजुटता का व्यापक संदेश दिया।

सभा का मुख्य मुद्दा ठेका श्रमिकों के लिए लंबे समय से लंबित नए वेतनमान को तत्काल लागू कराने का रहा। वक्ताओं ने स्पष्ट रूप से कहा कि जो श्रमिक अपने परिश्रम, पसीने और समर्पण से इस्पात संयंत्र के उत्पादन एवं संचालन में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं, उन्हें सम्मानजनक मजदूरी और बुनियादी श्रम अधिकारों से वंचित रखना किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं हो सकता।
सभा को संबोधित करने वाले प्रमुख वक्ताओं में संजित प्रसाद (महासचिव, BTMS), महेश बनर्जी (अध्यक्ष, BTMS), संजीत बनर्जी (महासचिव, BIKS), अजय सिंह (अध्यक्ष, BIKS), अमित सिंह (संगठन मंत्री, BIKS) एवं दीपक सिंह शामिल थे। सभी वक्ताओं ने श्रमिकों की लंबित समस्याओं, उनके अधिकारों तथा प्रबंधन की जिम्मेदारियों पर अपने विचार रखे और एकजुट होकर संघर्ष को आगे बढ़ाने का आह्वान किया।
सभा में ठेका श्रमिकों के हितों को ध्यान में रखते हुए निम्नलिखित मांगों को प्रमुखता से उठाया गया:
1. लंबे समय से लंबित नए वेतनमान को बिना किसी और विलंब के तत्काल प्रभाव से लागू किया जाए।
2. प्रत्येक ठेका श्रमिक को अनिवार्य रूप से नियुक्ति पत्र (Appointment Letter) उपलब्ध कराया जाए।
3. प्रत्येक माह सभी श्रमिकों को विधिवत वेतन पर्ची (Wage Slip) जारी की जाए।
4. प्रत्येक माह की 7 तारीख तक सभी श्रमिकों के बैंक खातों में वेतन भुगतान सुनिश्चित किया जाए।
5. नए श्रम कानूनों के प्रावधानों एवं श्रमिक कल्याण की भावना के अनुरूप ठेका श्रमिकों को उनके सभी वैधानिक अधिकार, सामाजिक सुरक्षा और कार्यस्थल पर सम्मान सुनिश्चित किया जाए।
वक्ताओं ने कहा कि ठेका श्रमिकों को केवल उत्पादन का साधन समझने की मानसिकता समाप्त होनी चाहिए। उनके श्रम का उचित मूल्य, समय पर वेतन और सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करना प्रबंधन की जिम्मेदारी है। वर्षों से इस्पात संयंत्र की उत्पादन प्रक्रिया में योगदान देने वाले इन श्रमिकों को अब और आश्वासनों के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता।
इसके साथ ही नियमित कर्मचारियों की समस्याओं को भी सभा में प्रमुखता से उठाया गया। वक्ताओं ने ISP अस्पताल की चिकित्सा व्यवस्था में व्यापक सुधार, पर्याप्त चिकित्सकों की उपलब्धता, बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं तथा बर्नपुर टाउनशिप में नागरिक सुविधाओं के विकास की मांग की। उनका कहना था कि वर्षों तक संयंत्र के प्रति निष्ठापूर्वक सेवा देने वाले कर्मचारियों एवं उनके परिवारों को बेहतर चिकित्सा और सम्मानजनक नागरिक सुविधाएं मिलना उनका अधिकार है, कोई एहसान नहीं।
सभा के दौरान BMS नेतृत्व ने प्रबंधन को स्पष्ट संदेश देते हुए घोषणा की कि यदि 17 नवंबर 2026 तक ठेका श्रमिकों के लिए लंबित नया वेतनमान लागू करने की दिशा में ठोस निर्णय एवं कार्रवाई नहीं की गई, तो 18 नवंबर 2026 को सुबह 6 बजे से अनिश्चितकालीन हड़ताल (Unlimited Strike) प्रारंभ की जाएगी। वक्ताओं ने कहा कि श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा के लिए संगठन इस संघर्ष को पूरी प्रतिबद्धता के साथ आगे बढ़ाएगा। अब केवल मौखिक आश्वासन नहीं, बल्कि ठोस निर्णय और उसका वास्तविक कार्यान्वयन आवश्यक है।
सभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने भारतीय मजदूर संघ की मूल विचारधारा को दोहराया। उन्होंने कहा कि BMS का मूल दर्शन है— “राष्ट्रहित में उद्योगहित और उद्योगहित में श्रमिकहित।” यह विचारधारा श्रमिक और उद्योग को एक-दूसरे का विरोधी नहीं, बल्कि परस्पर पूरक मानती है। उद्योग की वास्तविक प्रगति तभी संभव है, जब उसमें कार्यरत प्रत्येक श्रमिक को उचित पारिश्रमिक, सम्मान, सुरक्षा और सामाजिक न्याय मिले।
BMS का मानना है कि श्रमिक किसी भी उद्योग की सबसे बड़ी पूंजी हैं। ठेका एवं नियमित कर्मचारियों के बीच अधिकारों और सम्मान के आधार पर भेदभाव की मानसिकता समाप्त होनी चाहिए। श्रमिकों के हितों की रक्षा के साथ-साथ औद्योगिक सौहार्द और उत्पादन की निरंतरता बनाए रखना भी संगठन की जिम्मेदारी है। लेकिन औद्योगिक शांति का अर्थ अन्याय के सामने मौन रहना नहीं हो सकता। संगठन संवाद और समाधान में विश्वास रखता है, परंतु श्रमिकों के जायज अधिकारों के प्रश्न पर समझौता नहीं करेगा।
आज की इस विशाल सभा में प्रमुख वक्ताओं के अतिरिक्त संजीत प्रसाद, महेश बनर्जी, संजीत बनर्जी, अजय सिंह, अमित सिंह एवं दीपक सिंह के साथ सrikant Sah (श्रीकांत साह), संतोष झा, अरविंद कुमार शर्मा, अर्घ्य हाजरा, तपस बाउरी, चेतन जी, गणेश जी, रवि रजक एवं ब्यूटी दास सहित अनेक श्रमिक प्रतिनिधि एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे। 3,000 से अधिक कर्मचारियों एवं ठेका श्रमिकों की भागीदारी ने कार्यक्रम को व्यापक श्रमिक एकजुटता का स्वरूप प्रदान किया।
सभा के अंत में उपस्थित श्रमिकों ने एकजुट होकर संकल्प लिया कि वेतन, सम्मान, सुरक्षा और सामाजिक न्याय की लड़ाई को किसी भी परिस्थिति में कमजोर नहीं पड़ने दिया जाएगा। सभी ने संगठन के नेतृत्व में एकजुट रहकर अपने अधिकारों के लिए लोकतांत्रिक एवं संगठित तरीके से संघर्ष जारी रखने का संकल्प व्यक्त किया।
बर्नपुर की इस विशाल सभा ने प्रबंधन के सामने एक स्पष्ट संदेश रखा है— श्रमिकों के धैर्य को उनकी कमजोरी न समझा जाए। अब आश्वासनों का नहीं, ठोस निर्णय और कार्यान्वयन का समय है। जिस श्रमिक के परिश्रम से इस्पात तैयार होता है, उसके जीवन में सम्मान, सुरक्षा और खुशहाली सुनिश्चित करना भी उतना ही आवश्यक है। श्रमिकों का सम्मान ही उद्योग की वास्तविक प्रतिष्ठा है।
मजदूर एकता जिंदाबाद!
भारतीय मजदूर संघ जिंदाबाद!
ठेका मजदूर एकता जिंदाबाद!
भारत माता की जय!








