मेले की भीड़ में बिछड़ा मासूम, बराकर ट्रैफिक पुलिस बनी फरिश्ता! माँ से मिलते ही छलक पड़े खुशी के आँसू
बिनय लाइक की तत्परता ने लौटाई माँ की मुस्कान, बच्चे को सीने से लगाकर फूट-फूटकर रोई माँ; पुलिस के मानवीय चेहरे की हर ओर हो रही सराहना
बराकर। दुर्गापूजा मेले की चकाचौंध और हजारों की भीड़ के बीच एक पल की लापरवाही ने एक माँ की दुनिया उजाड़ देने जैसा भयावह मंजर खड़ा कर दिया। भीड़ में अपनी माँ से बिछड़ा मासूम बच्चा अनजान चेहरों के बीच भटक गया। माँ की आँखों से आँसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे, तो दूसरी ओर बच्चे के लिए हर पल बेचैनी बढ़ती जा रही थी। लेकिन इसी मुश्किल घड़ी में बराकर ट्रैफिक पुलिस ने इंसानियत और कर्तव्यनिष्ठा की ऐसी मिसाल पेश की, जिसने एक बिछड़े परिवार की खुशियाँ लौटा दीं।
ड्यूटी पर तैनात बराकर ट्रैफिक के ओसी बिनय लाइक की नजर जब बच्चे पर पड़ी, तो उन्होंने तत्परता दिखाते हुए उसे सुरक्षित अपने संरक्षण में लिया और उसकी माँ की तलाश शुरू की। पुलिस की कोशिश रंग लाई और आखिरकार मासूम को उसकी माँ से मिला दिया गया। बच्चे को सामने देखते ही माँ खुद को संभाल नहीं सकी। उसने अपने लाल को सीने से लगाया और फूट-फूटकर रो पड़ी। ये आँसू बिछड़ने के दर्द के नहीं, बल्कि अपने बच्चे को सकुशल वापस पाने की राहत और खुशी के थे।
इस भावुक पल ने मौके पर मौजूद लोगों को भी भावुक कर दिया। लोगों ने बराकर ट्रैफिक पुलिस की इस संवेदनशील पहल की जमकर सराहना की।
ओसी बिनय लाइक बोले—माँ के चेहरे पर मुस्कान लाना ही हमारी ड्यूटी की असली खुशी
इस घटना पर बराकर ट्रैफिक ओसी बिनय लाइक ने कहा कि मेले की भीड़ में बच्चे के बिछड़ने का खतरा हमेशा बना रहता है। पुलिस पहले से ही अभिभावकों को जागरूक कर रही थी कि वे बच्चों के हाथ पर अपना मोबाइल नंबर लिखें या मोबाइल नंबर वाला पहचान बैंड पहनाएँ, ताकि बच्चा कहीं बिछड़ जाए तो उसके परिवार से तुरंत संपर्क किया जा सके।
उन्होंने भावुक अंदाज में कहा, “हम बच्चे को उसकी माँ के पास वापस लौटा रहे हैं। उसकी माँ अब तक रो रही है। दिन-रात ड्यूटी करने के बाद अगर हम किसी माँ के चेहरे पर मुस्कान ला सकें, तो इससे बड़ी खुशी हमारे लिए कुछ नहीं है।”
पुलिस की अपील—एक छोटी-सी सावधानी, बच्चे की सुरक्षा में बड़ी मदद
इस घटना के बाद पुलिस ने मेले में आने वाले सभी अभिभावकों से अपील की है कि वे अपने छोटे बच्चों को भीड़ में अकेला न छोड़ें। बच्चों के हाथ पर अपना मोबाइल नंबर लिखें या पहचान बैंड पहनाएँ और उन्हें अपना नाम तथा अभिभावक का मोबाइल नंबर याद कराने का प्रयास करें।
बराकर ट्रैफिक पुलिस की यह पहल एक बार फिर साबित करती है कि वर्दी सिर्फ कानून का पालन कराने के लिए नहीं, बल्कि जरूरत के समय लोगों के चेहरे पर मुस्कान लौटाने के लिए भी है। एक माँ की आँखों में छलकते आँसू और फिर चेहरे पर लौटी मुस्कान ने पुलिस की इस मानवीय सेवा को यादगार बना दिया।








