अदालत के मुख्य द्वार पर अधिवक्ताओं की तालाबंदी, पुलिस की कार्यप्रणाली के खिलाफ फूटा गुस्सा
एफआईआर दर्ज करने में ‘अति सक्रियता और अति निष्क्रियता’ का आरोप, पुलिस कमिश्नर से वार्ता और निष्पक्ष कार्रवाई की मांग पर अड़े वकील
आसनसोल, पश्चिम बंगाल।
आसनसोल जिला अदालत परिसर सोमवार को उस समय विरोध का केंद्र बन गया जब बड़ी संख्या में अधिवक्ताओं ने अदालत के मुख्य प्रवेश द्वार पर प्रतीकात्मक तालाबंदी कर पुलिस की कार्यप्रणाली के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। अधिवक्ताओं का आरोप है कि पुलिस एफआईआर दर्ज करने के मामलों में दोहरा मापदंड अपना रही है। उनका कहना है कि अधिवक्ताओं की शिकायतों पर कार्रवाई करने में पुलिस अत्यधिक निष्क्रिय रहती है, जबकि दूसरी ओर बिना पर्याप्त जांच के उनके खिलाफ दर्ज शिकायतों पर तत्काल एफआईआर कर दी जाती है। इसी कथित, अति सक्रियता और अति निष्क्रियता, के विरोध में बार एसोसिएशन के सदस्य सड़क पर उतर आए।

प्रदर्शन के दौरान अधिवक्ताओं ने पुलिस प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की और मांग की कि आसनसोल-दुर्गापुर पुलिस कमिश्नरेट के पुलिस आयुक्त स्वयं प्रदर्शन स्थल पर आकर अधिवक्ताओं के सवालों का जवाब दें तथा पूरे मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करें। प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट किया कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, उनका आंदोलन जारी रहेगा।
आसनसोल जिला अदालत के वरिष्ठ अधिवक्ता शेखर कुंडी ने कहा कि यदि किसी अधिवक्ता के खिलाफ शिकायत मिलती है तो पुलिस को पहले शिकायत की जांच करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि बार एसोसिएशन के अध्यक्ष और सचिव से संपर्क कर संबंधित अधिवक्ता के बारे में जानकारी लेना पुलिस की जिम्मेदारी है। बिना प्रारंभिक जांच और बार एसोसिएशन से संवाद किए सीधे एफआईआर दर्ज करना न्यायसंगत नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस नियमों और स्थापित प्रक्रिया की अनदेखी कर रही है, जिससे अधिवक्ताओं में असंतोष बढ़ रहा है।
आसनसोल बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अयन रंजन मुखर्जी ने बताया कि 17 जुलाई को जिला अदालत परिसर में एक विवाद हुआ था। उनके अनुसार, बाहरी पक्ष के कुछ लोगों ने एक अधिवक्ता के साथ कथित रूप से अभद्र व्यवहार किया, मारपीट की और जान से मारने की धमकी दी। इस घटना के बाद संबंधित अधिवक्ता ने पुलिस से शिकायत कर आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। उनका आरोप है कि पुलिस ने शिकायत मिलने के बाद केवल जांच का आश्वासन दिया, लेकिन एफआईआर दर्ज नहीं की। दूसरी ओर, विरोधी पक्ष की शिकायत पर कई अधिवक्ताओं के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज कर ली गई, जबकि उनमें से कुछ अधिवक्ता घटना के समय अदालत परिसर में मौजूद भी नहीं थे।
मुख्य पीड़ित अधिवक्ता नरेन साव ने बताया कि वर्ष 2016 से उनका अपने पड़ोस में रहने वाली तारा साव और उनके परिवार के साथ एक विवाद चल रहा है, जिसका मामला अभी भी आसनसोल जिला अदालत में विचाराधीन है। उनके अनुसार, 17 जुलाई को इस मामले की सुनवाई थी, लेकिन तारा साव अदालत में उपस्थित नहीं हुईं। सुनवाई के दौरान उनके परिवार के सदस्य हरिशंकर साव, सुशीला साव तथा अन्य लोग अदालत पहुंचे और कथित रूप से उनके साथ अभद्र व्यवहार किया, मारपीट की तथा गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी। नरेन साव ने कहा कि उन्होंने इस संबंध में आसनसोल दक्षिण पुलिस फाड़ी में लिखित शिकायत देकर एफआईआर दर्ज करने की मांग की थी, लेकिन पुलिस ने केवल जांच का आश्वासन दिया।
दूसरी ओर, नामोपाड़ा स्थित गौर मंदिर के पास रहने वाली तारा साव ने अधिवक्ता नरेन साव, राजेंद्र साव, अनीमेष सिन्हा, तबिश सरवर, पवन कुमार जायसवाल, राहुल केशरी, अंतरा सहित कई अन्य लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि अदालत परिसर में सुशीला शॉ के साथ अभद्र व्यवहार और बल प्रयोग कर उनकी अस्मिता भंग करने का प्रयास किया गया। इसके अलावा हरिशंकर शॉ से मोबाइल फोन, मंगलसूत्र और पांच हजार रुपये नकद छीनने का भी आरोप लगाया गया है। शिकायत में यह भी कहा गया है कि अधिवक्ता नरेन साव के नेतृत्व मे उनके अन्य साथी अधिवक्ताओं ने विभिन्न आपराधिक मामलों के खर्च के नाम पर चार लाख रुपये की मांग की तथा रकम नहीं देने पर गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी। शिकायत के अनुसार, इस घटना से अदालत परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बना और न्यायिक कार्यवाही भी प्रभावित हुई।
इसी एफआईआर को लेकर अधिवक्ताओं ने पुलिस पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि जिस पक्ष की शिकायत पर तत्काल एफआईआर दर्ज की गई, उसकी शिकायत की भी समुचित जांच नहीं की गई और न ही बार एसोसिएशन से कोई संपर्क किया गया। वहीं, अधिवक्ता द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत पर एफआईआर नहीं की गई। महिला द्वारा की गई शिकायत पर एफआईआर करने के बाद जब अधिवक्ताओं द्वारा पुलिस पर दबाव बढ़ा तब जाकर पीड़ित अधिवक्ता नरेन साव के द्वारा दी गई शिकायता पर एफआईआर की गई, वहीं बार एसोसिएशन का कहना है कि उनका विरोध किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि पुलिस की कथित पक्षपातपूर्ण कार्यप्रणाली के खिलाफ है। अधिवक्ताओं ने मांग की है कि दोनों पक्षों की शिकायतों की निष्पक्ष जांच हो, दोषियों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए और भविष्य में किसी भी अधिवक्ता के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने से पहले निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया जाए।
प्रदर्शनकारी अधिवक्ताओं ने चेतावनी दी कि जब तक पुलिस आयुक्त स्वयं आकर मामले पर स्पष्ट जवाब नहीं देते और निष्पक्ष कार्रवाई का भरोसा नहीं दिलाते, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। अधिवक्ताओं ने कहा की उनका विरोध प्रदर्शन का आज तीसरा दिन है, अगर उनकी मांग को पूरा नही किया गया तो उनका यह विरोध प्रदर्शन आगे भी जारी रहेगा, अदालत परिसर में विरोध प्रदर्शन के चलते कुछ समय के लिए सामान्य गतिविधियां भी प्रभावित रहीं, जबकि सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस बल तैनात रहा। के मुख्य द्वार पर अधिवक्ताओं की तालाबंदी, पुलिस की कार्यप्रणाली के खिलाफ फूटा गुस्सा
एफआईआर दर्ज करने में ‘अति सक्रियता और अति निष्क्रियता’ का आरोप, पुलिस कमिश्नर से वार्ता और निष्पक्ष कार्रवाई की मांग पर अड़े वकील
आसनसोल, पश्चिम बंगाल।
आसनसोल जिला अदालत परिसर सोमवार को उस समय विरोध का केंद्र बन गया जब बड़ी संख्या में अधिवक्ताओं ने अदालत के मुख्य प्रवेश द्वार पर प्रतीकात्मक तालाबंदी कर पुलिस की कार्यप्रणाली के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। अधिवक्ताओं का आरोप है कि पुलिस एफआईआर दर्ज करने के मामलों में दोहरा मापदंड अपना रही है। उनका कहना है कि अधिवक्ताओं की शिकायतों पर कार्रवाई करने में पुलिस अत्यधिक निष्क्रिय रहती है, जबकि दूसरी ओर बिना पर्याप्त जांच के उनके खिलाफ दर्ज शिकायतों पर तत्काल एफआईआर कर दी जाती है। इसी कथित, अति सक्रियता और अति निष्क्रियता, के विरोध में बार एसोसिएशन के सदस्य सड़क पर उतर आए।
प्रदर्शन के दौरान अधिवक्ताओं ने पुलिस प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की और मांग की कि आसनसोल-दुर्गापुर पुलिस कमिश्नरेट के पुलिस आयुक्त स्वयं प्रदर्शन स्थल पर आकर अधिवक्ताओं के सवालों का जवाब दें तथा पूरे मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करें। प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट किया कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, उनका आंदोलन जारी रहेगा।
आसनसोल जिला अदालत के वरिष्ठ अधिवक्ता शेखर कुंडी ने कहा कि यदि किसी अधिवक्ता के खिलाफ शिकायत मिलती है तो पुलिस को पहले शिकायत की जांच करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि बार एसोसिएशन के अध्यक्ष और सचिव से संपर्क कर संबंधित अधिवक्ता के बारे में जानकारी लेना पुलिस की जिम्मेदारी है। बिना प्रारंभिक जांच और बार एसोसिएशन से संवाद किए सीधे एफआईआर दर्ज करना न्यायसंगत नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस नियमों और स्थापित प्रक्रिया की अनदेखी कर रही है, जिससे अधिवक्ताओं में असंतोष बढ़ रहा है।
आसनसोल बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अयन रंजन मुखर्जी ने बताया कि 17 जुलाई को जिला अदालत परिसर में एक विवाद हुआ था। उनके अनुसार, बाहरी पक्ष के कुछ लोगों ने एक अधिवक्ता के साथ कथित रूप से अभद्र व्यवहार किया, मारपीट की और जान से मारने की धमकी दी। इस घटना के बाद संबंधित अधिवक्ता ने पुलिस से शिकायत कर आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। उनका आरोप है कि पुलिस ने शिकायत मिलने के बाद केवल जांच का आश्वासन दिया, लेकिन एफआईआर दर्ज नहीं की। दूसरी ओर, विरोधी पक्ष की शिकायत पर कई अधिवक्ताओं के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज कर ली गई, जबकि उनमें से कुछ अधिवक्ता घटना के समय अदालत परिसर में मौजूद भी नहीं थे।
मुख्य पीड़ित अधिवक्ता नरेन साव ने बताया कि वर्ष 2016 से उनका अपने पड़ोस में रहने वाली तारा साव और उनके परिवार के साथ एक विवाद चल रहा है, जिसका मामला अभी भी आसनसोल जिला अदालत में विचाराधीन है। उनके अनुसार, 17 जुलाई को इस मामले की सुनवाई थी, लेकिन तारा साव अदालत में उपस्थित नहीं हुईं। सुनवाई के दौरान उनके परिवार के सदस्य हरिशंकर साव, सुशीला साव तथा अन्य लोग अदालत पहुंचे और कथित रूप से उनके साथ अभद्र व्यवहार किया, मारपीट की तथा गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी। नरेन साव ने कहा कि उन्होंने इस संबंध में आसनसोल दक्षिण पुलिस फाड़ी में लिखित शिकायत देकर एफआईआर दर्ज करने की मांग की थी, लेकिन पुलिस ने केवल जांच का आश्वासन दिया।
दूसरी ओर, नामोपाड़ा स्थित गौर मंदिर के पास रहने वाली तारा साव ने अधिवक्ता नरेन साव, राजेंद्र साव, अनीमेष सिन्हा, तबिश सरवर, पवन कुमार जायसवाल, राहुल केशरी, अंतरा सहित कई अन्य लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि अदालत परिसर में सुशीला शॉ के साथ अभद्र व्यवहार और बल प्रयोग कर उनकी अस्मिता भंग करने का प्रयास किया गया। इसके अलावा हरिशंकर शॉ से मोबाइल फोन, मंगलसूत्र और पांच हजार रुपये नकद छीनने का भी आरोप लगाया गया है। शिकायत में यह भी कहा गया है कि अधिवक्ता नरेन साव के नेतृत्व मे उनके अन्य साथी अधिवक्ताओं ने विभिन्न आपराधिक मामलों के खर्च के नाम पर चार लाख रुपये की मांग की तथा रकम नहीं देने पर गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी। शिकायत के अनुसार, इस घटना से अदालत परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बना और न्यायिक कार्यवाही भी प्रभावित हुई।
इसी एफआईआर को लेकर अधिवक्ताओं ने पुलिस पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि जिस पक्ष की शिकायत पर तत्काल एफआईआर दर्ज की गई, उसकी शिकायत की भी समुचित जांच नहीं की गई और न ही बार एसोसिएशन से कोई संपर्क किया गया। वहीं, अधिवक्ता द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत पर एफआईआर नहीं की गई। महिला द्वारा की गई शिकायत पर एफआईआर करने के बाद जब अधिवक्ताओं द्वारा पुलिस पर दबाव बढ़ा तब जाकर पीड़ित अधिवक्ता नरेन साव के द्वारा दी गई शिकायता पर एफआईआर की गई, वहीं बार एसोसिएशन का कहना है कि उनका विरोध किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि पुलिस की कथित पक्षपातपूर्ण कार्यप्रणाली के खिलाफ है। अधिवक्ताओं ने मांग की है कि दोनों पक्षों की शिकायतों की निष्पक्ष जांच हो, दोषियों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए और भविष्य में किसी भी अधिवक्ता के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने से पहले निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया जाए।
प्रदर्शनकारी अधिवक्ताओं ने चेतावनी दी कि जब तक पुलिस आयुक्त स्वयं आकर मामले पर स्पष्ट जवाब नहीं देते और निष्पक्ष कार्रवाई का भरोसा नहीं दिलाते, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। अधिवक्ताओं ने कहा की उनका विरोध प्रदर्शन का आज तीसरा दिन है, अगर उनकी मांग को पूरा नही किया गया तो उनका यह विरोध प्रदर्शन आगे भी जारी रहेगा, अदालत परिसर में विरोध प्रदर्शन के चलते कुछ समय के लिए सामान्य गतिविधियां भी प्रभावित रहीं, जबकि सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस बल तैनात रहा।










