*“माँ दुर्गा के नवस्वरूपों की महिमा !”‘*
*“या देवी सर्वभूतेषु शक्ति रूपेण संस्थिता,*
*नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः”*
*“आप सभी को शारदीय नवरात्रि के पावन पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं।..”*

“शारदीय नवरात्र का पर्व प्रारंभ हो चुका था। हर घर में माँ दुर्गा के नवस्वरूपों की पूजा-अर्चना की तैयारियाँ जोरों पर थीं। दीपों की जगमगाहट, मंत्रों की गूंज, और चारों ओर जयकारों की ध्वनि ने पूरे वातावरण को पवित्र कर दिया था। इस बार पश्चिम बंगाल के छोटे से गाँव बारोवारी के मंदिर में, जहाँ हर साल नवरात्र का उत्सव धूमधाम से मनाया जाता था, एक विशेष आयोजन रखा गया था।
गाँव में एक साधारण परिवार रहता था जिसमें माता-पिता और उनकी बेटी रूपमती थी। रूपमती बचपन से ही धार्मिक प्रवृत्ति की थी और माँ दुर्गा की परम भक्त थी। हर साल वह पूरे श्रद्धा भाव से नौ दिनों तक व्रत रखती और सभी विधि-विधान से पूजा करती। इस बार भी वह अपनी माँ के साथ मंदिर गई, जहाँ गाँव के सभी लोग माँ दुर्गा की पूजा में सम्मिलित हुए थे।
रूपमती के मन में हमेशा माँ दुर्गा के नवस्वरूपों की महिमा को जानने की जिज्ञासा रहती थी। उसने अपनी माँ से पूछा, “माँ, क्या आप मुझे माँ दुर्गा के इन नवस्वरूपों के बारे में विस्तार से बताएंगी? मैंने उनके नाम तो सुने हैं, पर उनके पीछे की कथा नहीं जानती।”
रूपमती की माँ ने उसे पास बिठाकर मुस्कराते हुए कहा, “बेटी, माँ दुर्गा के ये नौ रूप केवल देवी के रूप नहीं हैं, बल्कि ये संसार के कल्याण और हमारी रक्षा के लिए प्रकट हुए हैं। हर स्वरूप का अपना विशेष महत्व है।”
माँ ने धीरे-धीरे कथा आरंभ की:
1. प्रथमं शैलपुत्री – माँ शैलपुत्री, हिमालय की पुत्री हैं। यह स्वरूप पर्वतों की दृढ़ता और साहस का प्रतीक है। इनसे हमें सीख मिलती है कि हमें जीवन की कठिनाइयों का धैर्यपूर्वक सामना करना चाहिए।
2. द्वितीयं ब्रह्मचारिणी – माँ ब्रह्मचारिणी, तपस्या की देवी हैं। उन्होंने कठोर तपस्या से यह सिद्ध किया कि जीवन में धैर्य और संयम से हर बाधा को पार किया जा सकता है।
3. तृतीयं चन्द्रघण्टा – माँ चन्द्रघण्टा, उनके मस्तक पर अर्धचंद्र है। वे साहस और शक्ति की प्रतीक हैं और अन्याय के विरुद्ध खड़े होने की प्रेरणा देती हैं।
4. चतुर्थं कूष्माण्डा – माँ कूष्माण्डा सृष्टि की रचयिता हैं। इनकी मुस्कान से ब्रह्मांड का निर्माण हुआ। ये हमें सृजनशीलता और सकारात्मक दृष्टिकोण का पाठ पढ़ाती हैं।
5. पंचमं स्कन्दमाता – माँ स्कन्दमाता, भगवान कार्तिकेय की माता हैं। वे मातृत्व, प्रेम और वात्सल्य की प्रतिमूर्ति हैं और सेवा का महत्व सिखाती हैं।
6. षष्ठं कात्यायनी – माँ कात्यायनी, जिन्हें महिषासुर मर्दिनी भी कहा जाता है, शक्ति और न्याय की देवी हैं। ये स्वरूप हमें बताता है कि धर्म की रक्षा के लिए शक्ति का उचित उपयोग आवश्यक है।
7. सप्तमं कालरात्री – माँ कालरात्री, अज्ञान और अंधकार का नाश करने वाली हैं। ये भय और अज्ञानता से लड़ने का साहस देती हैं।
8. अष्टमं महागौरी – माँ महागौरी, शांति और पवित्रता की प्रतीक हैं। ये हमें आंतरिक और बाह्य शुद्धता का महत्व सिखाती हैं।
9. नवमं सिद्धिदात्री – माँ सिद्धिदात्री, सभी सिद्धियों की दात्री हैं। वे हमें सिखाती हैं कि सच्ची भक्ति और समर्पण से जीवन में हर सफलता संभव है।
रूपमती अपनी माँ की बातें ध्यान से सुन रही थी और उसे महसूस हुआ कि माँ के ये नवस्वरूप केवल पूजा के लिए ही नहीं हैं, बल्कि वे जीवन के हर पहलू में मार्गदर्शन और प्रेरणा प्रदान करते हैं।
अंत में उसकी माँ ने उसे आशीर्वाद देते हुए कहा, “बेटी, माँ दुर्गा की उपासना केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, यह हमें जीवन की सच्चाई, धैर्य, साहस, और सत्य की राह पर चलने की प्रेरणा देती है। माँ दुर्गा हमें शक्ति और सामर्थ्य दें ताकि हम जीवन की हर चुनौती का सामना कर सकें।”
रूपमती ने माँ दुर्गा की प्रतिमा के समक्ष सिर झुकाया और मन ही मन प्रार्थना की कि उसे भी माँ की तरह शक्ति और साहस मिले ताकि वह अपने जीवन की हर कठिनाई को पार कर सके।
नवरात्र का यह पर्व रूपमती के जीवन में एक नया अध्याय बनकर आया, जिसमें उसने माँ के नवस्वरूपों की महिमा को आत्मसात किया और उन्हें अपने जीवन में उतारने का संकल्प लिया।*
*“सर्व मंगलं मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके।*
*शरण्ये त्र्यंबके गौरी नारायणी नमोस्तुते॥”*
पूरे परिवार ने मिलकर माँ दुर्गा की आरती की और सभी के कल्याण की कामना की।
*माँ दुर्गा की कृपा से आपका जीवन सुख, समृद्धि और शांति से भरा रहे।*
*नवरात्रि के इन नौ दिनों में माँ शक्ति का आशीर्वाद आप सभी पर बना रहे।*
*जय माता दी!*
✨🙏✨
✍️ “सुशील कुमार सुमन”
अध्यक्ष, आईओए
सेल आईएसपी, बर्नपुर
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