“वह स्वप्न नहीं,
सृजन की मूर्त सच्चाई हैं—
विश्वकर्मा,
जिनके हाथों से आकार लेता है ब्रह्मांड।
सत्ययुग से कलियुग तक,
हर युग की धड़कन में बसे हैं,
वह दिव्य शिल्पकार –
भगवान विश्वकर्मा।
स्वर्गलोक की छटा हो,
या सोने की लंका का वैभव,
द्वारका का नगर हो,
या इन्द्रप्रस्थ का वैभव—
हर रचना उनकी ही छाप है।
हथौड़े की टंकार में,
औजारों की चमक में,
मशीनों की धड़कन में
आज भी गूंजता है उनका नाम।
सुदर्शन चक्र की धार,
त्रिशूल का तेज,
वज्र की शक्ति—
सब उनकी ही कला का प्रसाद।
सुनहरी आभा, चार भुजाएँ,
हाथों में शिल्प औज़ार—
सृजन, तकनीक और नवाचार का
जीवित प्रतीक हैं वे।”
“जय विश्वकर्मा देव की जय !!”
*“विश्वकर्मा पूजा के पावन अवसर पर आप सभी को तहे दिल से हार्दिक शुभकामनाएं।”*
✍️ “सुशील कुमार सुमन”
अध्यक्ष, आईओए
सेल आईएसपी, बर्नपुर
*#सुशीलकुमारसुमन*
*#युवा*
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