*“राम सभी युगों में श्रेष्ठ हैं !”*
“जब भी हम भारतीय संस्कृति, सभ्यता और इतिहास पर विचार करते हैं, तो एक नाम सबसे पहले उभरकर आता है — श्रीराम। वे केवल एक राजा या एक देवता नहीं, बल्कि आदर्श मानव, मर्यादा पुरुषोत्तम, और एक ऐसे शासन के प्रतीक हैं, जिसकी कल्पना हर युग में की जाती रही है — *रामराज्य।*
यह सम्पादकीय इस बात पर केंद्रित है कि क्यों भगवान श्रीराम सभी अवतारों में श्रेष्ठ हैं, क्यों राम का शासन (रामयुग) विश्व के हर युग और सभ्यता की तुलना में सर्वोत्तम रहा है, और आज के युग में भी क्यों रामराज्य की आवश्यकता है।
1. *“सभी अवतारों में भगवान राम क्यों श्रेष्ठ हैं ?”*
भगवान विष्णु ने समय-समय पर अनेक अवतार लिए — मत्स्य, कूर्म, वराह, नरसिंह, वामन, परशुराम, कृष्ण और कल्कि। परंतु श्रीराम इन सबमें मर्यादा, धर्म, त्याग और आदर्श जीवन के प्रतीक हैं।
श्रीराम का जीवन किसी चमत्कार या ‘लीला’ पर आधारित नहीं, बल्कि मर्यादा, संयम और कर्तव्य पर आधारित है। उन्होंने राज-पाट का त्याग किया, वनवास सहा, पत्नी के लिए युद्ध किया, और न्याय के लिए अपने निजी सुखों की बलि दी। वे एक आदर्श पुत्र, आदर्श पति, आदर्श भाई, और आदर्श राजा रहे।
2. *“रामयुग — सभी शासनकालों में श्रेष्ठ क्यों ?”*
इतिहास में अनेक शासनकाल हुए, परंतु रामराज्य जैसा न्यायप्रिय, सुखी, समतामूलक और धर्मप्रधान शासन कहीं नहीं मिलता।
-अशोक का शासन: धर्म प्रचारक था, पर युद्धों के बाद पश्चाताप से भरा हुआ।
-समुद्रगुप्त का शासन: सांस्कृतिक रूप से समृद्ध, परंतु विस्तारवादी नीति से प्रेरित।
-मुगल शासन: कला और स्थापत्य का विकास हुआ, परंतु धार्मिक असहिष्णुता और युद्धों से भरा।
-यूनानी सभ्यता: दर्शन और लोकतंत्र का जनक, परंतु आत्मिक शांति का अभाव।
-हूण, तुर्क, मंगोल आक्रमण: केवल विध्वंस और लूटपाट।
रामराज्य में न्याय था, समानता थी, प्रकृति के साथ संतुलन था, और कोई दुःखी नहीं था — यह एक आदर्श राज्य का प्रतीक था।
3. *“आदिकाल में भी रामयुग श्रेष्ठ”*
आदिकालीन समाजों में भी राम के आदर्शों की छाया थी। सामाजिक न्याय, सामूहिक हित, और प्रकृति के साथ संतुलन – ये सभी रामराज्य के मूल्य थे। वनवासी समाजों में श्रीराम का विशेष स्थान रहा, जो आज भी जनजातीय परंपराओं में जीवित है।
*“ऐतिहासिक दृष्टिकोण से रामयुग की श्रेष्ठता”*
इतिहास में जब-जब कोई राजा या नेता आया, तो उसने रामराज्य की कल्पना को आदर्श माना। विक्रमादित्य, हर्यश, शिवाजी, और यहां तक कि ब्रिटिश काल में महात्मा गांधी ने भी रामराज्य को भारत के आदर्श शासन के रूप में प्रस्तुत किया।
5. *“आज के संदर्भ में राम क्यों श्रेष्ठ हैं”*
आज का युग तकनीक, सामाजिक विघटन, नैतिक संकट और पर्यावरणीय संकटों का युग है। श्रीराम की शिक्षाएँ आज और भी प्रासंगिक हो गई हैं:
-व्यक्तिगत जीवन में संयम और मर्यादा
-सार्वजनिक जीवन में न्याय, सेवा और कर्तव्य
-पारिवारिक जीवन में सम्मान और सहयोग
-राष्ट्र के लिए त्याग और नेतृत्व
6. *“भारतीय संविधान और रामराज्य की छाया”*
हमारा संविधान एक धर्मनिरपेक्ष दस्तावेज है, परंतु उसकी आत्मा में रामराज्य की गूंज है:
-समानता का अधिकार (राम ने शबरी, निषादराज को गले लगाया)
-अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता (एक धोबी की बात को भी राजा ने गंभीरता से लिया)
-सामाजिक न्याय (हर वर्ग के कल्याण का प्रयास)
-धर्म और आस्था की स्वतंत्रता (राम स्वयं विभिन्न ऋषियों और संस्कृतियों का सम्मान करते थे)
7. *“महात्मा गांधी की दृष्टि में रामराज्य”*
गांधी जी के लिए रामराज्य किसी धार्मिक विचार नहीं था, बल्कि एक नैतिक और आत्मिक राज्य था। वे कहते थे: “रामराज्य का अर्थ है जनहित, न्याय और धर्म की स्थापना।”
स्वराज की कल्पना उन्होने रामराज्य के रूप में की, जिसमें सबसे अंतिम व्यक्ति की भी गरिमा सुरक्षित हो।
8. *“भविष्य की दृष्टि: क्या रामराज्य AI युग में भी प्रासंगिक है?”*
AI, मशीन लर्निंग, और तकनीकी युग में भी मानवता का मूल भाव आवश्यक है। मशीनें निर्णय ले सकती हैं, परंतु करुणा, न्याय और सहिष्णुता नहीं समझ सकतीं। यदि इस तकनीकी युग को मानवीय बनाना है, तो रामराज्य की मूल भावना को पुनः स्थापित करना होगा।
-न्याय आधारित शासन
-पारदर्शिता और उत्तरदायित्व
-पर्यावरणीय संतुलन
-करुणा और सेवा भाव
*“राम — युगों के आराध्य और पथप्रदर्शक”*
राम केवल त्रेतायुग के राजा नहीं थे, वे युगों के प्रतीक हैं। आदिकाल से आज तक, और भविष्य में भी, यदि कोई समाज नैतिक मूल्यों, न्याय, और करुणा से प्रेरित राज्य की कल्पना करता है, *तो वह रामराज्य ही है।*
राम सभी युगों में श्रेष्ठ हैं — क्योंकि वे केवल ईश्वर नहीं, मानवता की उच्चतम अभिव्यक्ति हैं।
आइए, हम सब मिलकर राम के सिद्धांतों को जीवन में उतारें — यही सच्चा रामराज्य है।
*“जय श्रीराम!”*
*✍️ सुशील कुमार सुमन*
अध्यक्ष, आईओए
सेल आईएसपी, बर्नपुर
#सुशीलकुमारसुमन
*#युवा*










