सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुपालन और पेंशन विवाद को लेकर सेवानिवृत्त न्यायाधीश पहुंचीं अदालत
खड़गपुर,: पश्चिम बंगाल में जिला न्यायपालिका के न्यायाधीशों को उच्च शैक्षणिक योग्यता (एलएल.एम.) के लिए अतिरिक्त वेतन वृद्धि (इन्क्रीमेंट) तथा सेवानिवृत्त अतिरिक्त जिला न्यायाधीश सोमा चक्रवर्ती की पेंशन से जुड़ा मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। सोमा चक्रवर्ती ने अवमानना याचिका दायर करते हुए कहा है कि सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप वेतन निर्धारण नहीं होने के कारण उन्हें अब तक पेंशन और अन्य सेवानिवृत्ति लाभ नहीं मिल सके हैं।
31 मई 2024 को बनगांव फास्ट ट्रैक कोर्ट से सेवानिवृत्त हुईं सोमा चक्रवर्ती का कहना है कि सरकार और महालेखाकार की ओर से उन पर लगभग 13.90 लाख रुपये के कथित अतिरिक्त भुगतान की वसूली का दावा किया गया है, जबकि उनके अनुसार वेतन का निर्धारण सक्षम अधिकारियों की स्वीकृति से किया गया था और सेवा अवधि के दौरान इस पर कोई आपत्ति नहीं उठाई गई।
याचिका में कहा गया है कि ऑल इंडिया जजेस एसोसिएशन बनाम यूनियन ऑफ इंडिया मामले में सुप्रीम कोर्ट ने जिला न्यायपालिका के न्यायाधीशों को एलएल.एम. डिग्री के लिए अतिरिक्त वेतन वृद्धि का लाभ देने संबंधी निर्देश दिए थे। याचिकाकर्ता का कहना है कि 22 अक्टूबर 2024 को जारी राज्य सरकार के आदेश के बाद इन निर्देशों के अनुपालन को लेकर विवाद उत्पन्न हुआ।
इसी विषय पर न्यायाधीशों के संगठन की एक अवमानना याचिका भी सर्वोच्च न्यायालय में लंबित है। वहीं सोमा चक्रवर्ती ने ‘सोमा चक्रवर्ती बनाम अन्य’ शीर्षक से अलग अवमानना याचिका दायर की है।
उन्हें उम्मीद है कि नव-निर्वाचित सरकार उनकी बात समझेगी और उनकी समस्या का समाधान करेगी। उन्होंने कहा कि पिछले दो वर्षों से वे पेंशन लाभ से वंचित हैं और आर्थिक तंगी से जूझ रही हैं।










