बर्नपुर । आईएसपी के नन एग्जीक्यूटिव कर्मियों के लिए बने मिड टाउन क्लब की कार्यकारिणी कमेटी का चुनाव 11 अगस्त को है, इससे पहले चुनावी मैदान में उतरे दोनों दलों के उम्मीदवार अपनी-अपनी जीत के लिए लगातार प्रयास कर रहे है. वहीं चुनाव से ठीक एक दिन पूर्व बीएमएस कार्यालय में सवांददाता सम्मेलन कर क्लब को लेकर नई जानकारी दी. मौके पर यूनियन के
संजीत बनर्जी, महेश राय, संजीत प्रसाद, श्रीकांत साह मौजूद रहे. यूनियन नेताओं ने बताया कि बीते वर्ष चुनाव होने वाला था, अचानक चुनाव से पहले कुछ विवाद उत्पन्न हुआ और फिर तय हुआ कि पूरे मामले के जांच के लिए कमेटी बनाई जाए. कमेटी बनी और निर्णय आया कि श्रीकांत साह ने क्लब के नियमों के खिलाफ काम किये, उन्होंने चुनाव से पहले सदस्यता अधिक दिखाई, एजीएम की 14 दिन पूर्व सूचना नहीं दी और क्लब के लेन-देन मैनेजर के निजी अकाउंट में कराया. इस आरोप में श्रीकांत को दोषी बताते हुए सस्पेंड कर दिया गया. जिसे बीएमएस ने गलत निर्णय बताते हुए 2 विषयों पर आरटीआई किया था, जिसका जवाब 10 अगस्त को आया. जिससे साफ जाहिर हो गया कि आरोप साबित नहीं हुआ. ऐसे में सवाल यह उठता है कि जब कोई आरोप सिद्ध नहीं हुआ तो श्रीकांत का निलंबन क्यों? बीएमएस जानना चाहता है कि क्लब गठन के समय ऐसा कोई नियम नहीं था कि क्लब में 250, 400 या उससे अधिक सदस्य नहीं रह सकते. तो फिर 400 से अधिक सदस्य बने तो 389 को मान्य मानकर बाकी की सदस्यता कैसे रद्द की गई? 4 यूनियन के साथ प्रबंधन क्या कानून चला रही है? श्रीकांत ने कहा कि उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान क्लब को कहां से कहां पहुंचाया. इसके जवाब में उन्हें बेबुनियाद आरोप लगाकर क्लब से निलंबित कर दिया गया, जो कि पूरी तरह गलत हैं. उनके ऊपर व्यक्तिगत रूप से हमला किया जा रहा है, उनके साथ संतोष पर दबाव डाला गया, उनपर मामले लादने का प्रयास हुआ, लेकिन वे अड़े रहे और परिणाम स्वरूप झूठे आरोप में फंसा दिया गया. लेकिन भगवान के आशीर्वाद से चुनाव से एक दिन पहले आरटीआई का जवाब आया. उन्होंने कहा कि विरोधियों का षंडयंत्र काम नहीं आया. बीएमएस सच के साथ कर्मियों के हित को ध्यान में रखकर आवाज उठाती रही है, जो अन्य यूनियन को हजम नहीं हो रहा.










