सालानपुर में भाजपा की गुटबाजी बनी समस्या
भ्रष्टाचार, गुटबाजी और ‘जल माफिया’ के आरोपों ने घिरी भाजपा
सत्ता की साख दांव पर
वायरल वीडियो और अवैध वसूली के दावों से राजनीतिक भूचाल
सालानपुर/कल्याणेश्वरी
पश्चिम बंगाल की राजनीति में विधानसभा चुनावों के बाद बदले समीकरणों के बीच सालानपुर ब्लॉक के देंदुआ-कल्याणेश्वरी औद्योगिक क्षेत्र में भाजपा की आंतरिक कलह किसी ‘बारूद के ढेर’ जैसी हो गई है। पार्टी के भीतर चल रही ‘असली बनाम नकली’ भाजपा की जंग अब सड़कों पर आ चुकी है। कटमनी, कोयला तस्करी और जमीन के अवैध धंधों के आरोपों के बीच अब ‘जल माफिया’ के नए खुलासे ने भाजपा की स्थानीय इकाई को बैकफुट पर ला खड़ा किया है।
क्या है अंदरूनी कलह का कारण?
सालानपुर ब्लॉक में पार्टी दो स्पष्ट धड़ों में बंटी नजर आ रही है। एक गुट स्थानीय विधायक अरिजीत राय के समर्थकों का है, तो दूसरा गुट उनके भाई अभिजीत राय खेमे का बताया जा रहा है। हाल ही में सोशल मीडिया पर वायरल हुए 2-3 वीडियो ने इस रार को सार्वजनिक कर दिया है। इन वीडियो में भाजपा नेता देबब्रत मंडल, पार्टी के ही नेता कृष्णा बाउरी को अवैध गतिविधियों से दूर रहने की सख्त चेतावनी देते नजर आ रहे हैं।
देबब्रत मंडल का आरोप है कि जो लोग तृणमूल कांग्रेस के शासनकाल में ‘हर्मदगिरी’ और कोयला तस्करी करते थे, आज वे भाजपा में घुसपैठ कर पार्टी का नाम बदनाम कर रहे हैं। वहीं, कृष्णा बाउरी ने इन आरोपों को निराधार बताते हुए अमर महतो पर निशाना साधा और दावा किया कि घायल मजदूरों के मुआवजे में कटमनी ली जा रही है। इस खींचतान ने बाराबनी विधानसभा में पार्टी की संगठनात्मक नींव को हिलाकर रख दिया है।
‘जल माफिया’ का उदय और पार्टी की किरकिरी
विवादों के बीच अब एक नया मामला ‘जल व्यापार’ का सामने आया है। बीते शुक्रवार को नाकड़ाजोड़िया इलाके में ग्रामीणों ने एक पानी का टैंकर पकड़ा। पूछताछ में चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि यह अवैध कारोबार भाजपा नेता कृष्णा बाउरी के इशारे पर चल रहा था। जिसके बाद आरोपों की झड़ी लग गई है। आरोप है कि खेतों की मेड़ों से पानी चुराकर होस पाइप और शक्तिशाली पंपों के जरिए टैंकरों में भरा जा रहा था। इन टैंकरों को स्थानीय कारखानों में 1200 रुपये प्रति टैंकर बेचा जा रहा था। अवैध पंपिंग से भू-जल स्तर गिर रहा है, जिससे खेती और मवेशियों के लिए पानी का गंभीर संकट पैदा हो गया है।
कार्यकर्ता ही बन रहे हैं विरोध का चेहरा
हैरानी की बात यह है कि कृष्णा बाउरी के खिलाफ केवल ग्रामीण ही नहीं, बल्कि भाजपा के अपने कार्यकर्ता भी लामबंद हो गए हैं। नाकड़ाजोड़िया में ही एक हार्डवेयर दुकान के बाहर भाजपा कार्यकर्ताओं ने उन्हें घेरकर न केवल खरी-खोटी सुनाई, बल्कि उन पर जबरन वसूली (टोलाबाजी) और रिफैक्ट्री बंद कराने का भी आरोप लगाया। वायरल हो रहे एक अन्य वीडियो में भाजपा कार्यकर्ताओं को यह कहते सुना जा सकता है— भाजपा ‘जीरो टॉलरेंस’ की पार्टी है, यहाँ अवैध वसूली बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
राजनीतिक भविष्य पर प्रश्नचिह्न
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सालानपुर की यह घटना केवल गुटबाजी नहीं, बल्कि क्षेत्र के ‘पावर सेंटर’ पर कब्जे की जंग है। एक ओर सरकार अवैध सिंडिकेट तोड़ने का दावा कर रही है, वहीं दूसरी ओर सत्ताधारी दल के नाम का इस्तेमाल कर प्राकृतिक संसाधनों की चोरी ने प्रशासन के दावों पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
फिलहाल, इस पूरे घटनाक्रम ने बाराबनी विधानसभा क्षेत्र में भाजपा की साख पर गहरा बट्टा लगाया है। क्षेत्र की जनता अब जिला प्रशासन और भाजपा के शीर्ष नेतृत्व की ओर उम्मीद भरी निगाहों से देख रही है कि क्या पार्टी अपने घर को व्यवस्थित कर पाएगी या यह गुटबाजी आगामी समय में भाजपा के लिए आत्मघाती साबित होगी।
वही मामले में देबब्रत मंडल ने कृष्णा बाउरी पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि तृणमूल कांग्रेस के शासनकाल में वे अवैध कोयला तस्करी में शामिल थे।
वीडियो वायरल होने के बाद कृष्णा बाउरी ने पार्टी के भीतर गुटबाजी की बात स्वीकार की है। उन्होंने बड़ा खुलासा करते हुए कहा, “मैं स्थानीय विधायक अरिजीत राय के खेमे का हूं, जबकि मेरे विरोधी गुट का नेतृत्व उनके भाई अभिजीत राय खेमे के हैं।
अपने ऊपर लगे आरोपों की सफाई देते हुए कृष्णा बाउरी ने कहा, “मैंने 2018 में टीएमसी छोड़कर बीजेपी का दामन थामा था। टीएमसी के दौर में आर्थिक तंगी के कारण कोयले के काम में शामिल होना पड़ा था, लेकिन बीजेपी में आने के बाद मेरा किसी भी भ्रष्टाचार से कोई लेना-देना नहीं है।” उन्होंने पलटवार करते हुए अमर महतो पर निशाना साधा और आरोप लगाया कि घायल श्रमिकों के मुआवजे में भी कटमनी ली गई है।
दूसरी ओर, बीते श्रमिक आंदोलनों का चेहरा रहे अमर महतो ने सफाई देते हुए कहा, “मैंने हमेशा श्रमिकों के हक के लिए लड़ाई लड़ी है। मेरा एकमात्र स्वार्थ मजदूरों को उनका हक दिलाना है। कौन क्या आरोप लगा रहा है, उससे मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता।
वहीं, अपने रुख पर अडिग देबब्रत मंडल ने दो टूक कहा, “जो लोग टीएमसी के दौर में दादागिरी करते थे, वे आज खुद को बड़ा बीजेपी नेता बता रहे हैं। हमने टीएमसी के दमन के बावजूद पार्टी को सींचा और मजबूत किया है। बीजेपी शासन में अब टीएमसी जैसी दलबाजी नहीं चलेगी। हमने पूरी स्थिति से राज्य और जिला नेतृत्व को अवगत करा दिया है।
वही दूसरी और पूरे घटनाक्रम ने भाजपा को बाराबनी विधानसभा में दो गुटों में बांटने का संकेत दिया है। जो भविष्य में भाजपा के लिये चिंता के विषय बन सकती है।










