बाराचक रेलवे साइडिंग में कोयला लोडिंग-अनलोडिंग ठप, रेलवे डेमरेज का खतरा बढ़ा
देर रात पुलिस की टीम ने रुकवाया काम; प्रशासनिक चुप्पी से बढ़ीं अटकलें, वर्चस्व की लड़ाई की चर्चा तेज
कुल्टी। बाराचक रेलवे साइडिंग में शनिवार रात 12 बजे से कोयला लोडिंग और अनलोडिंग का काम अचानक बंद हो गया है। इस औचक फैसले से स्थानीय कारोबारियों और मजदूरों में हड़कंप मच गया है। वर्तमान में साइडिंग में कोयला लदी रैक खड़ी है, जबकि डंपर, पोकलेन और क्रेन जैसी मशीनें पूरी तरह शांत हैं। समय पर रैक खाली न होने की स्थिति में रेलवे द्वारा भारी डेमरेज (विलंब शुल्क) वसूले जाने की आशंका है। इससे कोयला खरीदारों पर बड़ा आर्थिक बोझ पड़ सकता है।आधी रात को पहुंची पुलिस, आधिकारिक बयान का इंतजारसाइडिंग पर तैनात प्रत्यक्षदर्शी महिला कर्मियों के अनुसार, शनिवार देर रात महिला पुलिस बल के साथ कुछ पुलिसकर्मी वहां पहुंचे और तुरंत काम बंद करने का निर्देश दिया। हालांकि, यह कार्रवाई किस थाने की पुलिस ने की, इसकी अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है। इस पूरे घटनाक्रम पर स्थानीय प्रशासन या रेलवे की ओर से भी अब तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है, जिससे सस्पेंस और गहरा गया है।पूर्व टीएमसी पार्षद और राहुल इंटरप्राइज से जुड़े तारस्थानीय सूत्रों के अनुसार, इस साइडिंग में लोडिंग-अनलोडिंग और ट्रांसपोर्टिंग का ठेका “राहुल इंटरप्राइज एंड कंपनी” के पास है। इस कंपनी का संबंध पूर्व तृणमूल कांग्रेस (TMC) पार्षद रोहित नोनिया के पुत्र राहुल नोनिया से बताया जा रहा है। गौरतलब है कि रोहित नोनिया हाल ही में एक भाजपा कार्यकर्ता के साथ मारपीट के मामले में विवादों में आए थे। इसके अतिरिक्त, कुछ दिनों पहले ही ईसीएल (ECL) ने धेमोमेन स्थित उनके कार्यालय और पेट्रोल पंप पर अतिक्रमण हटाने का नोटिस भी चस्पा किया था।वर्चस्व और इलाके पर दखल की आशंकाराजनीतिक और व्यापारिक गलियारों में चर्चा है कि यह पूरा मामला साइडिंग पर वर्चस्व की लड़ाई या इलाके में राजनीतिक दखल से जुड़ा हो सकता है। पिछले दो दशकों से इस क्षेत्र के कोयला कारोबार में रोहित नोनिया का दबदबा रहा है। इससे पहले भी इस साइडिंग के संचालन को लेकर आसनसोल के एक बड़े संचालक के साथ उनका टकराव हुआ था, जिसमें हिंसक झड़प और गोलीबारी तक की नौबत आ गई थी। बाद में दोनों पक्षों में आपसी समझौता होने के बाद ही राहुल इंटरप्राइज को काम मिला था।भविष्य के फैसले पर टिकी निगाहेंफिलहाल सबसे बड़ा अनुत्तरित सवाल यह है कि आखिर किसके लिखित या मौखिक आदेश पर साइडिंग का काम बंद कराया गया। जब तक प्रशासन या रेलवे प्रबंधन का कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आता, तब तक अटकलों का बाजार गर्म रहेगा। अब देखना यह है कि क्या इस मामले में एक बार फिर पर्दे के पीछे कोई नई संधि होती है, या फिर बाराचक साइडिंग के संचालन की कमान किसी नए गुट या कंपनी के हाथों में सौंप दी जाएगी।










