तीन छात्रों की मौत पर स्कूल प्रशासन की ‘सफाई’: क्या लापरवाही छिपाने की हो रही है कोशिश?
कुल्टी।नियामतपुर के पीस पब्लिक स्कूल के तीन छात्रों की दिसेरगढ़ नदी में डूबने से हुई दर्दनाक मौत ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। घटना के बाद से ही स्कूल प्रबंधन की कार्यप्रणाली और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। इस बीच, खुद को चौतरफा घिरा देख स्कूल प्रबंधन ने एक पत्रकार सम्मेलन बुलाकर अपनी सफाई पेश की, जिसे लेकर स्थानीय लोगों और अभिभावकों में आक्रोश और बढ़ गया है।लापरवाही पर पर्दा डालने का प्रयास? शनिवार को पत्रकार सम्मेलन में स्कूल के निदेशक मो. इंतिखाब आलम, शिक्षक अरिंदम दास, समा परवीन और वरिष्ठ शिक्षक रमेश शाव मौजूद रहे। प्रबंधन ने घटना पर गहरा दुख जताते हुए इसे एक “असामयिक मृत्यु” और “त्रासदी” करार दिया। हालांकि, स्थानीय सूत्रों और अभिभावकों का आरोप है कि स्कूल प्रशासन अपनी उस गंभीर लापरवाही से ध्यान भटकाने की कोशिश कर रहा है, जिसके कारण कक्षा 9 और 10 के तीन मासूम बच्चों को अपनी जान गंवानी पड़ी। सवाल यह उठ रहा है कि स्कूल समय के दौरान या स्कूल की निगरानी में बच्चे इतनी दूर नदी तक कैसे पहुँच गए और प्रशासन को इसकी भनक तक क्यों नहीं लगी?नकारात्मक चर्चाओं को खारिज करने की जल्दबाजी निदेशक इंतिखाब आलम ने माना कि स्कूल में नियामतपुर, आसनसोल, कुल्टी, बराकर और चितरंजन जैसे दूर-दराज के इलाकों से बच्चे पढ़ने आते हैं। ऐसे में बच्चों की सुरक्षा की पूरी जिम्मेदारी स्कूल प्रशासन की बनती है। लेकिन अपनी गलती सीधे तौर पर स्वीकार करने के बजाय, प्रबंधन ने पिछले कुछ दिनों से इलाके में स्कूल के खिलाफ चल रही “नकारात्मक चर्चाओं” को खारिज करने में अधिक दिलचस्पी दिखाई। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रबंधन इस हादसे को सिर्फ एक दुर्घटना साबित कर अपनी जवाबदेही से पल्ला झाड़ना चाहता है।हादसे के बाद जागी नींद, सुरक्षा प्रोटोकॉल का वादाअब जब तीन घरों के चिराग बुझ चुके हैं, तब जाकर स्कूल प्रशासन सुरक्षा प्रोटोकॉल को कड़ा करने की बात कह रहा है। प्रबंधन ने घोषणा की है कि वे अब माता-पिता के प्रतिनिधियों के साथ बैठक करेंगे और निगरानी व्यवस्था को सुदृढ़ बनाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए अभिभावकों की सक्रिय भागीदारी जरूरी है।इस बयान पर पलटवार करते हुए कई अभिभावकों ने कहा, “जब हम भारी-भरकम फीस देकर अपने बच्चों को स्कूल भेजते हैं, तो परिसर और बच्चों की सुरक्षा की जिम्मेदारी प्रबंधन की होती है, न कि अभिभावकों की। हादसे के बाद निगरानी बढ़ाने का खोखला वादा केवल अपनी साख बचाने की कवायद है।”फिलहाल, स्कूल प्रशासन ने शोकग्रस्त परिवारों को यथासंभव सहयोग देने का वादा किया है, लेकिन पीड़ित परिवारों और स्थानीय जनता की मांग है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो ताकि स्कूल प्रबंधन की लापरवाही उजागर हो सके और दोषियों को कड़ी सजा मिले।










