Dastak Jo Pahunchey Har Ghar Tak

Share on facebook
Share on twitter
Share on whatsapp
Share on email

*ईद-उल-अज़हा के मौके पर दरगाह गौसे बंगाला से मुफ्ती मुहम्मद औरंगजेब आलमगीर सादी का पैग़ाम।*

Share on facebook
Share on twitter
Share on whatsapp
Share on email
ASANSOL DASTAK ONLINE DESK

ASANSOL DASTAK ONLINE DESK

  1. ईद उल अजहा अल्लाह की एक नेमत है, इसीलिए इस दिन मुसलमान पहले ईद इदु उल अजहा की नमाज अदा करते हैं, फिर अपने रब के नाम पर उसके करीब आने के लिए एक जानवर की कुर्बानी देते हैं। दुनिया में जितने धर्म हैं सभी धर्म में कुर्बानी करने का अपना-अपना रिवाज है। इस्लाम धर्म में कुर्बानी का बहुत महत्व है और इसके मायने भी बहुत व्यापक हैं। पहली बात तो यह है कि कुर्बानी को इबादत का दर्जा प्राप्त है। इससे एक बात तो साफ हो जाती है कि हर कुर्बानी देने वाले की मंशा अल्लाह की ख़ुशी और तक़वा हासिल करना होता है। और इबादत का इसमें बहुत बड़ा मतलब है, जैसे पाखंड से मुक्त होना, अल्लाह की ख़ुशी तलाश करना और उसे साफ़-सुथरे तरीके से करना, दूसरों के लिए परेशानी पैदा न करना और कुर्बानी का मकसद भी यही है इस्लाम की वही भावना और आस्था की स्थिति और ईश्वर के प्रति प्रेम और वफादारी की वही महिमा जैसा कि हज़रत इब्राहिम और इस्माइल (उन पर शांति) ने प्रदर्शित किया था, अल्लाह के बन्दों को चाहिए कि अपनी इबादत में गलत चीजों को जगह न दे कर सिर्फ़ अल्लाह को खुश करने के लिए काम करें। इबादत में फोटो और वीडियो दिखावा करना बिल्कुल सही नहीं है। आपकी इबादत से किसी का दिल नहीं दुखना चाहिए। चाहे आप के अपने हों या गैर सभों का ख्याल रखते हुए कुर्बानी करें और कुर्बानी से पहले और बाद में खासतौर पर घर, गली, मोहल्ले की सड़कों और नालियों को ज़रूर साफ़ सुथरा रखें, ताकि आपके चरित्र और कार्यों से किसी को नुकसान न पहुंचे। और आपको कष्ट न हो और आपकी इबादत अच्छे से हो।
    नोट। रानीगंज मजार शरीफ में ईद-उल-अजहा की नमाज 6:45 बजे होगी।
    मुफ्ती मुहम्मद औरंगजेब आलमगीर साअदी दरगाह हुजूर गौसे बंगाला रानीगंज बंगाल। 9801150378