67 वर्षों की गौरवशाली परंपरा का आगाज! बराकर में कलश स्थापना के साथ गूंजा गरबा-डांडिया का उल्लास
रंग-बिरंगे परिधानों में सजे समाज के लोग, मां दुर्गा की आराधना में झूम उठा गुजराती समाज; बराकर में नवरात्र उत्सव का भव्य शुभारंभ
बराकर। मां दुर्गा की आराधना, पारंपरिक गरबा-डांडिया की थाप और रंग-बिरंगे परिधानों की छटा के बीच बराकर में गुजराती समाज का 67वां गरवा-डांडिया नवरात्र उत्सव भव्य रूप से प्रारंभ हुआ। बराकर चेकपोस्ट स्थित गुजराती समाज के प्रांगण में प्रथम नवरात्र के पावन अवसर पर विधि-विधान के साथ कलश स्थापना कर उत्सव का शुभारंभ किया गया। इस दौरान पूरा परिसर भक्तिमय माहौल और उत्साह से सराबोर नजर आया।

गुजराती समाज बराकर की ओर से आयोजित इस पारंपरिक उत्सव में समाज के लोगों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। कार्यक्रम के मुख्य यजमान भावेश भाई जयंती भाई पटेल रहे। कलश स्थापना के साथ मां दुर्गा की आराधना की गई और इसके बाद पारंपरिक गरबा-डांडिया रास की मनमोहक प्रस्तुतियों ने आयोजन में चार चांद लगा दिए।
67 वर्षों से जीवंत है परंपरा, नई पीढ़ी भी निभा रही विरासत
बराकर का गुजराती समाज पिछले 67 वर्षों से अपनी सांस्कृतिक विरासत और पौराणिक परंपराओं को संजोकर नवरात्र उत्सव मनाता आ रहा है। यह आयोजन केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं, बल्कि समाज की एकता, संस्कृति और पीढ़ियों से चली आ रही परंपरा को जीवंत रखने का भी महत्वपूर्ण माध्यम है।
नवरात्र के दौरान प्रतिदिन समाज के बुजुर्ग, युवक-युवतियां, महिलाएं और बच्चे पारंपरिक वेशभूषा में सजकर मां दुर्गा के दरबार में पहुंचते हैं। ढोल की थाप और डांडिया की खनक के बीच पारंपरिक गरबा नृत्य प्रस्तुत कर मां की आराधना की जाती है। रंग-बिरंगे परिधानों में सजे प्रतिभागियों का उत्साह देखते ही बनता है।
बराकर से मैथन तक छाई गरबा उत्सव की धूम
इस भव्य आयोजन को देखने और इसमें शामिल होने के लिए बराकर के अलावा कुल्टी, चिरकुंडा, नियामतपुर, निरसा और मैथन सहित आसपास के विभिन्न क्षेत्रों से समाज के लोग तथा स्थानीय निवासी पहुंचते हैं। हर वर्ष की तरह इस बार भी उत्सव को लेकर लोगों में खासा उत्साह देखा जा रहा है। धार्मिक आस्था के साथ सांस्कृतिक मेलजोल का यह आयोजन क्षेत्र में आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।
कार्यक्रम को सफल बनाने में गुजराती समाज बराकर के अध्यक्ष नानजी भाई पटेल, सचिव जयंती भाई पटेल, ईश्वर भाई पटेल, आश्विन चौटालिया, किरण मेहता, आशीष पटेल, चेतन पटेल, राजेश पटेल, भावेश पटेल, चिराग पटेल, हीत पटेल, मनीष पटेल, कुंज चौटालिया सहित समाज के युवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
बराकर का 67वां गरवा-डांडिया उत्सव एक बार फिर इस बात का संदेश दे रहा है कि परंपराएं तभी जीवंत रहती हैं, जब नई पीढ़ी उन्हें पूरे उत्साह, श्रद्धा और गर्व के साथ आगे बढ़ाती है।








