*“योग : मानवता को भारत का शाश्वत उपहार”*
(स्वास्थ्य, सामंजस्य और उच्च चेतना की ओर एक दिव्य यात्रा)
✍️ सुशील कुमार सुमन
अध्यक्ष, IISCO ऑफिसर्स एसोसिएशन (IOA)
*“योगः कर्मसु कौशलम्।”*
— श्रीमद्भगवद्गीता
वर्तमान युग विज्ञान, तकनीक, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और तीव्र प्रतिस्पर्धा का युग है। मानव ने अभूतपूर्व भौतिक प्रगति प्राप्त की है, परन्तु इसके साथ-साथ तनाव, अवसाद, उच्च रक्तचाप, मधुमेह, हृदय रोग, अनिद्रा और मानसिक अशांति जैसी समस्याएँ भी तेजी से बढ़ी हैं। आधुनिक जीवन की आपाधापी में मनुष्य बाहरी सुख-सुविधाओं के बीच भी आंतरिक शांति और संतुलन की खोज में भटक रहा है।
ऐसे समय में योग मानवता के लिए आशा की किरण बनकर उभरता है। योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं है, बल्कि शरीर, मन, बुद्धि और आत्मा के बीच सामंजस्य स्थापित करने वाली एक संपूर्ण जीवन-पद्धति है। यह भारत की हजारों वर्षों पुरानी आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत है, जिसने आज सम्पूर्ण विश्व को स्वास्थ्य, शांति और सद्भाव का मार्ग दिखाया है।
*“योग का अर्थ और उद्भव”*
“योग” शब्द संस्कृत धातु ‘युज्’ से बना है, जिसका अर्थ है— जोड़ना या एकीकृत करना। योग का तात्पर्य व्यक्ति की चेतना का परम चेतना से मिलन है।
योग का इतिहास लगभग पाँच हजार वर्षों से भी अधिक पुराना माना जाता है। इसके मूल वेदों, उपनिषदों, भगवद्गीता और अनेक प्राचीन ग्रंथों में विद्यमान हैं। किंतु योग को व्यवस्थित एवं वैज्ञानिक स्वरूप प्रदान करने का श्रेय महान ऋषि महर्षि पतंजलि को जाता है।
उन्होंने अपने प्रसिद्ध योगसूत्र में कहा—
*“योगश्चित्तवृत्ति निरोधः”*
अर्थात् मन की चंचल वृत्तियों का निरोध ही योग है।
यह परिभाषा आज भी उतनी ही प्रासंगिक है जितनी हजारों वर्ष पूर्व थी।
*“भारत : योग की पावन भूमि”*
भारत प्राचीन काल से ही आध्यात्मिक ज्ञान और ऋषि परम्परा का केंद्र रहा है। हिमालय की कंदराओं, आश्रमों और तपोवनों में ऋषि-मुनियों ने योग के माध्यम से आत्मबोध एवं ब्रह्मज्ञान की अनुभूति प्राप्त की।
योग भारत की उस महान संस्कृति का प्रतीक है, जो सम्पूर्ण विश्व को “वसुधैव कुटुम्बकम्” का संदेश देती है।
*“महर्षि पतंजलि : योग के महान वैज्ञानिक”*
महर्षि पतंजलि को “योग का जनक” कहा जाता है। उन्होंने योग को अष्टांग रूप में व्यवस्थित किया, जो मानव जीवन के सर्वांगीण विकास का मार्ग प्रशस्त करता है।
उनके अनुसार योग के आठ अंग हैं—
यम
नियम
आसन
प्राणायाम
प्रत्याहार
धारणा
ध्यान
समाधि
ये आठों अंग मनुष्य को शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक पूर्णता की ओर ले जाते हैं।
*“स्वामी विवेकानन्द : योग के विश्वदूत”*
यदि आधुनिक युग में किसी महापुरुष ने योग और भारतीय अध्यात्म को विश्व मंच पर प्रतिष्ठित किया, तो वे थे स्वामी विवेकानन्द।
1893 में शिकागो के विश्व धर्म सम्मेलन में उन्होंने भारतीय संस्कृति और योग के संदेश से समस्त विश्व को प्रभावित किया।
उनका प्रसिद्ध कथन है—
“प्रत्येक आत्मा दिव्य है। इस दिव्यता को प्रकट करना ही जीवन का लक्ष्य है।”
उन्होंने कर्मयोग, राजयोग, भक्तियोग और ज्ञानयोग के माध्यम से मानव जीवन को उत्कृष्ट बनाने का मार्ग बताया।
*“परमहंस योगानन्द : पश्चिम में योग के अग्रदूत”*
महान योगी परमहंस योगानन्द ने अमेरिका और यूरोप में योग तथा ध्यान का प्रचार-प्रसार किया।
उनकी विश्वविख्यात पुस्तक “योगी कथामृत” (Autobiography of a Yogi) ने लाखों लोगों को भारतीय अध्यात्म और योग की ओर आकर्षित किया।
*“श्री अरविन्द : समग्र योग के प्रवर्तक”*
महर्षि श्री अरविन्द ने “समग्र योग” का सिद्धांत प्रतिपादित किया। उनका मानना था कि योग केवल व्यक्तिगत मुक्ति का साधन नहीं, बल्कि सम्पूर्ण मानवता के उत्कर्ष का माध्यम है।
बी.के.एस. अयंगर : आधुनिक योग के महान आचार्य
योगाचार्य बी.के.एस. अयंगर ने योग को वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक स्वरूप प्रदान किया।
उनकी शिक्षाओं के कारण आज विश्व के करोड़ों लोग योगाभ्यास कर रहे हैं।
*“प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस”*
वर्ष 2014 में भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के प्रयासों से संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस घोषित किया।
यह प्रस्ताव रिकॉर्ड समय में 177 देशों के समर्थन से पारित हुआ।
प्रधानमंत्री श्री मोदी ने कहा था—
“योग भारत की प्राचीन परंपरा का अमूल्य उपहार है। यह मन और शरीर, विचार और कर्म तथा प्रकृति और मानव के बीच सामंजस्य स्थापित करता है।”
आज 190 से अधिक देशों में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस उत्साहपूर्वक मनाया जाता है।
*“योग के वैज्ञानिक लाभ”*
आधुनिक चिकित्सा विज्ञान ने भी योग के असंख्य लाभों को स्वीकार किया है।
शारीरिक लाभ
योग—
शरीर को लचीला बनाता है।
रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है।
रक्तचाप नियंत्रित करता है।
मधुमेह को नियंत्रित करने में सहायक है।
हृदय को स्वस्थ रखता है।
मोटापे को कम करता है।
पाचन शक्ति को बढ़ाता है।
शरीर में ऊर्जा एवं स्फूर्ति प्रदान करता है।
*“मानसिक लाभ”*
योग—
तनाव और चिंता को कम करता है।
स्मरण शक्ति बढ़ाता है।
एकाग्रता में वृद्धि करता है।
अवसाद से बचाव करता है।
आत्मविश्वास बढ़ाता है।
सकारात्मक सोच विकसित करता है।
*“आध्यात्मिक लाभ”*
योग—
आत्मज्ञान की ओर प्रेरित करता है।
मन में शांति एवं संतुलन स्थापित करता है।
करुणा और सहिष्णुता का विकास करता है।
जीवन को उद्देश्यपूर्ण बनाता है।
योग और आधुनिक जीवनशैली की बीमारियाँ
आज मानव अनेक जीवनशैली संबंधी रोगों से जूझ रहा है—
मधुमेह
उच्च रक्तचाप
मोटापा
तनाव
अवसाद
हृदय रोग
अनिद्रा
योग इन सभी समस्याओं का प्राकृतिक समाधान प्रस्तुत करता है।
विशेष रूप से
सूर्य नमस्कार
अनुलोम-विलोम
कपालभाति
भ्रामरी
ध्यान
भुजंगासन
वज्रासन
स्वास्थ्य सुधार में अत्यंत लाभकारी सिद्ध हुए हैं।
*“विश्व की महान विभूतियाँ और योग”*
योग ने विश्व के अनेक महान व्यक्तित्वों को प्रभावित किया है।
*दलाई लामा*
वे करुणा, ध्यान और आंतरिक शांति के संदेशवाहक हैं।
उनका कथन है—
“सुख कोई तैयार वस्तु नहीं है, यह आपके कर्मों से उत्पन्न होता है।”
*स्टीव जॉब्स*
एप्पल कंपनी के सह-संस्थापक स्टीव जॉब्स भारतीय दर्शन और ध्यान से अत्यंत प्रभावित थे।
भारत यात्रा ने उनके जीवन और रचनात्मकता को नई दिशा दी।
*ओपरा विन्फ्रे*
विश्व प्रसिद्ध मीडिया व्यक्तित्व ओपरा विन्फ्रे ध्यान और योग को मानसिक स्वास्थ्य के लिए अत्यंत आवश्यक मानती हैं।
*नोवाक जोकोविच*
विश्वविख्यात टेनिस खिलाड़ी नोवाक जोकोविच अपनी सफलता का श्रेय योग और ध्यान को देते हैं।
*लुईस हैमिल्टन*
फॉर्मूला-1 विश्व चैम्पियन लुईस हैमिल्टन नियमित रूप से योगाभ्यास करते हैं।
*क्रिस्टियानो रोनाल्डो*
विश्व प्रसिद्ध फुटबॉलर रोनाल्डो अपनी फिटनेस और लचीलेपन के लिए योग को अत्यंत महत्वपूर्ण मानते हैं।
*महात्मा गांधी और योग*
महात्मा गांधी का सम्पूर्ण जीवन संयम, आत्मानुशासन और सत्य पर आधारित था, जो योग के मूल सिद्धांत हैं।
उनका मानना था कि—
“स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मन का निवास होता है।”
*डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम*
भारत रत्न डॉ. कलाम अनुशासित जीवन और ध्यान के महत्व पर बल देते थे।
उनका कथन था—
“महान सपने देखने वालों के महान सपने सदैव पूरे होते हैं।”
योग ऐसे ही महान सपनों को साकार करने की ऊर्जा प्रदान करता है।
*“युवाओं के लिए योग का महत्व”*
आज के युवा सोशल मीडिया, प्रतिस्पर्धा और मानसिक दबाव से जूझ रहे हैं।
योग युवाओं में—
आत्मविश्वास,
अनुशासन,
नेतृत्व क्षमता,
सकारात्मक दृष्टिकोण,
एकाग्रता,
भावनात्मक संतुलन
का विकास करता है।
विद्यालयों और महाविद्यालयों में योग शिक्षा को बढ़ावा दिया जाना चाहिए।
*“कार्यस्थल और योग”*
आज इंजीनियर, चिकित्सक, शिक्षक, प्रशासक तथा कॉर्पोरेट अधिकारी अत्यधिक तनावपूर्ण जीवन जी रहे हैं।
नियमित योगाभ्यास—
कार्यक्षमता बढ़ाता है,
निर्णय क्षमता को मजबूत करता है,
मानसिक थकान कम करता है,
नेतृत्व क्षमता विकसित करता है,
कार्य और जीवन में संतुलन स्थापित करता है।
स्वस्थ कर्मचारी ही स्वस्थ संगठन का निर्माण करते हैं और स्वस्थ संगठन ही मजबूत राष्ट्र का आधार बनते हैं।
*“विश्व शांति का मार्ग : योग”*
आज विश्व युद्ध, हिंसा, आतंकवाद और पर्यावरणीय संकट जैसी चुनौतियों से घिरा हुआ है।
योग हमें सिखाता है—
प्रेम,
करुणा,
सहिष्णुता,
भाईचारा,
प्रकृति के प्रति सम्मान।
योग हमें “वसुधैव कुटुम्बकम्” की भावना से जोड़ता है।
योग किसी धर्म का नहीं, सम्पूर्ण मानवता का है
योग न तो किसी एक धर्म का है और न ही किसी एक देश का।
यह सम्पूर्ण मानव जाति की धरोहर है।
यह स्वस्थ जीवन का विज्ञान तथा वैश्विक सद्भाव का दर्शन है।
इसी कारण आज विश्व के सभी धर्मों, संस्कृतियों और देशों के लोग योग को अपना रहे हैं।
आज जब सम्पूर्ण विश्व तनाव, अशांति और असंतुलन से जूझ रहा है, तब योग मानवता को शांति, स्वास्थ्य और आत्मबोध का मार्ग दिखा रहा है।
योग केवल शरीर को मोड़ने की कला नहीं, बल्कि जीवन को सही दिशा देने की साधना है।
यह केवल एक दिन का उत्सव नहीं, बल्कि जीवनभर अपनाई जाने वाली संस्कृति है।
स्वामी शिवानन्द के शब्दों में—
*“स्वास्थ्य ही धन है, मन की शांति ही सुख है और योग उसका मार्ग है।”*
आइए, हम सब संकल्प लें कि योग को केवल अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस तक सीमित न रखकर अपने दैनिक जीवन का अभिन्न अंग बनाएँ।
*“करें योग, रहें निरोग” केवल एक नारा नहीं, बल्कि स्वस्थ,* *समृद्ध और शांतिपूर्ण मानव सभ्यता का आधार है।*
*“योग के माध्यम से ही हम एक स्वस्थ शरीर, शांत मन*, *जाग्रत चेतना और श्रेष्ठ मानवता का निर्माण कर सकते हैं।”*










