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*”सपने देखना ज़रूरी है!”*

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ASANSOL DASTAK ONLINE DESK

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*“सपने देखना ज़रूरी है!”*

*नोट:*
*इस वर्ष IOA मैराथन केवल ISP के अधिकारियों एवं उनके परिवारजनों के लिए आयोजित की जा रही है।*

*मेरे बाबूजी* हमेशा कहा करते थे,
““बड़ा सपना देखो और पूरी निष्ठा व समर्पण के साथ उसके लिए काम करते रहो — एक दिन तुम्हारा सपना अवश्य पूरा होगा।”*

*जिस दिन मैं IOA का अध्यक्ष बना”, उसी दिन से मेरे मन में एक सपना था — कि IOA अपना स्वयं का मैराथन आयोजित करे। मैंने इस विषय पर हमारे IOA के महासचिव से कई बार चर्चा की, लेकिन उस समय हम किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुँच सके।
बाद में जब *मैं बर्नपुर क्लब का मानद सचिव बना,* तब मैंने खेल गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए पुनः इस विषय पर पहल की। किन्तु *क्लब की व्यस्त कार्यसूची* के कारण उस समय भी यह विचार साकार नहीं हो सका।

*लेकिन जब इरादे मजबूत हों, तो सपने कभी फीके नहीं पड़ते।*
IOA की एक समर्पित बैठक और सामूहिक प्रयासों के बाद, आज हमारा सच्चा प्रयास आपके सामने है — *IOA मैराथन!*

*मैं आप सभी को सपरिवार इस विशेष आयोजन में सम्मिलित होने हेतु हार्दिक आमंत्रण देता हूँ।*
*आप और आपके प्रियजनों का तहे दिल से स्वागत है।*

हमारी टीम ने इस कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए *अत्यंत परिश्रम और समर्पण* के साथ कार्य किया है। हमें विश्वास है कि आप इसका आनंद लेंगे और इसे सराहेंगे।

*आपके निरंतर सहयोग और समर्थन के लिए हृदय से धन्यवाद।*
सादर,
*सुशील कुमार सुमन*
अध्यक्ष, IOA