*हिंदी विश्वविद्यालय में शिक्षा के नए प्रतिमान की शुरुआत, छह नए विषयों में पढ़ाई की तैयारी*
*हावड़ा।* अक्सर विश्वविद्यालयों पर केवल उपाधि देने का आरोप लगता है, पर इस परम्परा से अलग हटकर हिंदी विश्वविद्यालय एक नया मार्ग बना रहा है। वर्ष 2020 में स्थापित यह विश्वविद्यालय राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप समग्र, कौशल आधारित और विभिन्न विषयों को आपस में जोड़ने वाली शिक्षा पर बल दे रहा है।
विश्वविद्यालय की कुलपति प्रोफेसर नंदिनी साहू के नेतृत्व में यहाँ शिक्षा को रटने की प्रणाली से निकालकर चिंतन, खोज और व्यवहार से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। समाज और बाजार की बदलती मांग के अनुसार विद्यार्थियों को ज्ञान के साथ-साथ कार्य-कुशलता और नई सोच के लिए तैयार किया जा रहा है।
वर्तमान में विश्वविद्यालय में हिंदी, इतिहास, राजनीति विज्ञान और अनुवाद विज्ञान में स्नातकोत्तर की पढ़ाई हो रही है। अब विश्वविद्यालय छह नए पाठ्यक्रम शुरू करने जा रहा है। इनमें अंग्रेजी, तुलनात्मक विश्व साहित्य, लोक साहित्य, हिन्दू अध्ययन, भारतीय ज्ञान परम्परा और भूगोल विषय शामिल हैं।
विश्वविद्यालय का मानना है कि कक्षा का सैद्धांतिक ज्ञान तभी सार्थक होता है जब वह व्यवहार में उतरे। इसलिए यहाँ विद्यार्थियों को पाठ को याद कर उत्तर-पुस्तिका में लिखने के बजाय प्रश्न करने और अन्वेषण करने के लिए प्रेरित किया जाता है। साहित्य को इतिहास से, राजनीतिक चिंतन को सांस्कृतिक अध्ययन से और पारम्परिक ज्ञान को वर्तमान सामाजिक यथार्थ से जोड़ा जा रहा है।
पढ़ाई के साथ-साथ विद्यार्थियों के लिए प्रशिक्षुता, क्षेत्रीय शोध, कार्यशालाएँ और सामुदायिक सहभागिता के कार्यक्रम भी चलाए जा रहे हैं। कुलपति के मार्गदर्शन में तुलनात्मक विश्व साहित्य और शोध पद्धति पर नियमित व्याख्यान श्रृंखला का आयोजन हो रहा है, जिसमें देश-विदेश के विद्वान अपने विचार साझा कर रहे हैं।
विश्वविद्यालय का ध्येय ऐसे विद्यार्थियों का निर्माण करना है जो विचार में वैश्विक, दृष्टि में राष्ट्रीय और कर्म में मानवतावादी हों।










