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*“भरोसा: एक भाग्य विधाता”*

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ASANSOL DASTAK ONLINE DESK

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*“भरोसा: एक भाग्य विधाता”*

कल जब भारत ने टी-20 क्रिकेट वर्ल्ड कप 2026 का खिताब जीता, तो यह जीत केवल एक ट्रॉफी नहीं थी—यह उस अदृश्य शक्ति की जीत थी जिसका नाम है “भरोसा”। सच ही कहा गया है कि कई बार भाग्य भी उसी का साथ देता है, जिस पर भरोसा किया जाता है। इस पूरे टूर्नामेंट ने हमें यह सिखाया कि भरोसा ही असली भाग्य विधाता होता है।

टूर्नामेंट की शुरुआत में ही भारतीय टीम ने अपने इरादे साफ कर दिए थे। लीग चरण में हमने चारों मैच जीते और ग्रुप-A में शीर्ष स्थान प्राप्त किया। लेकिन इस शानदार शुरुआत के पीछे भी संघर्ष की कहानी छिपी थी।

लगातार तीन मैचों में अभिषेक शर्मा गोल्डन डक पर आउट हो गए। सुपर-8 में भी उनका बल्ला कुछ खास नहीं चला, और सेमीफाइनल में इंग्लैंड के खिलाफ भी वे सस्ते में आउट हो गए। चारों ओर से आवाज उठने लगी—“उन्हें टीम से बाहर करो।” लेकिन टीम मैनेजमेंट ने हार नहीं मानी। उन्होंने अभिषेक पर भरोसा बनाए रखा। और यही भरोसा अंततः भाग्य का निर्माता बन गया। फाइनल में अभिषेक शर्मा ने शानदार बल्लेबाजी कर आलोचकों को जवाब दे दिया।

इसी बीच एक दुखद घटना घटी। रिंकू सिंह के पिता की तबीयत बहुत गंभीर हो गई और फिर उनका निधन हो गया। टीम ने परिस्थिति को समझते हुए उन्हें आराम दिया और सूर्यकुमार यादव की कप्तानी में संजू सैमसन को मौका मिला। इसके बाद जो हुआ, वह भारतीय क्रिकेट इतिहास का स्वर्णिम अध्याय बन गया।संजू सैमसन ने लगातार तीन पारियों में 97, 89 और 89 रन बनाकर विपक्षी टीमों के गेंदबाजों को झकझोर दिया। उनकी बल्लेबाजी ने पूरे टूर्नामेंट की दिशा बदल दी। आज भारत की यह विश्वविजेता टीम उनके योगदान के बिना अधूरी होती। संजू सैमसन सचमुच इस विश्व कप के अमर नायक बन गए।

इस टूर्नामेंट में कई ऐसे खिलाड़ी भी थे जिनकी भूमिका शांत लेकिन बेहद महत्वपूर्ण रही। ईशान किशन, जो प्रारंभ में विश्व कप टीम में शामिल नहीं थे, उन्हें मौका तब मिला जब उन्होंने झारखंड की कप्तानी करते हुए सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी 2025 जिताई। उनके प्रदर्शन ने चयनकर्ताओं को विश्वास दिलाया और वे टीम का हिस्सा बने।

शिवम दुबे जैसे शांत और मेहनती खिलाड़ी भी लगातार टीम के लिए योगदान देते रहे।वहीं वरुण चक्रवर्ती और तिलक वर्मा ने भी कई मौकों पर मैच का रुख बदल दिया। वरुण को विकेट तो मिलते रहे, भले ही कभी-कभी एक-दो ओवरों में रन ज्यादा चले गए। तिलक वर्मा ने सेमीफाइनल में सिर्फ 7 गेंदों में 21 रन बनाकर मैच का रुख पलट दिया। यह भी उस भरोसे का परिणाम था जो टीम ने अपने खिलाड़ियों पर रखा।

लेकिन अगर इस टूर्नामेंट में किसी ने “भरोसा” शब्द को सबसे ऊँचाई दी, तो वह थे जसप्रीत बुमराह और अक्षर पटेल।बुमराह की घातक गेंदबाजी और अक्षर पटेल की शानदार गेंदबाजी व फील्डिंग ने कई मैचों में भारत को मुश्किल परिस्थितियों से बाहर निकाला। इन दोनों खिलाड़ियों ने साबित किया कि जब प्रतिभा और भरोसा साथ आते हैं, तो भाग्य स्वयं रास्ता बनाता है।

एक समय ऐसा भी लगा कि इस बार “भरोसा: एक भाग्य विधाता” दक्षिण अफ्रीका के साथ है। पूरे टूर्नामेंट में भारत सिर्फ एक टीम से हारा—और वह टीम थी दक्षिण अफ्रीका। लेकिन सेमीफाइनल और फाइनल के बाद तस्वीर बदल गई। आज दक्षिण अफ्रीका को भी संतोष होगा कि विश्व चैंपियन भारत उस टीम से हार चुका है—अर्थात उन्होंने भी चैंपियन को चुनौती दी थी।

यह विश्व कप हमें यह सिखाता है कि जीत केवल प्रतिभा से नहीं आती, बल्कि विश्वास, धैर्य और टीम भावना से आती है। जब किसी खिलाड़ी पर भरोसा किया जाता है, तो वही भरोसा कभी-कभी भाग्य को भी बदल देता है।

आज पूरा देश इस ऐतिहासिक जीत का जश्न मना रहा है। यह केवल खिलाड़ियों की जीत नहीं, बल्कि पूरे भारत के विश्वास और सपनों की जीत है।
“*आप सभी को इस शानदार विजय की हार्दिक शुभकामनाएँ और ढेर सारी बधाइयाँ।”*
जय हिंद!
जय भारत!

✍️ सुशील कुमार सुमन
अध्यक्ष, आईओ
सेल आईएसपी, बर्नपुर
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